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Uttarkashi News: धराली आपदा को असर परीक्षा परिणाम पर भी दिखा
संवाद न्यूज एजेंसी, उत्तर काशी
Updated Sun, 26 Apr 2026 06:30 PM IST
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हाईस्कूल और इंटर में सात छात्र-छात्राओं ने दी परीक्षा, तीन ही हो पाए पास
उत्तरकाशी। बीते अगस्त में आई आपदा का असर राजकीय इंटर कॉलेज हर्षिल के परीक्षा परिणाम पर भी देखने को मिला। वहां पर हाईस्कूल और इंटरमीडिएट में कुल सात छात्र-छात्राओं ने परीक्षा दी। इसमें से तीन ही उत्तीर्ण हो पाए और बाकी चार छात्र-छात्राओं का परिणाम अच्छा नहीं रहा। दसवीं कक्षा में परीक्षा देने वाली दोनों छात्राएं और इंटरमीडिएट में एक छात्र आपदा प्रभावित धराली गांव के रहने वाले हैं।
राजकीय इंटर कॉलेज हर्षिल के परीक्षा प्रभारी सुमित गुसाईं ने बताया कि इन तीनों छात्र-छात्राओं के घर आपदा के दौरान आए मलबे में दब गए थे। उसका सीधा असर इन बच्चों की पढ़ाई पर भी देखने को मिला। इस कारण वह परीक्षा के लिए मानसिक रूप से तैयार नहीं हो पाए। एक छात्रा की स्थिति यह थी कि वह उत्तरकाशी से करीब 80 किमी की दूरी तय कर अपनी परीक्षा देने आती थी।
10वीं की दोनों छात्राएं और 12वीं में दो छात्र-छात्राएं अनुतीर्ण हुए। तीन छात्र-छात्राएं ही उत्तीर्ण हो पाए। दूसरी ओर हर्षिल घाटी के राजकीय हाईस्कूल झाला में छह छात्र-छात्राओं ने दसवीं की परीक्षा दी थी। उसमें से दो छात्र गणित विषय में फेल हो गए। विद्यालय के प्रधानाचार्य ओमेश गहतोड़ी ने बताया कि स्कूल में नवंबर में ही गणित के शिक्षक मिल पाए थे। उससे पूर्व डेढ़ वर्ष तक गणित के शिक्षक की तैनाती नहीं हुई थी। उसके बाद शीतकाल का अवकाश होने के कारण बच्चों को पूरी तरह तैयारी करने का समय नहीं मिला।
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राजकीय इंटर कॉलेज हर्षिल के परीक्षा प्रभारी सुमित गुसाईं ने बताया कि इन तीनों छात्र-छात्राओं के घर आपदा के दौरान आए मलबे में दब गए थे। उसका सीधा असर इन बच्चों की पढ़ाई पर भी देखने को मिला। इस कारण वह परीक्षा के लिए मानसिक रूप से तैयार नहीं हो पाए। एक छात्रा की स्थिति यह थी कि वह उत्तरकाशी से करीब 80 किमी की दूरी तय कर अपनी परीक्षा देने आती थी।
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10वीं की दोनों छात्राएं और 12वीं में दो छात्र-छात्राएं अनुतीर्ण हुए। तीन छात्र-छात्राएं ही उत्तीर्ण हो पाए। दूसरी ओर हर्षिल घाटी के राजकीय हाईस्कूल झाला में छह छात्र-छात्राओं ने दसवीं की परीक्षा दी थी। उसमें से दो छात्र गणित विषय में फेल हो गए। विद्यालय के प्रधानाचार्य ओमेश गहतोड़ी ने बताया कि स्कूल में नवंबर में ही गणित के शिक्षक मिल पाए थे। उससे पूर्व डेढ़ वर्ष तक गणित के शिक्षक की तैनाती नहीं हुई थी। उसके बाद शीतकाल का अवकाश होने के कारण बच्चों को पूरी तरह तैयारी करने का समय नहीं मिला।

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