{"_id":"69ee08ef23deb49d9f012757","slug":"villagers-object-to-road-blacktopping-work-uttarkashi-news-c-54-uki1003-119523-2026-04-26","type":"story","status":"publish","title_hn":"Uttarkashi News: ग्रामीणों ने सड़क डामरीकरण कार्य पर जताई आपत्ति","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Uttarkashi News: ग्रामीणों ने सड़क डामरीकरण कार्य पर जताई आपत्ति
संवाद न्यूज एजेंसी, उत्तर काशी
Updated Sun, 26 Apr 2026 06:15 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
पुरोला। मोरी-नैटवाड़, सांकरी-जखोल मोटर मार्ग पर चल रहे डामरीकरण कार्य को लेकर जखोल क्षेत्र के ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। ग्रामीणों ने जिलाधिकारी को ज्ञापन भेजकर वर्तमान कार्य को तत्काल रोकने की मांग की।
ग्रामीणों का कहना है कि करीब 42 किलोमीटर लंबे इस महत्वपूर्ण मार्ग पर मानकों के अनुरूप एफडीआर तकनीक से निर्माण किया जाना प्रस्तावित था लेकिन कई स्थानों पर साधारण डामरीकरण किया जा रहा है। उनका आरोप है कि यह कार्य गुणवत्ता मानकों की अनदेखी कर किया जा रहा है।
ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि यह मार्ग आपदा की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील क्षेत्र में आता है। ऐसे में मजबूत और टिकाऊ सड़क निर्माण के लिए एफडीआर तकनीक का उपयोग अनिवार्य है। ग्रामीणों ने बताया कि साधारण डामरीकरण अक्सर एक-दो वर्षों में ही उखड़ जाता है। इससे न केवल आम जनता को परेशानी होती है बल्कि सरकारी धन की भी बरबादी होती है।
स्थानीय निर्माण निगरानी समिति के अध्यक्ष जगदीश रांगड़ और उपाध्यक्ष किशन रावत सहित अन्य पदाधिकारियों ने मांग की है कि निर्माण कार्य शुरू करने से पहले समिति, जनप्रतिनिधियों और तकनीकी विशेषज्ञों के साथ बैठक आयोजित की जाए। संवाद
Trending Videos
ग्रामीणों का कहना है कि करीब 42 किलोमीटर लंबे इस महत्वपूर्ण मार्ग पर मानकों के अनुरूप एफडीआर तकनीक से निर्माण किया जाना प्रस्तावित था लेकिन कई स्थानों पर साधारण डामरीकरण किया जा रहा है। उनका आरोप है कि यह कार्य गुणवत्ता मानकों की अनदेखी कर किया जा रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन
ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि यह मार्ग आपदा की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील क्षेत्र में आता है। ऐसे में मजबूत और टिकाऊ सड़क निर्माण के लिए एफडीआर तकनीक का उपयोग अनिवार्य है। ग्रामीणों ने बताया कि साधारण डामरीकरण अक्सर एक-दो वर्षों में ही उखड़ जाता है। इससे न केवल आम जनता को परेशानी होती है बल्कि सरकारी धन की भी बरबादी होती है।
स्थानीय निर्माण निगरानी समिति के अध्यक्ष जगदीश रांगड़ और उपाध्यक्ष किशन रावत सहित अन्य पदाधिकारियों ने मांग की है कि निर्माण कार्य शुरू करने से पहले समिति, जनप्रतिनिधियों और तकनीकी विशेषज्ञों के साथ बैठक आयोजित की जाए। संवाद

कमेंट
कमेंट X