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Uttarkashi News: अफसरों की सुस्ती बनी है जनता की मजबूरी
संवाद न्यूज एजेंसी, उत्तर काशी
Updated Wed, 21 Jan 2026 05:28 PM IST
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आपदा में बही पुलिया का तीन साल बाद भी नहीं हुआ निर्माण
16 गांवों से ज्यादा का कटा है संपर्क
पुरोला। नगर पालिका क्षेत्र और रामा कमल सिरांई क्षेत्र के डेढ़ दर्जन से अधिक गांवों की आवाजाही का मुख्य मार्ग मालगाड़ नदी पर बनी आरसीसी पुलिया के आपदा में बहने के तीन साल बाद भी इसका पुनर्निर्माण नहीं हो सका है। पुलिया से रोजमर्रा की आवाजाही नहीं बल्कि दो दर्जन से अधिक गांवों के श्मशान घाट तक दाह संस्कार के लिए जाने का भी एकमात्र प्रमुख मार्ग है।
वर्ष 2022-23 की आपदा में यह आरसीसी पुलिया बह गई थी जिसके बाद से क्षेत्र के ग्रामीणों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। लेकिन विभागीय स्तर पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। क्षेत्र के ग्रामीण बलदेव रावत, स्यालिक राम नौटियाल, हकूमत रावत, जगमोहन सिंह रावत ने बताया कि पुलिया जेयसाण थोक खलाड़ी के सरमाली, आराकोट, पुजेली, चपटाड़ी, करड़ा, दणमाणा और चालनी समेत कई गांवों के ग्रामीणों की मुख्य आवाजाही का मार्ग है।
पुलिया के क्षतिग्रस्त होने के कारण विशेषकर मौसम में श्मशान घाट तक दाह-संस्कार के लिए शव को लगभग दो किलोमीटर लंबे अतिरिक्त मार्ग से ले जाना पड़ता है। इससे लोगों को गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ता है। यह पुलिया और इससे जुड़ा पैदल मार्ग दर्जनों गांवों के लिए बाजार आनेजाने, दैनिक जरूरतों का सामान लाने और आपातकालीन परिस्थितियों में आवागमन का प्रमुख साधन है। इसलिए इसका जल्द ही निर्माण अत्यंत आवश्यक है।
ग्रामीणों ने शासन–प्रशासन से जल्द ही संज्ञान लेते हुए मालगाड़ नदी पर क्षतिग्रस्त आरसीसी पुलिया का पुनर्निर्माण कराने की मांग की है। इस मौके पर बिजेंद्र नेगी, अमीन रावत सिंह, जगमोहन सिंह, धीरपाल रावत, फकीर चंद, स्यालिक राम नौटियाल, मनोज रतूड़ी, सरदार सिंह रावत आदि मौजूद रहे।
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16 गांवों से ज्यादा का कटा है संपर्क
पुरोला। नगर पालिका क्षेत्र और रामा कमल सिरांई क्षेत्र के डेढ़ दर्जन से अधिक गांवों की आवाजाही का मुख्य मार्ग मालगाड़ नदी पर बनी आरसीसी पुलिया के आपदा में बहने के तीन साल बाद भी इसका पुनर्निर्माण नहीं हो सका है। पुलिया से रोजमर्रा की आवाजाही नहीं बल्कि दो दर्जन से अधिक गांवों के श्मशान घाट तक दाह संस्कार के लिए जाने का भी एकमात्र प्रमुख मार्ग है।
वर्ष 2022-23 की आपदा में यह आरसीसी पुलिया बह गई थी जिसके बाद से क्षेत्र के ग्रामीणों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। लेकिन विभागीय स्तर पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। क्षेत्र के ग्रामीण बलदेव रावत, स्यालिक राम नौटियाल, हकूमत रावत, जगमोहन सिंह रावत ने बताया कि पुलिया जेयसाण थोक खलाड़ी के सरमाली, आराकोट, पुजेली, चपटाड़ी, करड़ा, दणमाणा और चालनी समेत कई गांवों के ग्रामीणों की मुख्य आवाजाही का मार्ग है।
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पुलिया के क्षतिग्रस्त होने के कारण विशेषकर मौसम में श्मशान घाट तक दाह-संस्कार के लिए शव को लगभग दो किलोमीटर लंबे अतिरिक्त मार्ग से ले जाना पड़ता है। इससे लोगों को गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ता है। यह पुलिया और इससे जुड़ा पैदल मार्ग दर्जनों गांवों के लिए बाजार आनेजाने, दैनिक जरूरतों का सामान लाने और आपातकालीन परिस्थितियों में आवागमन का प्रमुख साधन है। इसलिए इसका जल्द ही निर्माण अत्यंत आवश्यक है।
ग्रामीणों ने शासन–प्रशासन से जल्द ही संज्ञान लेते हुए मालगाड़ नदी पर क्षतिग्रस्त आरसीसी पुलिया का पुनर्निर्माण कराने की मांग की है। इस मौके पर बिजेंद्र नेगी, अमीन रावत सिंह, जगमोहन सिंह, धीरपाल रावत, फकीर चंद, स्यालिक राम नौटियाल, मनोज रतूड़ी, सरदार सिंह रावत आदि मौजूद रहे।

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