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Uttarkashi News: आपदाओं के दोहरे खतरे में स्यानाचट्टी, अस्तित्व बचाने की चुनौती

Sun, 02 Aug 2026 07:05 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, उत्तर काशी
संवाद न्यूज एजेंसी, उत्तर काशी Updated Sun, 02 Aug 2026 07:05 PM IST
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Syanachatti Faces Dual Threat from Disasters; Struggle for Survival
- उफनती यमुना और दरकते पहाड़ों के बीच चारधाम यात्रा का प्रमुख पड़ाव संकट में
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- ग्रामीणों ने स्थायी सुरक्षा योजना की उठाई मांग
फोटो सहित...दिनेश रावत
बड़कोट। यमुनोत्री धाम यात्रा का प्रमुख पड़ाव स्यानाचट्टी प्राकृतिक आपदाओं के दोहरे संकट से जूझ रहा है। एक ओर उफनती यमुना नदी लगातार कटाव कर रही है, वहीं दूसरी ओर पहाड़ों से हो रहे भूस्खलन ने खतरा बढ़ा दिया है। जून 2025 से लगातार आपदाओं की मार झेल रहा यह कस्बा अब अपने अस्तित्व को बचाने की लड़ाई लड़ रहा है, जबकि स्थायी सुरक्षा उपाय अब भी अधूरे कार्यों और कागजों तक सीमित हैं।

पिछले वर्ष कुपड़ा खड्ड से आए भारी मलबे और बोल्डरों ने यमुना का प्रवाह रोककर अस्थायी झील जैसी स्थिति पैदा कर दी थी, जिससे क्षेत्र में भारी नुकसान हुआ था। वर्तमान में डडोटी खड्ड से लगातार आ रहा मलबा यमुना नदी के तल को ऊंचा कर रहा है। इससे नदी का जलस्तर बढ़ने लगा है और होटल व अन्य भवन खतरे की जद में आ गए हैं।
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वहीं, सड़क चौड़ीकरण के दौरान हुई अनियंत्रित कटिंग से पहाड़ अस्थिर हो गए हैं। लगातार हो रहे भूस्खलन से स्थानीय लोगों की सुरक्षा के साथ ही चारधाम यात्रा पर आने वाले हजारों श्रद्धालुओं की आवाजाही भी प्रभावित हो रही है।
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ग्रामीणों का कहना है कि यमुना और कुपड़ा खड्ड के चैनलाइजेशन का कार्य पिछले एक वर्ष से चल रहा है, लेकिन इसकी गति और प्रभाव संतोषजनक नहीं है। हर बारिश के साथ स्यानाचट्टी में खतरा बढ़ता जा रहा है।

आपदा प्रभावित जयपाल सिंह रावत, शैलेन्द्र राणा, दिनेश राणा, बलदेव सिंह, चित्रमोहन सिंह और विपिन ने आरोप लगाया कि शासन-प्रशासन ने स्यानाचट्टी की समस्या को गंभीरता से नहीं लिया, जिसके कारण आज पूरा क्षेत्र आपदा की चपेट में है। उन्होंने कहा कि चैनलाइजेशन कार्य केवल मलबा इधर-उधर करने तक सीमित रह गया है।


ग्रामीणों ने मांग की है कि स्यानाचट्टी को बचाने के लिए तात्कालिक राहत के बजाय ठोस और स्थायी सुरक्षा योजना तैयार की जाए, ताकि स्थानीय लोगों के साथ चारधाम यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
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