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Udham Singh Nagar News: सार्वजनिक रास्ते पर निर्माण और आवागमन बाधित करने पर रोक
Thu, 29 Oct 2026 02:09 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
Updated Thu, 29 Oct 2026 02:09 AM IST
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जसपुर। मोहल्ला गुजराती में सार्वजनिक रास्ते पर पिलर लगाकर निर्माण करने और आवागमन बाधित करने के मामले में सिविल जज (जूनियर डिवीजन) जहांआरा अंसारी की अदालत ने स्थायी निषेधाज्ञा का आदेश दिया है। अदालत ने प्रतिवादियों को रास्ते पर पिलर लगाने, 10 फुट ऊंचा लिंटर डालने, उसके ऊपर कमरा बनाने और आवागमन अवरुद्ध करने से रोक दिया है।
मोहल्ला गुजराती निवासी रामअवतार सिंह ने बलराम सिंह समेत सात लोगों के खिलाफ स्थायी निषेधाज्ञा का वाद दायर किया था। वादी के अनुसार, उनके मकान के पूर्व दिशा में छह फुट चौड़ा रास्ता है, जिसका उपयोग वह और आसपास के 10 से 15 परिवार पिछले 30 से 40 वर्षों से करते आ रहे हैं। इसी रास्ते से घरों में पानी की पाइपलाइन और बिजली के तार भी गुजरते हैं।
वादी का आरोप था कि प्रतिवादी रास्ते पर सीमेंट के पिलर लगाकर 10 फुट ऊंचा लिंटर डालना चाहते थे। इससे रास्ता बंद होने के साथ ही उनके घर में हवा, पानी और रोशनी प्रभावित होने की आशंका थी। इस पर उन्होंने अदालत से निर्माण कार्य पर रोक लगाने की मांग की थी।
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अदालत ने मामले में प्रस्तुत दस्तावेजों और गवाहों के बयानों का परीक्षण किया। फैसले के अनुसार प्रतिवादी अदालत में उपस्थित नहीं हुए और न ही उन्होंने अपना जवाब या आपत्ति दाखिल की। उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने रास्ते को सार्वजनिक मानते हुए वादी के पक्ष में स्थायी निषेधाज्ञा का आदेश पारित किया।
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मोहल्ला गुजराती निवासी रामअवतार सिंह ने बलराम सिंह समेत सात लोगों के खिलाफ स्थायी निषेधाज्ञा का वाद दायर किया था। वादी के अनुसार, उनके मकान के पूर्व दिशा में छह फुट चौड़ा रास्ता है, जिसका उपयोग वह और आसपास के 10 से 15 परिवार पिछले 30 से 40 वर्षों से करते आ रहे हैं। इसी रास्ते से घरों में पानी की पाइपलाइन और बिजली के तार भी गुजरते हैं।
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वादी का आरोप था कि प्रतिवादी रास्ते पर सीमेंट के पिलर लगाकर 10 फुट ऊंचा लिंटर डालना चाहते थे। इससे रास्ता बंद होने के साथ ही उनके घर में हवा, पानी और रोशनी प्रभावित होने की आशंका थी। इस पर उन्होंने अदालत से निर्माण कार्य पर रोक लगाने की मांग की थी।
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अदालत ने मामले में प्रस्तुत दस्तावेजों और गवाहों के बयानों का परीक्षण किया। फैसले के अनुसार प्रतिवादी अदालत में उपस्थित नहीं हुए और न ही उन्होंने अपना जवाब या आपत्ति दाखिल की। उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने रास्ते को सार्वजनिक मानते हुए वादी के पक्ष में स्थायी निषेधाज्ञा का आदेश पारित किया।