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Udham Singh Nagar News: आसमान से बरसी संजीवनी, मूर्छित फसल में लौटी चेतना
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
Updated Sat, 24 Jan 2026 12:45 AM IST
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काशीपुर। शुक्रवार सुबह 11 बजे के बाद बारिश शुरू हुई जो देर शाम तक जारी रही। रिमझिम बारिश संजीवनी बनकर मूर्छित गेहूं की फसल को चेतना दे गई। इससे किसानों के चेहरे खिल उठे। दिनभर बारिश हाेने से ठंड में इजाफा हुआ है और शाम को लोग अपने घरों में घुस गए।
सितंबर से बारिश नहीं हुई थी और किसानों ने खेतों में गेंहू की बुआई कर दी थी। गेहूं लगा तो सही लेकिन बारिश नहीं होने की वजह से ग्रोथ नहीं कर पा रहा था। ऐसे में किसान बारिश नहीं होने से मायूस नजर आ रहे थे।
किसान अनिल चौधरी, दीपक चौहान, बलविंदर सिंह कहते हैं कि काफी लंबे समय से बारिश के इंतजार में आसमान की ओर टकटकी लगाए किसानों के लिए बारिश वास्तव में बेशुमार खुशी लेकर आई। दूसरी ओर दिन भर बादलों का डेरा और बारिश से ठंड में बढ़ोतरी हुई। पांच दिनों से तेज धूप से जहां तापमान में बढ़ोतरी हुई थी लेकिन शुक्रवार को हुई बारिश से तापमान में गिरावट नजर आई।
कृषि अर्थव्यवस्था पर प्रभाव डालेगी बारिश
उद्यान वैज्ञानिक डॉ. अनिल चंद्रा ने कहा कि मैदानी जिलों में गन्ने की फसल में शुगर रिकवरी में सुधार होगा और वजन में बढ़ोतरी होगी। ऊधमसिंह नगर में ग्रीष्मकालीन धान के विकल्प के रूप में प्रमोट किए जा रहे मक्का के लिए यह बारिश प्री-सोइंग रिचार्ज साबित होगी। इससे किसानों का बुवाई पूर्व सिंचाई का खर्च बचेगा और बीज का अंकुरण बेहतर होगा। उन्होंने किसानों को चेतावनी दी है कि बारिश के साथ ओलावृष्टि की संभावना भी बनी हुई है जो सरसों जैसी फूल वाली फसलों को नुकसान पहुंचा सकती है। किसानों को सलाह दी गई है कि वे खेतों में जल निकासी सुनिश्चित करें। ओलावृष्टि के बाद कीटों के हमले की निगरानी करें। आज की नमी का लाभ उठाते हुए नई फसलों (मक्का, गन्ना) की बुआई की तैयारी शुरू करें। आज की बारिश उत्तराखंड की कृषि अर्थव्यवस्था के लिए निर्णायक मोड़ है।
इनसेट...
बारिश से मिली प्राकृतिक नाइट्रोजन और नमी
डॉ. चंद्रा ने बताया कि राज्य के मैदानी क्षेत्रों में वर्षा और उच्च हिमालयी क्षेत्रों में हुई बर्फबारी ने न केवल रबी फसलों को पुनर्जीवित किया है, बल्कि भविष्य की नकदी फसलों के लिए भी अमृत का काम किया है। सिंचाई के अभाव में दम तोड़ रही गेहूं की फसल को इस बारिश से प्राकृतिक नाइट्रोजन और नमी मिली है, जिससे पौधों में कल्ले फूटने में मदद मिलेगी। वहीं, पहाड़ों में सब्जी मटर की फलियों में दानों का भराव अब बेहतर होगा जिससे पैदावार में 20 प्रतिशत तक सुधार की उम्मीद है।
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सितंबर से बारिश नहीं हुई थी और किसानों ने खेतों में गेंहू की बुआई कर दी थी। गेहूं लगा तो सही लेकिन बारिश नहीं होने की वजह से ग्रोथ नहीं कर पा रहा था। ऐसे में किसान बारिश नहीं होने से मायूस नजर आ रहे थे।
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किसान अनिल चौधरी, दीपक चौहान, बलविंदर सिंह कहते हैं कि काफी लंबे समय से बारिश के इंतजार में आसमान की ओर टकटकी लगाए किसानों के लिए बारिश वास्तव में बेशुमार खुशी लेकर आई। दूसरी ओर दिन भर बादलों का डेरा और बारिश से ठंड में बढ़ोतरी हुई। पांच दिनों से तेज धूप से जहां तापमान में बढ़ोतरी हुई थी लेकिन शुक्रवार को हुई बारिश से तापमान में गिरावट नजर आई।
कृषि अर्थव्यवस्था पर प्रभाव डालेगी बारिश
उद्यान वैज्ञानिक डॉ. अनिल चंद्रा ने कहा कि मैदानी जिलों में गन्ने की फसल में शुगर रिकवरी में सुधार होगा और वजन में बढ़ोतरी होगी। ऊधमसिंह नगर में ग्रीष्मकालीन धान के विकल्प के रूप में प्रमोट किए जा रहे मक्का के लिए यह बारिश प्री-सोइंग रिचार्ज साबित होगी। इससे किसानों का बुवाई पूर्व सिंचाई का खर्च बचेगा और बीज का अंकुरण बेहतर होगा। उन्होंने किसानों को चेतावनी दी है कि बारिश के साथ ओलावृष्टि की संभावना भी बनी हुई है जो सरसों जैसी फूल वाली फसलों को नुकसान पहुंचा सकती है। किसानों को सलाह दी गई है कि वे खेतों में जल निकासी सुनिश्चित करें। ओलावृष्टि के बाद कीटों के हमले की निगरानी करें। आज की नमी का लाभ उठाते हुए नई फसलों (मक्का, गन्ना) की बुआई की तैयारी शुरू करें। आज की बारिश उत्तराखंड की कृषि अर्थव्यवस्था के लिए निर्णायक मोड़ है।
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बारिश से मिली प्राकृतिक नाइट्रोजन और नमी
डॉ. चंद्रा ने बताया कि राज्य के मैदानी क्षेत्रों में वर्षा और उच्च हिमालयी क्षेत्रों में हुई बर्फबारी ने न केवल रबी फसलों को पुनर्जीवित किया है, बल्कि भविष्य की नकदी फसलों के लिए भी अमृत का काम किया है। सिंचाई के अभाव में दम तोड़ रही गेहूं की फसल को इस बारिश से प्राकृतिक नाइट्रोजन और नमी मिली है, जिससे पौधों में कल्ले फूटने में मदद मिलेगी। वहीं, पहाड़ों में सब्जी मटर की फलियों में दानों का भराव अब बेहतर होगा जिससे पैदावार में 20 प्रतिशत तक सुधार की उम्मीद है।

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