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उत्तरकाशी: दयारा बुग्याल की हरियाली पर प्रहार, भू-धंसाव-भूस्खलन से बन रहीं खाइयां, दुर्लभ फूलों पर भी खतरा

Thu, 15 Oct 2026 08:33 AM IST
Renu Saklani विपिन नेगी, संवाद न्यूज एजेंसी, उत्तकाशी
विपिन नेगी, संवाद न्यूज एजेंसी, उत्तकाशी Published by: Renu Saklani Updated Thu, 15 Oct 2026 08:33 AM IST
सार

उत्तराखंड की प्राकृतिक धरोहर दयारा बुग्याल की खूबसूरती और जैव विविधता पर खतरा बढ़ रहा है। अनियोजित पर्यटन, मवेशियों के बढ़ते दबाव और भू-धंसाव से यहां के हरे-भरे मैदान प्रभावित हो रहे हैं। दुर्लभ फूलों और वनस्पतियों को बचाने के लिए संरक्षण के ठोस प्रयास जरूरी हैं।

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Uttarkashi dayara bugyal faces ecological threat as landslides and land subsidence damage alpine meadows
प्रसिद्ध दयारा बुग्याल - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

उत्तराखंड के प्रसिद्ध दयारा बुग्याल की खूबसूरती पर अब संकट के बादल मंडराने लगे हैं। अनियोजित पर्यटन और मवेशियों के बढ़ते दबाव से दुर्लभ फूलों व वनस्पतियों का अस्तित्व खतरे में है। वहीं भू-धंसाव और भूस्खलन से हरेभरे घास के मैदानों में खाइयां बन रही हैं। बुग्याल के निचले हिस्सों से बुग्याली घास का दायरा सिमटने लगा है। ऐसे में इस प्राकृतिक धरोहर को बचाने के लिए सरकारी मशीनरी और स्थानीय लोगों के साझा प्रयास जरूरी हो गए हैं।

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समुद्रतल से करीब 11 से 12 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित दयारा बुग्याल पर लोगों की लापरवाही व वन विभाग की अनदेखी भारी पड़ रही है। वहां पर पिछले कुछ वर्षों में बुग्याल क्षेत्र में भू-धंसाव व भूस्खलन के कारण घास के मैदान में खाइयां हो गई है। स्थानीय निवासी यजवेंद्र रावत का कहना है कि पर्यटन से हमारी आजीविका चलती है लेकिन अनियोजित पर्यटन के साथ ही वहां पर ग्रामीणों की ओर से मवेशियों के छोड़े जाने के कारण बुग्याल, फूल व वनस्पति विलुप्ति के कगार पर हैं।

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स्थिति इतनी दयनीय हो गई है कि अगर बुग्याल की घास का लुत्फ उठाना है तो दयारा बुग्याल के टॉप पर सूर्याटॉप व देवकुंड जाना होगा। बुग्याल के निचले इलाकों पर अब बुग्याली घास देखना मुश्किल है। अगर बुग्याल बचाना है तो सरकारी मशीनरी और स्थानीय लोगों को मिलकर कार्य करना होगा। रेंज अधिकारी शेखर राणा का कहना है कि दयारा बुग्याल के संरक्षण के लिए निरीक्षण सहित रिपोर्ट तैयार कर उच्च स्तर पर भेजी जा रही है। वहां से स्वीकृति मिलने पर बुग्याल व वनस्पतियों के संरक्षण के लिए कार्य किया जाएगा।

 

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