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Uttarkashi News: दो चिकित्सकों के तबादले से पुरोला की स्वास्थ्य व्यवस्था चरमराई
Sat, 18 Jul 2026 05:40 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, उत्तर काशी
संवाद न्यूज एजेंसी, उत्तर काशी
Updated Sat, 18 Jul 2026 05:40 PM IST
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पहले से ही डॉक्टरों की कमी झेल रहे अस्पताल की बढ़ी दिक्कतें
पुरोला। उपजिला चिकित्सालय से दो अनुभवी चिकित्सकों डॉ. मनोज असवाल और डॉ. कपिल तोमर के एक साथ तबादले से रवांई घाटी की स्वास्थ्य व्यवस्था चरमरा गई है। यह अस्पताल पुरोला के साथ मोरी, नौगांव, त्यूणी, आराकोट-बंगाण और आसपास के दूरस्थ क्षेत्रों के हजारों लोगों के लिए प्रमुख सरकारी स्वास्थ्य केंद्र है। सबसे बड़ी समस्या यह है कि पहले से चिकित्सकों की कमी झेल रहे इस अस्पताल से एक साथ दो अनुभवी डॉक्टरों के जाने से मरीजों के इलाज और आपातकालीन सेवाओं पर सीधा असर पड़ने की आशंका है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि दोनों चिकित्सक कार्यमुक्त होते हैं तो गंभीर मरीजों, दुर्घटना पीड़ितों और प्रसव कराने आने वाली महिलाओं को समय पर इलाज नहीं मिल पाएगा। मजबूरन उन्हें देहरादून, विकासनगर या अन्य बड़े अस्पतालों का रुख करना पड़ेगा जिससे इलाज में देरी और आर्थिक बोझ दोनों बढ़ेंगे।
क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों और लोगों ने स्वास्थ्य मंत्री व स्वास्थ्य विभाग से तबादला निरस्त करने की मांग की थी, लेकिन विभाग ने दोनों चिकित्सकों को नई तैनाती पर कार्यभार ग्रहण करने के निर्देश जारी कर दिए हैं। इससे लोगों में नाराजगी और बढ़ गई है। क्षेत्रवासियों की मुख्य मांग है कि जनहित को देखते हुए दोनों चिकित्सकों का तबादला निरस्त किया जाए। यदि ऐसा संभव नहीं है तो उनके स्थान पर तत्काल पर्याप्त संख्या में अनुभवी चिकित्सकों की नियुक्ति की जाए।
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कांग्रेस ब्लॉक अध्यक्ष धीरेंद्र नेगी ने कहा कि प्रदेश सरकार एक ओर पहाड़ों में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर जनभावनाओं के विपरीत पर्वतीय क्षेत्रों में कार्यरत चिकित्सकों का स्थानांतरण कर क्षेत्र की जनता के साथ अन्याय किया जा रहा है।
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पुरोला। उपजिला चिकित्सालय से दो अनुभवी चिकित्सकों डॉ. मनोज असवाल और डॉ. कपिल तोमर के एक साथ तबादले से रवांई घाटी की स्वास्थ्य व्यवस्था चरमरा गई है। यह अस्पताल पुरोला के साथ मोरी, नौगांव, त्यूणी, आराकोट-बंगाण और आसपास के दूरस्थ क्षेत्रों के हजारों लोगों के लिए प्रमुख सरकारी स्वास्थ्य केंद्र है। सबसे बड़ी समस्या यह है कि पहले से चिकित्सकों की कमी झेल रहे इस अस्पताल से एक साथ दो अनुभवी डॉक्टरों के जाने से मरीजों के इलाज और आपातकालीन सेवाओं पर सीधा असर पड़ने की आशंका है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि दोनों चिकित्सक कार्यमुक्त होते हैं तो गंभीर मरीजों, दुर्घटना पीड़ितों और प्रसव कराने आने वाली महिलाओं को समय पर इलाज नहीं मिल पाएगा। मजबूरन उन्हें देहरादून, विकासनगर या अन्य बड़े अस्पतालों का रुख करना पड़ेगा जिससे इलाज में देरी और आर्थिक बोझ दोनों बढ़ेंगे।
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क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों और लोगों ने स्वास्थ्य मंत्री व स्वास्थ्य विभाग से तबादला निरस्त करने की मांग की थी, लेकिन विभाग ने दोनों चिकित्सकों को नई तैनाती पर कार्यभार ग्रहण करने के निर्देश जारी कर दिए हैं। इससे लोगों में नाराजगी और बढ़ गई है। क्षेत्रवासियों की मुख्य मांग है कि जनहित को देखते हुए दोनों चिकित्सकों का तबादला निरस्त किया जाए। यदि ऐसा संभव नहीं है तो उनके स्थान पर तत्काल पर्याप्त संख्या में अनुभवी चिकित्सकों की नियुक्ति की जाए।
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कांग्रेस ब्लॉक अध्यक्ष धीरेंद्र नेगी ने कहा कि प्रदेश सरकार एक ओर पहाड़ों में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर जनभावनाओं के विपरीत पर्वतीय क्षेत्रों में कार्यरत चिकित्सकों का स्थानांतरण कर क्षेत्र की जनता के साथ अन्याय किया जा रहा है।