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बर्फबारी का स्वागत : कहीं रासो-तांदी की धूम, तो कहीं हर-हर महादेव की गूंज
संवाद न्यूज एजेंसी, उत्तर काशी
Updated Fri, 23 Jan 2026 06:01 PM IST
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खरसाली गांव में हर हर महादेव और डोल बाजाओं के साथ बर्फ का स्वागत करते तीर्थ पुरोहित व ग्रामीण।
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लंबे इंतजार के बाद गिरी बर्फ का ग्रामीणों ने किया अनोखे अंदाज में स्वागत
स्थानीय बोली में बर्फ को बोला जाता है ध्याण
उत्तरकाशी। लंबे समय से बर्फबारी का इंतजार कर रहे ग्रामीणों ने बर्फ का स्वागत विशेष अंदाज में किया। कहीं पर ढोल-दमाऊं सहित हर-हर महादेव की गूंज के साथ तो कहीं पर ग्रामीणों ने बर्फबारी के बीच रासो-तांदी का आयोजन कर बर्फबारी का जोरदार स्वागत किया। पहाड़ों में माघ के महीने में ससुराल गई बेटियां लोक बोली में ध्याणी अपने मायके कंडा-कल्यो लेने आती हैं। इसलिए आज भी स्थानीय लोग बर्फ को स्थानीय बोली में ध्याण कहकर बुलाते हैं।
जनपद सहित पूरे प्रदेश में लंबे समय से बर्फबारी और बारिश का इंतजार किया जा रहा था। शुक्रवार को जनपद के विभिन्न क्षेत्रों में हुई बर्फबारी के बाद लोेग अपनी खुशी नहीं रोक पाए। शहरों और निचले इलाकों से कई लोग वर्ष की पहली बर्फबारी का लुत्फ उठाने के लिए ऊंचाई वाले इलाकों की ओर रवाना हुए तो वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में बर्फ का मायके आने वाली बेटी की तरह स्वागत किया गया।
इसके तर्ज पर ही स्थानीय लोग बर्फ को भी माघ-पौष के माह पर आने के कारण स्थानीय बोली में ध्याण कहकर बुलाते हैं। मोरी के सूदूरवर्ती गांव पवाणी में बर्फबारी शुरू होते ही बुजुर्ग, महिला-पुरुष और बच्चे देवचौक में एकत्रित हुए। वहां पर उनकी ओर से हाथों में डांगरी लेकर रासो-तांदी नृत्य का आयोजन किया गया। इस दौरान महिलाओं और बच्चों को उत्साह अधिक देखने को मिला।
दूसरी ओर, यमुना के शीतकालीन प्रवास खरसाली में ग्रामीणों और तीर्थ पुरोहितों ने वसंत पंचमी की पूजा और ढोल-दमाऊं के साथ हर-हर महादेव की गूंज के साथ बर्फबारी का स्वागत किया। तीर्थ पुरोहित प्रदीप उनियाल ने कहा कि वसंत पंचमी पर प्रकृति ने हमें बड़ा उपहार दिया है।
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स्थानीय बोली में बर्फ को बोला जाता है ध्याण
उत्तरकाशी। लंबे समय से बर्फबारी का इंतजार कर रहे ग्रामीणों ने बर्फ का स्वागत विशेष अंदाज में किया। कहीं पर ढोल-दमाऊं सहित हर-हर महादेव की गूंज के साथ तो कहीं पर ग्रामीणों ने बर्फबारी के बीच रासो-तांदी का आयोजन कर बर्फबारी का जोरदार स्वागत किया। पहाड़ों में माघ के महीने में ससुराल गई बेटियां लोक बोली में ध्याणी अपने मायके कंडा-कल्यो लेने आती हैं। इसलिए आज भी स्थानीय लोग बर्फ को स्थानीय बोली में ध्याण कहकर बुलाते हैं।
जनपद सहित पूरे प्रदेश में लंबे समय से बर्फबारी और बारिश का इंतजार किया जा रहा था। शुक्रवार को जनपद के विभिन्न क्षेत्रों में हुई बर्फबारी के बाद लोेग अपनी खुशी नहीं रोक पाए। शहरों और निचले इलाकों से कई लोग वर्ष की पहली बर्फबारी का लुत्फ उठाने के लिए ऊंचाई वाले इलाकों की ओर रवाना हुए तो वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में बर्फ का मायके आने वाली बेटी की तरह स्वागत किया गया।
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इसके तर्ज पर ही स्थानीय लोग बर्फ को भी माघ-पौष के माह पर आने के कारण स्थानीय बोली में ध्याण कहकर बुलाते हैं। मोरी के सूदूरवर्ती गांव पवाणी में बर्फबारी शुरू होते ही बुजुर्ग, महिला-पुरुष और बच्चे देवचौक में एकत्रित हुए। वहां पर उनकी ओर से हाथों में डांगरी लेकर रासो-तांदी नृत्य का आयोजन किया गया। इस दौरान महिलाओं और बच्चों को उत्साह अधिक देखने को मिला।
दूसरी ओर, यमुना के शीतकालीन प्रवास खरसाली में ग्रामीणों और तीर्थ पुरोहितों ने वसंत पंचमी की पूजा और ढोल-दमाऊं के साथ हर-हर महादेव की गूंज के साथ बर्फबारी का स्वागत किया। तीर्थ पुरोहित प्रदीप उनियाल ने कहा कि वसंत पंचमी पर प्रकृति ने हमें बड़ा उपहार दिया है।

खरसाली गांव में हर हर महादेव और डोल बाजाओं के साथ बर्फ का स्वागत करते तीर्थ पुरोहित व ग्रामीण।

खरसाली गांव में हर हर महादेव और डोल बाजाओं के साथ बर्फ का स्वागत करते तीर्थ पुरोहित व ग्रामीण।

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