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Uttarkashi News: महिलाएं फल, फूल और सब्जियों से बना रहीं हैं रंग
संवाद न्यूज एजेंसी, उत्तर काशी
Updated Wed, 25 Feb 2026 06:52 PM IST
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विकास भवन और कलेक्ट्रेट परिसर में किया जाएगा बाजार उपलब्ध
उत्तरकाशी। भटवाड़ी विकासखंड की महिला स्वयं सहायता समूह की ओर से प्राकृतिक और हर्बल रंगों का निर्माण किया जा रहा है। इनको तैयार कर जनपद मुख्यालय सहित भटवाड़ी बाजार और विकास भवन और कलेक्ट्रेट परिसर में इनको बाजार उपलब्ध करवाया जाएगा। इससे महिलाओं को स्वरोजगार का नया आयाम मिलेगा। इसके साथ ही रसायन रंगों से दूर रहने का संदेश भी दिया जा रहा है।
भटवाड़ी विकासखंड मुख्यालय की महिलाओं को राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन की ओर से प्राकृतिक रंगों को बनाने का प्रशिक्षण दिया गया। इसके बाद अब महिलाओं ने विकासखंड कार्यालय में इन रंगों का निर्माण शुरू किया गया है। वहां पर भटवाड़ी और आसपास के गांव की महिला स्वयं सहायता समूह की साठ महिलाओं की ओर से इन रंगों का निर्माण किया जा रहा है।
महिलाओं की ओर से पालक से हरा रंग, हल्दी से पीला रंग, चुकंदर से गुलाबी और लाल, गेंदा फूल से केसरिया रंग बनाया जा रहा है। इन रंगों को बनाकर संदेश दिया जा रहा है कि रसायन रंगों का प्रयोग न किया जाए। महिलाओं की ओर से तैयार किए रंग को जनपद सहित विकासखंड मुख्यालय और अन्य बाजारों में भी बाजार उपलब्ध करवाया जाएगा। मुख्य विकास अधिकारी जयभारत सिंह ने कहा कि आगामी होली पर्व पर इन रंगों के विक्रय से महिलाओं की आजीविका भी सशक्त होगी। उन्होंने जनपदवासियों से अपील की है कि स्वदेशी और प्राकृतिक रंगों का उपयोग करें।
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उत्तरकाशी। भटवाड़ी विकासखंड की महिला स्वयं सहायता समूह की ओर से प्राकृतिक और हर्बल रंगों का निर्माण किया जा रहा है। इनको तैयार कर जनपद मुख्यालय सहित भटवाड़ी बाजार और विकास भवन और कलेक्ट्रेट परिसर में इनको बाजार उपलब्ध करवाया जाएगा। इससे महिलाओं को स्वरोजगार का नया आयाम मिलेगा। इसके साथ ही रसायन रंगों से दूर रहने का संदेश भी दिया जा रहा है।
भटवाड़ी विकासखंड मुख्यालय की महिलाओं को राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन की ओर से प्राकृतिक रंगों को बनाने का प्रशिक्षण दिया गया। इसके बाद अब महिलाओं ने विकासखंड कार्यालय में इन रंगों का निर्माण शुरू किया गया है। वहां पर भटवाड़ी और आसपास के गांव की महिला स्वयं सहायता समूह की साठ महिलाओं की ओर से इन रंगों का निर्माण किया जा रहा है।
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महिलाओं की ओर से पालक से हरा रंग, हल्दी से पीला रंग, चुकंदर से गुलाबी और लाल, गेंदा फूल से केसरिया रंग बनाया जा रहा है। इन रंगों को बनाकर संदेश दिया जा रहा है कि रसायन रंगों का प्रयोग न किया जाए। महिलाओं की ओर से तैयार किए रंग को जनपद सहित विकासखंड मुख्यालय और अन्य बाजारों में भी बाजार उपलब्ध करवाया जाएगा। मुख्य विकास अधिकारी जयभारत सिंह ने कहा कि आगामी होली पर्व पर इन रंगों के विक्रय से महिलाओं की आजीविका भी सशक्त होगी। उन्होंने जनपदवासियों से अपील की है कि स्वदेशी और प्राकृतिक रंगों का उपयोग करें।