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Delhi Air Pollution: Political turmoil over Delhi pollution, Minister Sirsa reveals Delhi government's complet
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Delhi Air Pollution:दिल्ली प्रदूषण पर सियासी घमासान, मंत्री सिरसा ने बताया दिल्ली सरकार का पूरा प्लान!
वीडियो डेस्क, अमर उजाला डॉट कॉम Published by: भास्कर तिवारी Updated Sat, 10 Jan 2026 02:30 AM IST
दिल्ली सरकार में मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा, "11 महीनों में हम किस प्रकार प्रदूषण से लड़ाई लड़ने में कामयाब हुए हैं हमने ये बताया। लंदन और बीजिंग ने अपना प्रदूषण ठीक किया था। मैं बताना चाहता हूं लंदन को लगभग 40-48 साल लगे और बीजिंग को 2013 से लेकर 2023 तक 10 साल लगे। ये तब हो पाया जब उन्होंने 350 से ज्यादा गांव उजाड़ दिए सारे उद्योग वहां से हटा दिए, सारी गाड़ियों को बंद कर दिया। दिल्ली एक खूबसूरत गुलदस्ता है। वहां झुग्गी में रहने वाला भी हमारा है और ऊंची बिल्डिंग में रहने वाला भी हमारा है इसलिए यहां क्रमबद्ध तरीके से ही प्रदूषण को रोका जा सकता है.हम दिल्ली के लोगों को आश्वस्त करते हैं कि प्रदूषण के खिलाफ लड़ाई जारी रहेगी.ये लड़ाई हम दिल्ली के लोगों को मिलकर और पड़ोसी राज्यों को मिलकर लड़ना होगा, चाहे वो नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद, फरीदाबाद, गुरुग्राम, पलवल या रोहतक हो। हम सबको मिलकर लड़ना होगा
हालिया समय में दिल्ली की सत्ता और प्रशासन के समीकरणों में बदलाव के बीच प्रदूषण पर नियंत्रण को लेकर खींचतान बढ़ी है। भाजपा नीत प्रशासन और विपक्षी आम आदमी पार्टी (AAP) के बीच इस बात को लेकर तीखी बहस हो रही है कि प्रदूषण के लिए जिम्मेदार कौन है। पर्यावरण मंत्री मंजिंदर सिंह सिरसा ने पिछले प्रशासनों (AAP और कांग्रेस) को इस संकट के लिए दोषी ठहराते हुए कहा है कि दशकों की समस्या को कुछ महीनों में ठीक करना संभव नहीं है।
जहाँ पहले AAP सरकार पंजाब में पराली जलने के लिए भाजपा शासित केंद्र को जिम्मेदार ठहराती थी, अब स्थिति बदल चुकी है। विपक्षी दलों का आरोप है कि पंजाब में AAP की सरकार होने के बावजूद पराली की घटनाओं पर प्रभावी रोक नहीं लग पाई है। वहीं, सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (CSE) की 2025 की रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली के प्रदूषण में लगभग 65% योगदान NCR के अन्य शहरों और बाहरी कारकों का है।
प्रदूषण से निपटने के उपायों पर भी राजनीति चरम पर है। कृत्रिम बारिश (Artificial Rain) के प्रयास को लेकर AAP ने इसे 'फर्जीवाड़ा' करार दिया, जबकि सरकार ने इसे तकनीकी चुनौतियों और बादलों की अनुपलब्धता से जोड़ा। इसके अलावा, सड़कों के 'बॉटलनेक' और ट्रैफिक जाम को भी प्रदूषण का एक बड़ा कारण माना जा रहा है, जिस पर काम की सुस्त रफ्तार को लेकर विपक्ष हमलावर है।
कांग्रेस ने दोनों बड़ी पार्टियों पर 'दोहरी राजनीति' करने का आरोप लगाया है। उनका तर्क है कि सड़कों की खराब हालत के कारण वाहनों की औसत गति 40 किमी/घंटा से घटकर 15-20 किमी/घंटा रह गई है, जिससे वाहनों से होने वाला उत्सर्जन कई गुना बढ़ गया है।
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