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Did Akash Anand call Akhilesh and Rahul Gandhi 'Uncle'? Akash Anand Sadabad rally | BSP | UP Election 2027
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आकाश आनंद ने अखिलेश और राहुल गांधी को कहा अंकल? Akash Anand Sadabad rally | BSP | UP Election 2027
अमर उजाला डिजिटल डॉट कॉम Published by: Adarsh Jha Updated Mon, 10 Aug 2026 09:16 PM IST
यूपी की सियासत में 2027 के चुनाव से पहले बयानबाजी का पारा चढ़ने लगा है और इस बार निशाने पर हैं अखिलेश यादव और राहुल गांधी। हाथरस के सादाबाद में बसपा के नेशनल कोऑर्डिनेटर आकाश आनंद ने ऐसा हमला बोला जिसने सियासी गलियारों में हलचल बढ़ा दी है। अखिलेश यादव को ‘अंकल’ कहकर PDA की राजनीति पर सवाल उठाया तो दूसरी तरफ राहुल गांधी के संविधान वाले दावों पर भी सीधा तंज कसा। लेकिन दिलचस्प बात ये है कि आकाश आनंद ने भाजपा सरकार को भी नहीं बख्शा। तो आखिर आकाश आनंद के निशाने पर एक साथ अखिलेश, राहुल और बीजेपी क्यों रहे? क्या बसपा 2027 के लिए अपनी अलग सियासी जमीन तैयार कर रही है? और क्या आकाश आनंद की इस आक्रामक राजनीति से यूपी की चुनावी तस्वीर बदलने वाली है? आकाश आनंद ने अखिलेश अंकल क्यों कहा? राहुल गांधी पर क्या तंज कसा? और इसके इतर उन्होंने भाजपा से क्या सवाल पूछे?
उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। इसी बीच बहुजन समाज पार्टी ने भी चुनावी तैयारियों का बिगुल बजा दिया है। बसपा के नेशनल कोऑर्डिनेटर आकाश आनंद ने हाथरस के सादाबाद में चुनावी अभियान की शुरुआत करते हुए पार्टी कार्यकर्ताओं में जोश भरने की कोशिश की। लेकिन मंच से उनका निशाना सिर्फ भाजपा पर नहीं रहा। आकाश आनंद ने समाजवादी पार्टी और कांग्रेस पर भी जमकर हमला बोला और अखिलेश यादव से लेकर राहुल गांधी तक पर तीखे राजनीतिक तंज कसे।
सादाबाद में आयोजित बसपा के विधानसभा स्तरीय कार्यकर्ता सम्मेलन को संबोधित करते हुए आकाश आनंद ने सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव को ‘अंकल’ कहकर संबोधित किया। उन्होंने अपनी उम्र का जिक्र करते हुए कहा कि वह 30 साल के हैं, जबकि अखिलेश यादव उनसे काफी बड़े हैं। आकाश ने तंज कसते हुए कहा कि करीब 50 साल के व्यक्ति को अगर अंकल नहीं कहेंगे तो क्या कहेंगे।
आकाश आनंद ने अखिलेश यादव के PDA यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक के नारे पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी राजनीतिक परिस्थितियों और समय के हिसाब से PDA की परिभाषा बदलती रहती है। इसके साथ ही उन्होंने अखिलेश यादव के मुख्यमंत्री रहते कानून व्यवस्था और दंगों को लेकर भी सवाल खड़े किए।
इसके बाद आकाश आनंद के निशाने पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी आए। उन्होंने राहुल गांधी की संविधान को लेकर की जा रही राजनीति पर हमला बोला। आकाश आनंद ने कहा कि राहुल गांधी एक किताब लेकर घूमते हैं और संविधान की बात करते हैं, लेकिन अगर उस किताब को पलटकर देखा जाए तो उसके पन्ने खाली नजर आएंगे।
आकाश आनंद ने आरोप लगाया कि सिर्फ संसद में संविधान की बात करने से काम नहीं चलेगा, बल्कि संविधान के सिद्धांतों को जमीन पर लागू करना होगा। उन्होंने कांग्रेस शासित राज्यों की नीतियों को लेकर भी सवाल उठाए और कहा कि जिन नीतियों के लिए विपक्ष भाजपा सरकारों पर हमला करता है, उन्हीं नीतियों को कांग्रेस शासित राज्यों में भी लागू किया जा रहा है।
हालांकि, आकाश आनंद ने भाजपा सरकार को भी निशाने पर लिया। उन्होंने प्रदेश की सरकार से उसके लंबे कार्यकाल का हिसाब मांगते हुए रोजगार, शिक्षा, महंगाई और पेपर लीक जैसे मुद्दे उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने अपने काम से ज्यादा विज्ञापन पर ध्यान दिया है और विज्ञापनों पर खर्च होने वाली रकम का इस्तेमाल युवाओं के लिए रोजगार और परीक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने में किया जाना चाहिए था।
आकाश आनंद ने सरकारी नौकरियों में खाली पदों और पेपर लीक का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि अगर परीक्षा व्यवस्था मजबूत होती और पेपर लीक पर प्रभावी रोक लगती तो युवाओं को इसका सीधा फायदा मिलता। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था को लेकर भी सरकार पर सवाल उठाए और स्कूलों के बंद होने का दावा करते हुए कहा कि इसका सबसे ज्यादा असर गरीब और वंचित वर्ग के बच्चों पर पड़ता है।
बसपा नेता ने महंगाई को लेकर भी भाजपा सरकार पर हमला किया। उन्होंने एथेनॉल और पेट्रोल की कीमतों का जिक्र करते हुए सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए। साथ ही एक्सप्रेस-वे निर्माण को लेकर भी उन्होंने मायावती सरकार के कार्यकाल को बेहतर बताते हुए भाजपा पर निशाना साधा।
रैली के दौरान आकाश आनंद ने सादाबाद विधानसभा सीट से बसपा के प्रत्याशी का भी ऐलान किया। उन्होंने डॉ. अविन शर्मा को पार्टी का उम्मीदवार घोषित किया। इससे पहले बसपा मऊ की मधुबन विधानसभा सीट से भी अपने प्रत्याशी की घोषणा कर चुकी है।
गौरतलब है कि आकाश आनंद लंबे समय बाद एक बड़े चुनावी मंच पर सक्रिय नजर आए हैं। 2024 में उनके एक बयान को लेकर विवाद हुआ था, जिसके बाद मायावती ने उन्हें कुछ समय के लिए पार्टी की जिम्मेदारियों से हटा दिया था। हालांकि बाद में उन्हें फिर से नेशनल कोऑर्डिनेटर की जिम्मेदारी दी गई।
अब 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले सादाबाद से चुनावी अभियान की शुरुआत कर आकाश आनंद ने साफ कर दिया है कि बसपा इस बार मुकाबले को लेकर अपनी रणनीति तैयार कर रही है। सवाल यही है कि अखिलेश और राहुल पर सीधा हमला और भाजपा पर रोजगार-महंगाई जैसे मुद्दों को लेकर दबाव बनाने की रणनीति बसपा को यूपी की चुनावी राजनीति में कितनी मजबूती देती है।
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