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BMC Election 2026: Before the BMC elections, the Uddhav faction made this shocking claim about its victory!
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BMC Election 2026: BMC चुनाव से पहले उद्धव गुट ने अपनी जीत पर कर दिया ये चौंकाने वाला दावा !
वीडियो डेस्क, अमर उजाला डॉट कॉम Published by: भास्कर तिवारी Updated Mon, 12 Jan 2026 04:30 AM IST
शिवसेना(UBT) और MNS पार्टी द्वारा BMC चुनाव से पहले मिलकर रैली करने पर शिवसेना(UBT) नेता आनंद दुबे ने कहा, "हमें पूरा विश्वास है कि BMC के साथ 28 महानगरपालिकाओं के चुनाव में हमारी बहुत बड़ी विजय होगी। मुंबई और शिवसेना एक दूसरे के पूरक हैं...भाजपा डरी हुई है। 2029 के विधानसभा और लोकसभा चुनाव में भी हम इन्हें हराएंगे।"BMC चुनावों से पहले शिवसेना (UBT) और MNS पार्टी के एक रैली के लिए साथ आने पर, शिवसेना (UBT) के सांसद अरविंद सावंत ने कहा, "यह एक ऐतिहासिक क्षण है; दो भाई एक साथ आए हैं.यह 100% गेम चेंजर साबित होगा
महाराष्ट्र में चुनावी माहौल हमेशा की तरह गरमाया हुआ है, खासकर उद्धव ठाकरे (शिवसेना UBT) के गुट के लिए। चूंकि अभी जनवरी 2026 चल रहा है, राज्य में हाल ही में संपन्न हुए 2024 के विधानसभा चुनावों के परिणाम और अब 15 जनवरी 2026 को होने वाले निकाय चुनाव (जैसे BMC) चर्चा का मुख्य केंद्र हैं।
नवंबर 2024 के विधानसभा चुनावों में महाविकास अघाड़ी (MVA) को अपेक्षित सफलता नहीं मिली थी और महायुति (BJP, शिंदे गुट, अजित पवार) ने भारी बहुमत से जीत दर्ज की थी। इसके बाद उद्धव ठाकरे ने निम्नलिखित मुद्दों के आधार पर अपनी "नैतिक जीत" और भविष्य की तैयारी का दावा किया
मराठी अस्मिता और सहानुभूति: उन्होंने जनता के बीच यह संदेश फैलाया कि उनकी पार्टी को धोखे से तोड़ा गया है। हार के बावजूद, मुंबई और कोंकण के कुछ क्षेत्रों में उनका कट्टर शिवसैनिक आधार बना रहा।वर्तमान में (जनवरी 2026), उद्धव ठाकरे की पार्टी BMC और अन्य 29 स्थानीय निकायों के चुनावों पर पूरा जोर लगा रही है। यहाँ उनके मुख्य दावे और रणनीतियाँ हैं:
एक बड़े राजनीतिक उलटफेर में, उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे (MNS) करीब 20 साल बाद साथ आए हैं। उन्होंने "मराठी मानूस" और "मराठी गौरव" के मुद्दे पर हाथ मिलाया है ताकि मुंबई में बाहरी प्रभाव को कम किया जा सके।
चुनाव से ठीक पहले उद्धव ठाकरे ने एक बार फिर EVM की निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं और बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग की है। उनके अनुसार, अगर निष्पक्ष चुनाव होते हैं, तो जनता का समर्थन उनके साथ है।उद्धव गुट का दावा है कि मुंबई में हुए बड़े प्रोजेक्ट्स (जैसे कोस्टल रोड और अटल सेतु) की योजना और शुरुआत उनके कार्यकाल के दौरान हुई थी, जिसका श्रेय अब वर्तमान सरकार ले रही है।
इस बार स्थानीय निकाय चुनावों में उद्धव गुट ने कांग्रेस के बजाय राज ठाकरे के साथ जाना बेहतर समझा है, क्योंकि कांग्रेस का रुख उत्तर भारतीयों के प्रति नरम माना जाता है, जो उनकी मूल "मराठी अस्मिता" की राजनीति से मेल नहीं खाता।उन्होंने याद दिलाया कि 2024 के लोकसभा चुनाव में शिवसेना (UBT) ने शिंदे गुट से ज्यादा सीटें (9 सीटें) जीती थीं, जो साबित करता है कि जनता उन्हें ही असली शिवसेना मानती है।
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