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1965 युद्ध: अगर सीजफायर न होता तो आज भारत में होते लाहौर और सियालकोट

Tue, 19 Sep 2017 03:14 PM IST
amarujala.com- Presented by: चंद्रा पाण्डेय
amarujala.com- Presented by: चंद्रा पाण्डेय Updated Tue, 19 Sep 2017 03:14 PM IST
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STORY OF 1965 INDIA -PAKISTAN WAR
1965 - फोटो : File Photo

1965 की लड़ाई में भारतीय सेना के जवानों के हौसलों के आगे पाकिस्तान के सेना बौनी हो गयी थी। आलम ये था कि कश्मीर को हासिल करने का सपना देखने वाला पाकिस्तान खुद लाहौर और सियालकोट को खो देने की कगार पर आ गया था । 

STORY OF 1965 INDIA -PAKISTAN WAR

सेना के अदम्य साहस के बल पर भारत लाहौर तक कब्जा करने की स्थिति में पहुंच चुका था । भारत की सेना अटारी के रास्ते वाघा सीमा को पार करते पाकिस्तान के 18 किमी अंदर लाहौर तक पहुंच गयी थी । 

STORY OF 1965 INDIA -PAKISTAN WAR
1965
जैसे ही 1965 की लड़ाई शुरू हुई शिमला के डिगसेई से सेना की पलटन 9 जैकलाई को तुरंत अमृतसर पहुंचने के निर्देश जारी कर दिये गये । निर्देश मिलते ही 9 जैकलाई के सैनिक पूरे बंदोबस्त के साथ रातों रात शिमला से अमृतसर के रास्ते वाघा सीमा पर पहुंच गये । वहां पहुंचने पर सैनिको को निर्देश मिला कि पूरे दमखम के साथ पाक सेना पर हमला बोलते हुए आगे बढ़ें । 
 
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STORY OF 1965 INDIA -PAKISTAN WAR
1965
जैसे ही भारतीय सैनिकों को पाक पर हमले के निर्देश मिले तो जोश से लबरेज 9 जैकलाई पलटन के जवानों ने पाकिस्तान की ओर कूच कर दी । वहीं दूसरी ओर से पाकिस्तान के सैनिक अपने टैंको के साथ भारत की ओर बढ़ रहे थे ।
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STORY OF 1965 INDIA -PAKISTAN WAR
1965
इसी बीच 9 जैकलाई के जवानों को पता चला कि भारतीय सेना की एक टुकड़ी को पाकिस्तानी सैनिकों ने घेर लिया है, इस कारण एक बार कुछ देर के लिए भारतीय सैनिकों को मोर्चे से पीछे भी हटना पड़ा । 
 
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