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Chandrima Bhattacharya Resigns: Ritabrata Banerjee's sensational revelation regarding Chandrima Bhattacharya's
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Chandrima Bhattacharya Resigns: चंद्रिमा भट्टाचार्य के इस्तीफे पर ऋतब्रत बनर्जी का धमाकेदार खुलासा!
वीडियो डेस्क अमर उजाला डॉट कॉम Published by: Bhaskar Tiwari Updated Sun, 05 Jul 2026 03:30 AM IST
तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में जारी अंदरूनी खींचतान के बीच पश्चिम बंगाल की राजनीति एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गई है। पार्टी के भीतर बढ़ते असंतोष के बीच पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और टीएमसी के बागी गुट के नेता रितब्रत बनर्जी ने पार्टी नेतृत्व पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने वरिष्ठ नेता चंद्रिमा भट्टाचार्य के पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा देने के मुद्दे को लेकर टीएमसी की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। रितब्रत बनर्जी ने आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस अब एक राजनीतिक दल की बजाय "प्राइवेट लिमिटेड कंपनी" की तरह संचालित हो रही है, जहां केवल कुछ चुनिंदा लोगों की ही बात सुनी जाती है, जबकि लंबे समय से पार्टी के लिए काम करने वाले नेताओं और कार्यकर्ताओं की अनदेखी की जा रही है। उनका कहना था कि पार्टी में अपमानित किया जाना अब सामान्य बात बन चुकी है और चंद्रिमा भट्टाचार्य के साथ जो कुछ हुआ, वह कोई नई या अलग घटना नहीं है। उन्होंने कहा कि पार्टी के भीतर ऐसे कई नेता हैं, जिन्हें समय-समय पर सम्मान और महत्व नहीं मिला।
रितब्रत बनर्जी ने चंद्रिमा भट्टाचार्य के राजनीतिक अनुभव और योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि वह कई बार विधायक चुनी गई हैं, मंत्री के रूप में भी अपनी जिम्मेदारियां निभा चुकी हैं और लंबे समय से पार्टी के प्रति पूरी निष्ठा के साथ काम करती रही हैं। ऐसे में उनकी वफादारी पर सवाल उठाना पूरी तरह अनुचित और दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि किसी भी वरिष्ठ नेता के साथ इस प्रकार का व्यवहार पार्टी के भीतर लोकतांत्रिक मूल्यों पर सवाल खड़े करता है। रितब्रत बनर्जी ने यह भी कहा कि चंद्रिमा भट्टाचार्य के बेटे उनके मित्र रहे हैं और वर्तमान में उनके साथ जुड़े हुए हैं, लेकिन इसका यह अर्थ बिल्कुल नहीं निकाला जाना चाहिए कि चंद्रिमा भट्टाचार्य की पार्टी के प्रति निष्ठा संदिग्ध है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी पारिवारिक या व्यक्तिगत संबंध के आधार पर किसी नेता की राजनीतिक प्रतिबद्धता पर सवाल उठाना उचित नहीं है। बनर्जी के अनुसार, पार्टी नेतृत्व को वरिष्ठ नेताओं के अनुभव और योगदान का सम्मान करना चाहिए तथा संगठन के भीतर संवाद और पारदर्शिता को बढ़ावा देना चाहिए। उनके इन बयानों ने तृणमूल कांग्रेस के भीतर जारी असंतोष और गुटबाजी की चर्चाओं को एक बार फिर तेज कर दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के सार्वजनिक बयान पार्टी के अंदरूनी मतभेदों को उजागर करते हैं और आने वाले समय में पश्चिम बंगाल की राजनीति पर इसका असर देखने को मिल सकता है।
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