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Uttarkashi News: हर्षिल में सुरक्षा के नाम पर नदी के किनारों को भरा जा रहा मलबे से
Sat, 18 Jul 2026 05:44 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, उत्तर काशी
संवाद न्यूज एजेंसी, उत्तर काशी
Updated Sat, 18 Jul 2026 05:44 PM IST
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स्थानीय लोगों ने सुरक्षात्मक कार्यों पर उठाए सवाल
बोले, आवासीय बस्ती, सेब के बगीचाों की सुरक्षा में बरती जा रही है कोताई
उत्तरकाशी। हर्षिल में सिंचाई विभाग की ओर से किए जा रहे सुरक्षात्मक कार्यों पर स्थानीय लोगों ने सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि विभाग की ओर से सरकारी भवनों की सुरक्षा के लिए इंतजाम किए गए जबकि आवासीय बस्ती और सेब के बगीचों की सुरक्षा के लिए सुरक्षा कार्यों में कोताई बरती जा रही है। आवासीय बस्ती के समीप मलबा डालकर इतिश्री कर दिया जा रहा है। वह मलबा नदी के जलस्तर बढ़ने के साथ ही बह जा रहा है।
स्थानीय निवासी बसंती देवी, सुमित्रा देवी ने बताया कि सिंचाई विभाग की ओर से सरकारी भवनों की सुरक्षा के लिए वहां पर वायरक्रेट दीवार लगाकर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए लेकिन उसके साथ सटी हुई आवासीय बस्ती और सेब के बागीचों की सुरक्षा के लिए किसी प्रकार के कदम नहीं उठाए गए।
ऊपर बनी झील के नीचे मलबा अभी जमा है। साथ ही उस मलबे और बस्ती की ओर डाले जा रहे मलबे के बीच में नदी का पानी जमा हो रहा है। सुरक्षात्मक कार्यों के नाम पर वहां पर मलबे से भरान की जा रही है लेकिन नदी का जलस्तर बढ़ते ही वहां पर वह मलबा बह जा रहा है। इससे तीन से चार परिवारों के लिए अभी खतरा बना हुआ है।
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उन्होंने कहा कि सुरक्षा के नाम पर मलबा जमा किया जा रहा है। ऐसी स्थिति में बारिश होते ही गंगा और तेलगाड का जलस्तर बढ़ते ही दोबारा बड़ा खतरा बन जाएगा। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि हर्षिल की सुरक्षा के लिए पुख्ता इंतजाम किए जाए। आवासीय बस्ती और सेब की बागवानी की सुरक्षा को भी प्राथमिकता दी जाए। सिंचाई विभाग के ईई सचिन सिंघल का कहना है कि बस्ती की ओर भी सुरक्षात्मक कार्य किए जा रहे हैं। वहां पर भी ऊंचाई बढ़ाकर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाएंगे।
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बोले, आवासीय बस्ती, सेब के बगीचाों की सुरक्षा में बरती जा रही है कोताई
उत्तरकाशी। हर्षिल में सिंचाई विभाग की ओर से किए जा रहे सुरक्षात्मक कार्यों पर स्थानीय लोगों ने सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि विभाग की ओर से सरकारी भवनों की सुरक्षा के लिए इंतजाम किए गए जबकि आवासीय बस्ती और सेब के बगीचों की सुरक्षा के लिए सुरक्षा कार्यों में कोताई बरती जा रही है। आवासीय बस्ती के समीप मलबा डालकर इतिश्री कर दिया जा रहा है। वह मलबा नदी के जलस्तर बढ़ने के साथ ही बह जा रहा है।
स्थानीय निवासी बसंती देवी, सुमित्रा देवी ने बताया कि सिंचाई विभाग की ओर से सरकारी भवनों की सुरक्षा के लिए वहां पर वायरक्रेट दीवार लगाकर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए लेकिन उसके साथ सटी हुई आवासीय बस्ती और सेब के बागीचों की सुरक्षा के लिए किसी प्रकार के कदम नहीं उठाए गए।
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ऊपर बनी झील के नीचे मलबा अभी जमा है। साथ ही उस मलबे और बस्ती की ओर डाले जा रहे मलबे के बीच में नदी का पानी जमा हो रहा है। सुरक्षात्मक कार्यों के नाम पर वहां पर मलबे से भरान की जा रही है लेकिन नदी का जलस्तर बढ़ते ही वहां पर वह मलबा बह जा रहा है। इससे तीन से चार परिवारों के लिए अभी खतरा बना हुआ है।
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उन्होंने कहा कि सुरक्षा के नाम पर मलबा जमा किया जा रहा है। ऐसी स्थिति में बारिश होते ही गंगा और तेलगाड का जलस्तर बढ़ते ही दोबारा बड़ा खतरा बन जाएगा। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि हर्षिल की सुरक्षा के लिए पुख्ता इंतजाम किए जाए। आवासीय बस्ती और सेब की बागवानी की सुरक्षा को भी प्राथमिकता दी जाए। सिंचाई विभाग के ईई सचिन सिंघल का कहना है कि बस्ती की ओर भी सुरक्षात्मक कार्य किए जा रहे हैं। वहां पर भी ऊंचाई बढ़ाकर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाएंगे।