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Captain Amarinder Singh Upset with BJP: Will Captain Amarinder Singh Rejoin the Congress?
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Captain Amarinder Singh Upset with BJP: कैप्टन अमरिंदर सिंह फिर कांग्रेस में होंगे शामिल?
अमर उजाला डिजिटल डॉट कॉम Published by: Adarsh Jha Updated Tue, 02 Jun 2026 09:12 PM IST
पंजाब में लगातार आम आदमी पार्टी से जुड़े इस्तीफों की खबरों आ रही थी लेकिन अचानक पार्टी बदलने वाली लहर का रुख भाजपा की तरफ कैसे हो गया? क्या पंजाब की राजनीति में एक और बड़ा सियासी उलटफेर होने वाला है? क्या कभी गांधी परिवार पर गंभीर आरोप लगाने वाले कैप्टन अमरिंदर सिंह अब फिर से कांग्रेस के करीब आ रहे हैं? भाजपा में शामिल होने के बाद खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे कैप्टन के बदले हुए सुर कई सवाल खड़े कर रहे हैं। भाई के निधन पर राहुल गांधी का निजी शोक संदेश, कांग्रेस की कार्यशैली की खुलकर तारीफ और भाजपा नेताओं के बयानों से बढ़ती नाराजगी... इन सबके बीच पंजाब की राजनीति में नई चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया है। क्या कैप्टन की घर वापसी की पटकथा लिखी जा रही है, या फिर यह सिर्फ राजनीतिक संदेश देने की रणनीति है? पंजाब की सियासत में उठ रहे नए तूफान में सवालों का बवंडर भी खड़ा हो गया है। तो चलिए समझते है की आखिर पंजाब में आम आदमी पार्टी के ऊपर मंडरा रहे इस्तीफों के खतरों के बीच अचानक से लहर भाजपा की ओर कैसे मुड़ गया?
पंजाब की राजनीति में एक बार फिर पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह सुर्खियों में हैं। भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने के बाद से अपेक्षित राजनीतिक भूमिका नहीं मिलने और पार्टी के भीतर खुद को उपेक्षित महसूस करने की चर्चाओं के बीच कैप्टन के हालिया बयानों ने सियासी गलियारों में नई बहस छेड़ दी है। कांग्रेस नेतृत्व और विशेष रूप से राहुल गांधी के प्रति उनके बदले हुए तेवरों ने इस सवाल को जन्म दिया है कि क्या पंजाब की राजनीति में एक और बड़ा उलटफेर देखने को मिल सकता है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पिछले कुछ हफ्तों में हुई घटनाओं ने कैप्टन अमरिंदर सिंह और भाजपा के बीच बढ़ती दूरी को सार्वजनिक रूप से उजागर कर दिया है। वहीं कांग्रेस के प्रति उनके नरम रुख ने संभावित राजनीतिक भविष्य को लेकर कई तरह के कयासों को जन्म दिया है।
अब ऐसे में सवाल ये उठता है की आखिर किस बात पर उनकी बढ़ी नाराजगी?
27 मई को कैप्टन अमरिंदर सिंह के बड़े भाई राजा रणधीर सिंह का निधन हो गया था। इस दुखद घटना के बाद राजनीतिक दलों और नेताओं की प्रतिक्रियाओं पर भी नजर रखी गई। सूत्रों के अनुसार कैप्टन इस बात से आहत बताए जा रहे हैं कि भाजपा नेतृत्व की ओर से उन्हें वह संवेदनशीलता और समर्थन नहीं मिला जिसकी उन्हें अपेक्षा थी।
राजनीतिक सूत्रों का कहना है कि भाजपा के वरिष्ठ नेताओं की ओर से कोई विशेष प्रतिक्रिया या व्यक्तिगत संपर्क न होने से कैप्टन के मन में नाराजगी और गहरी हुई है। इसके विपरीत कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने व्यक्तिगत रूप से शोक संदेश भेजकर संवेदना व्यक्त की। इस कदम को केवल औपचारिक शिष्टाचार नहीं बल्कि एक महत्वपूर्ण राजनीतिक संकेत के रूप में भी देखा जा रहा है।
बताया जा रहा है कि राहुल गांधी ने इससे पहले भी कैप्टन अमरिंदर सिंह के जन्मदिन पर उन्हें शुभकामनाएं दी थीं। लगातार बने इस संवाद ने राजनीतिक हलकों में चर्चा को और तेज कर दिया है।
इनसब के बीच कांग्रेस नेताओं का भी रवैया बदला-बदला सा नजर आ रहा है।
पंजाब कांग्रेस के कई नेताओं का रवैया भी हाल के दिनों में कैप्टन के प्रति पहले की तुलना में अधिक सकारात्मक दिखाई दिया है। एक समय कांग्रेस छोड़ने वाले और पार्टी नेतृत्व की खुलकर आलोचना करने वाले कैप्टन के प्रति अब कई कांग्रेस नेता सार्वजनिक तौर पर संयमित भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं।
राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि कांग्रेस भी पंजाब में अपने राजनीतिक समीकरणों को मजबूत करने के लिए सभी संभावनाओं पर नजर बनाए हुए है। हालांकि किसी भी स्तर पर अभी तक वापसी को लेकर कोई आधिकारिक चर्चा सामने नहीं आई है, लेकिन दोनों पक्षों के बीच संवाद के संकेतों ने अटकलों को हवा जरूर दी है।
दरसल इस पूरे विवाद को बिट्टू के बयान ने बढ़ाया
कैप्टन और भाजपा के बीच दूरी की चर्चाओं को उस समय और बल मिला जब केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने एक बयान में कैप्टन अमरिंदर सिंह पर तीखा हमला बोला। बिट्टू ने उन्हें "बेड पर पड़ा बुजुर्ग" बताते हुए उनकी सक्रिय राजनीतिक भूमिका पर सवाल उठाए थे।
साथ ही उन्होंने पंजाब भाजपा अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों की खुलकर प्रशंसा की थी। राजनीतिक जानकारों के अनुसार इस बयान ने भाजपा के भीतर चल रही असहजता को सार्वजनिक रूप से सामने ला दिया। विपक्षी दलों ने भी इस बयान को मुद्दा बनाते हुए भाजपा पर अपने वरिष्ठ नेताओं का सम्मान न करने का आरोप लगाया।
विश्लेषकों का मानना है कि बिट्टू के बयान के बाद भाजपा और कैप्टन के रिश्तों में आई खटास की चर्चाएं और तेज हो गईं।
इस पूरे मामले की सुगबुगाहट कांग्रेस की तारीफ से शुरू हुई, उसके बाद सवालों और कायसों का दौर शुरू हो गया।
हाल ही में कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कांग्रेस की निर्णय प्रक्रिया की खुलकर सराहना की। उन्होंने कहा कि कांग्रेस में नेताओं और कार्यकर्ताओं की बात सुनी जाती है, जबकि भाजपा में फैसले ऊपर से नीचे तक थोपे जाते हैं।
उनका यह बयान राजनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। क्योंकि जिस कांग्रेस नेतृत्व पर कभी उन्होंने गंभीर आरोप लगाए थे, आज उसी पार्टी की कार्यप्रणाली की सार्वजनिक प्रशंसा करना उनके बदलते राजनीतिक रुख की ओर इशारा माना जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि अनुभवी नेता होने के नाते कैप्टन के बयान अक्सर सोची-समझी रणनीति का हिस्सा होते हैं। ऐसे में उनकी टिप्पणियों को केवल व्यक्तिगत प्रतिक्रिया मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
बदलते राजनीतिक हालात को समझने के लिए कुछ बिंदु आपको बताता हूं की 2021 से 2026 तक कैसे बदले राजनीतिक समीकरण
कैप्टन अमरिंदर सिंह को वर्ष 2021 में मुख्यमंत्री पद से हटाए जाने के बाद कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कांग्रेस छोड़ दी थी। उस समय उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व, विशेषकर राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए थे। सोनिया गांधी को भेजे अपने इस्तीफे में भी उन्होंने संगठन की कार्यप्रणाली को लेकर असंतोष जताया था।
इसके बाद उन्होंने अपनी अलग राजनीतिक पार्टी बनाई और बाद में भाजपा में शामिल हो गए। लेकिन भाजपा में शामिल होने के बाद उन्हें वह राजनीतिक भूमिका नहीं मिल सकी जिसकी उम्मीद की जा रही थी। इसी कारण समय-समय पर उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर चर्चाएं होती रही हैं।
अंत में सवाल ये है की अब आगे क्या?
फिलहाल न तो कांग्रेस और न ही कैप्टन अमरिंदर सिंह की ओर से किसी संभावित वापसी को लेकर कोई औपचारिक संकेत दिया गया है। भाजपा भी इस पूरे घटनाक्रम पर खुलकर प्रतिक्रिया देने से बच रही है। लेकिन राजनीतिक घटनाक्रमों की श्रृंखला ने इतना जरूर स्पष्ट कर दिया है कि पंजाब की राजनीति में कैप्टन अभी भी एक महत्वपूर्ण चेहरा बने हुए हैं।
राहुल गांधी के प्रति बढ़ती नरमी, कांग्रेस नेताओं का सकारात्मक रवैया और भाजपा से बढ़ती नाराजगी ने पंजाब की राजनीति में नए समीकरणों की संभावनाओं को जन्म दे दिया है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि आने वाले दिनों में कैप्टन अमरिंदर सिंह कौन सा राजनीतिक रास्ता चुनते हैं और उसका पंजाब की राजनीति पर क्या असर पड़ता है।
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