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Assembly Elections 2026: Assembly elections in five states, including UP and Punjab, could be held this year.
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Assembly Elections 2026: इसी साल हो सकते हैं यूपी-पंजाब समेत पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव
वीडियो डेस्क अमर उजाला डॉट कॉम Published by: Bhaskar Tiwari Updated Sun, 14 Jun 2026 07:00 AM IST
देश के पांच महत्वपूर्ण राज्यों Uttar Pradesh, Uttarakhand, Punjab, Goa और Manipur—में विधानसभा चुनाव निर्धारित समय से पहले इसी वर्ष नवंबर-दिसंबर में कराए जाने की संभावना जताई जा रही है। राजनीतिक और प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार केंद्र सरकार इस विकल्प पर गंभीरता से विचार कर रही है ताकि अगले वर्ष फरवरी में प्रस्तावित जनगणना के दूसरे चरण के कार्य में किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न न हो। सामान्य परिस्थितियों में इन राज्यों में विधानसभा चुनाव अगले वर्ष फरवरी-मार्च के दौरान होने की संभावना थी, लेकिन जनगणना जैसे बड़े राष्ट्रीय कार्यक्रम को ध्यान में रखते हुए चुनाव कार्यक्रम में बदलाव किया जा सकता है।
जनगणना देश की सबसे बड़ी प्रशासनिक कवायदों में से एक होती है, जिसमें लाखों सरकारी कर्मचारी और अधिकारी शामिल होते हैं। चुनाव और जनगणना दोनों ही व्यापक मानव संसाधन, सुरक्षा व्यवस्था तथा प्रशासनिक तंत्र की मांग करते हैं। यदि दोनों प्रक्रियाएं एक ही समय के आसपास आयोजित होती हैं, तो प्रशासनिक संसाधनों पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। इसी कारण केंद्र सरकार और संबंधित एजेंसियां चुनाव कार्यक्रम को पहले आयोजित करने के विकल्प पर विचार कर रही हैं, ताकि जनगणना का दूसरा चरण सुचारु रूप से संपन्न हो सके।
राजनीतिक दृष्टि से भी इन पांच राज्यों के चुनाव अत्यंत महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। विशेष रूप से उत्तर प्रदेश, जो देश का सबसे अधिक आबादी वाला राज्य है, वहां का चुनाव राष्ट्रीय राजनीति की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। पंजाब, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर में भी विभिन्न राजनीतिक दल अपनी रणनीतियां तैयार कर रहे हैं और संभावित चुनावी मुकाबले को लेकर सक्रिय हो चुके हैं। यदि चुनाव वास्तव में नवंबर-दिसंबर में आयोजित किए जाते हैं, तो राजनीतिक दलों को अपनी तैयारियां निर्धारित समय से पहले पूरी करनी होंगी।
हालांकि अभी तक चुनाव कार्यक्रम को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। अंतिम निर्णय Election Commission of India द्वारा सभी प्रशासनिक, सुरक्षा और संवैधानिक पहलुओं की समीक्षा के बाद लिया जाएगा। लेकिन चुनावों को समय से पहले कराने की संभावना ने राजनीतिक हलकों में चर्चाओं को तेज कर दिया है। यदि यह प्रस्ताव लागू होता है, तो देश में चुनावी गतिविधियां इस वर्ष के अंतिम महीनों में ही तेज हो सकती हैं, जबकि अगले वर्ष की शुरुआत में प्रशासन का मुख्य ध्यान जनगणना के दूसरे चरण को सफलतापूर्वक पूरा कराने पर केंद्रित रहेगा।
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