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Maharashtra BMC Election: There was a conspiracy to implicate Fadnavis and Eknath Shinde in the ULC scam.
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Maharashtra BMC Election: ULC घोटाले में फडणवीस-एकनाथ शिंदे को फंसाने की थी साजिश
अमर उजाला डिजिटल डॉट कॉम Published by: आदर्श Updated Sat, 10 Jan 2026 09:55 PM IST
निकाय चुनाव से ठीक पहले महाराष्ट्र की राजनीति में ऐसा कौन-सा धमाका हुआ है, जिसने सत्ता के गलियारों से लेकर पुलिस मुख्यालय तक हड़कंप मचा दिया?
रिटायरमेंट से कुछ दिन पहले पूर्व डीजीपी ने ऐसी कौन-सी गोपनीय रिपोर्ट सौंपी, जिसने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को लेकर सनसनीखेज आरोप खड़े कर दिए? क्या वाकई 160 करोड़ के ULC घोटाले में दो बड़े नेताओं को झूठे मामलों में फंसाने की साजिश रची गई थी? और अगर ऐसा था तो सवाल ये है साजिश किसने रची, क्यों रची और किसके इशारे पर पुलिस मशीनरी को हथियार बनाया गया? क्या यह सिर्फ एक रिपोर्ट है या महाराष्ट्र की राजनीति और सिस्टम के भीतर चल रही गहरी लड़ाई का सबूत?
महाराष्ट्र में निकाय चुनाव से ठीक पहले राजनीति और पुलिस महकमे में बड़ा विस्फोट हुआ है। पूर्व पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) रश्मि शुक्ला की एक गोपनीय रिपोर्ट सामने आने के बाद राज्य की सियासत में हलचल तेज हो गई है। यह रिपोर्ट उन्होंने रिटायरमेंट से कुछ दिन पहले तैयार कर गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव को सौंपी थी। रिपोर्ट में सनसनीखेज दावा किया गया है कि साल 2021 में तत्कालीन पुलिस महानिदेशक संजय पांडे ने मौजूदा मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को एक बड़े भ्रष्टाचार मामले में झूठे आरोपों में फंसाने की साजिश रची थी।
रिपोर्ट के मुताबिक मामला 2021 के अर्बन लैंड सीलिंग (ULC) घोटाले से जुड़ा है, जिसमें करीब 160 करोड़ रुपये के कथित भ्रष्टाचार की बात कही गई थी। उस समय देवेंद्र फडणवीस विपक्ष के नेता थे और एकनाथ शिंदे शहरी विकास मंत्री के पद पर थे। पूर्व डीजीपी रश्मि शुक्ला की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि संजय पांडे ने जानबूझकर इस मामले को राजनीतिक हथियार के तौर पर इस्तेमाल करने की कोशिश की।
रिपोर्ट में कहा गया है कि संजय पांडे ने ठाणे पुलिस के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देश दिया था कि वे देवेंद्र फडणवीस और एकनाथ शिंदे को यूएलसी घोटाले में आरोपी के तौर पर नामजद करें। आरोप है कि इन नेताओं पर बिल्डरों से अवैध वसूली के झूठे आरोप लगाए जाने थे, ताकि उन्हें राजनीतिक रूप से कमजोर किया जा सके।
रिपोर्ट के अनुसार, तत्कालीन डीजीपी ने ठाणे के डीसीपी लक्ष्मीकांत पाटिल और एसीपी सरदार पाटिल को निर्देश दिए थे कि 2016 से जुड़े यूएलसी मामलों में फडणवीस और शिंदे को घसीटा जाए। यही नहीं, रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि उन्हें गिरफ्तार करने तक की योजना बनाई गई थी।
पूर्व डीजीपी रश्मि शुक्ला की रिपोर्ट में कोपरी पुलिस थाने में दर्ज केस CR No. 176/2021 का भी जिक्र है। इसमें आरोप लगाया गया है कि डीसीपी लक्ष्मीकांत पाटिल इस केस के आधिकारिक जांच अधिकारी नहीं थे, इसके बावजूद उन्होंने आरोपी पुनामिया और सुनील जैन से पूछताछ की। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि पूछताछ के दौरान पुनामिया पर दबाव बनाया गया कि वह यह स्वीकार करे कि देवेंद्र फडणवीस की ओर से बिल्डरों से वसूली की गई थी।
रिपोर्ट का दावा है कि यह पूरा घटनाक्रम कानून की प्रक्रिया के खिलाफ था और इसका मकसद केवल राजनीतिक लाभ लेना था। अगर ये आरोप सही साबित होते हैं तो यह न सिर्फ पुलिस की निष्पक्षता पर सवाल खड़े करता है, बल्कि सत्ता और जांच एजेंसियों के दुरुपयोग की गंभीर तस्वीर भी पेश करता है।
रश्मि शुक्ला की यह रिपोर्ट ऐसे समय सामने आई है जब महाराष्ट्र में निकाय चुनाव की तैयारी जोरों पर है। ऐसे में इस खुलासे को लेकर सियासी बयानबाजी तेज होना तय माना जा रहा है। विपक्ष इसे सत्ता पक्ष की अंदरूनी लड़ाई और पुलिस-राजनीति गठजोड़ का उदाहरण बता सकता है, वहीं सरकार समर्थक इसे साजिश और बदले की राजनीति करार दे सकते हैं।
फिलहाल गृह विभाग और सरकार की ओर से इस रिपोर्ट पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन इतना साफ है कि यह मामला आने वाले दिनों में महाराष्ट्र की राजनीति और पुलिस प्रशासन दोनों के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।
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