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Uttarkashi News: टमाटर के पौधों की सड़ रही जड़, पत्तियां पड़ने लगीं हैं ढीली
संवाद न्यूज एजेंसी, उत्तर काशी
Updated Tue, 26 May 2026 06:49 PM IST
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फसल पर मंडराने लगा बैक्टीरियल विल्ट रोग का खतरा
कृषि विज्ञान केंद्र की ओर से जारी की गई एडवाइजरी
चिन्यालीसौड़। जनपद में टमाटर के पौधे अचानक मुरझाने और सूखने लगे हैं जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई है। कई खेतों में पौधे हरे होने के बावजूद उनकी पत्तियां लटक रही है और वे धीरे-धीरे खराब हो रहे हैं। इसको लेकर कृषि विज्ञान केंद्र की ओर से एडवाइजरी जारी की गई है।
कृषि विज्ञान केंद्र चिन्यालीसौड़ के कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि यह समस्या मुख्य रूप से बैक्टीरियल विल्ट और जड़ सड़न के कारण हो रही है। विशेषज्ञों ने बताया कि एक ही खेत में बार-बार टमाटर, मिर्च और बैंगन जैसी फसलों की खेती करने से मिट्टी में रोग फैलाने वाले कीटाणु बढ़ जाते हैं जिससे फसल जल्दी खराब होने लगती है। कई स्थानों पर मेड़ों पर रोपाई करने के बावजूद पौधों का सूखना देखा जा रहा है।
कृषि वैज्ञानिक डॉ. राम लाल मीणा ने बताया कि यदि तने को काटने पर अंदर से भूरा रंग दिखाई दे या चिपचिपा पदार्थ निकले तो यह बैक्टीरियल विल्ट का संकेत है। उन्होंने कहा कि किसान प्रभावित पौधों को जड़ सहित उखाड़कर खेत से बाहर नष्ट करें। ताकि बीमारी आगे न फैले। साथ ही प्रति लीटर पानी में कॉपर ऑक्सीक्लोराइड और स्ट्रेप्टोसाइक्लिन मिलाकर ड्रेंचिंग करने की सलाह दी।
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जैविक उपचार के रूप में ट्राइकोडर्मा विरिडे को सड़ी हुई गोबर खाद में मिलाकर खेत में डालने को कहा है। उन्होंने खेत में हल्की सिंचाई करने और पानी का ठहराव रोकने पर भी जोर दिया। विशेषज्ञों ने किसानों को फसल चक्र अपनाने और एक ही फसल की लगातार खेती से बचने की सलाह दी है।
कृषि विज्ञान केंद्र की ओर से जारी की गई एडवाइजरी
चिन्यालीसौड़। जनपद में टमाटर के पौधे अचानक मुरझाने और सूखने लगे हैं जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई है। कई खेतों में पौधे हरे होने के बावजूद उनकी पत्तियां लटक रही है और वे धीरे-धीरे खराब हो रहे हैं। इसको लेकर कृषि विज्ञान केंद्र की ओर से एडवाइजरी जारी की गई है।
कृषि विज्ञान केंद्र चिन्यालीसौड़ के कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि यह समस्या मुख्य रूप से बैक्टीरियल विल्ट और जड़ सड़न के कारण हो रही है। विशेषज्ञों ने बताया कि एक ही खेत में बार-बार टमाटर, मिर्च और बैंगन जैसी फसलों की खेती करने से मिट्टी में रोग फैलाने वाले कीटाणु बढ़ जाते हैं जिससे फसल जल्दी खराब होने लगती है। कई स्थानों पर मेड़ों पर रोपाई करने के बावजूद पौधों का सूखना देखा जा रहा है।
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कृषि वैज्ञानिक डॉ. राम लाल मीणा ने बताया कि यदि तने को काटने पर अंदर से भूरा रंग दिखाई दे या चिपचिपा पदार्थ निकले तो यह बैक्टीरियल विल्ट का संकेत है। उन्होंने कहा कि किसान प्रभावित पौधों को जड़ सहित उखाड़कर खेत से बाहर नष्ट करें। ताकि बीमारी आगे न फैले। साथ ही प्रति लीटर पानी में कॉपर ऑक्सीक्लोराइड और स्ट्रेप्टोसाइक्लिन मिलाकर ड्रेंचिंग करने की सलाह दी।
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