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वित्तीय इन्फ्लुएंसर्स पर शिकंजा: मेटा के बाद गूगल और SEBI के बीच चर्चा; प्ले स्टोर पर 'सत्यापित टिक' की तैयारी
सार
सेबी वित्तीय इन्फ्लुएंसर्स पर शिकंजा कसने की तैयारी में है। निवेश संबंधी विज्ञापन देने वालों की पहचान सुनिश्चित करने के लिए मेटा के बाद गूगल से भी सत्यापन को लेकर बातचीत चल रही है। प्ले स्टोर पर वित्तीय इन्फ्लुएंसर्स के लिए ‘सत्यापित टिक’ लगाने की योजना पर भी विचार हो रहा है।
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वित्तीय इन्फ्लुएंसर्स पर शिकंजा कसने की तैयारी
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
सोशल मीडिया के जरिए निवेश के नाम पर लोगों को गुमराह करने और ठगी रोकने के लिए सेबी ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। नियामक गूगल और मेटा के साथ मिलकर ऐसा तंत्र तैयार करने में जुटा है, जिससे निवेश संबंधी विज्ञापन देने वाले व्यक्ति या संस्था की पहचान और सेबी में उसका पंजीकरण सीधे जांचा जा सके। मेटा ने सेबी की इस खास सत्यापन व्यवस्था को लागू कर दिया है, जबकि गूगल के साथ इसे लागू करने को लेकर बातचीत चल रही है।
यह व्यवस्था गूगल की पहले से लागू सामान्य वित्तीय सेवा विज्ञापन नीति से अलग है। उसमें विज्ञापनदाता को संबंधित नियामक से मिले लाइसेंस या छूट का प्रमाण देना होता है। सेबी की नई व्यवस्था में उसके पंजीकृत वित्तीय मध्यस्थों की पहचान सेबी के अपने अभिलेख से सीधे जोड़ी जाएगी। इसके लिए उनके पहले से दर्ज मोबाइल नंबर और ईमेल का इस्तेमाल होगा।
मेटा के बाद गूगल की बारी
सेबी ने अप्रैल 2025 में इस संबंध में व्यवस्था तय की थी। इसके बाद मेटा ने भारत में प्रतिभूति और निवेश संबंधी विज्ञापन देने वालों के लिए सेबी से सत्यापन जरूरी कर दिया। अब गूगल के साथ भी इसी व्यवस्था को लागू करने के लिए बातचीत चल रही है। इससे अपंजीकृत लोगों के लिए निवेश सलाह या वित्तीय उत्पादों के नाम पर विज्ञापन चलाना मुश्किल होगा। विज्ञापन देने वाले की पहचान केवल उसके दावे के आधार पर नहीं, बल्कि सेबी के रिकॉर्ड से जांची जा सकेगी।
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प्ले स्टोर पर मिलेगा सत्यापित चिह्न
वित्तीय मामलों में भ्रामक सलाह देने वाले इन्फ्लुएंसर्स की बढ़ती संख्या को देखते हुए सत्यापित टिक या लेबल देने की योजना पर भी विचार किया जा रहा है। इससे आम निवेशक को सोशल मीडिया या अन्य डिजिटल मंचों पर यह पहचानने में मदद मिलेगी कि वित्तीय सलाह देने वाला व्यक्ति सेबी के नियामकीय दायरे में है या नहीं। केंद्रीय गृह मंत्रालय की संसदीय स्थायी समिति ने अपनी 259वीं रिपोर्ट में भी सेबी को सोशल मीडिया मंचों के साथ ऐसा तंत्र विकसित करने का सुझाव दिया है, जिससे केवल पंजीकृत और अधिकृत वित्तीय इन्फ्लुएंसर्स को निवेश संबंधी सलाह या प्रचार की अनुमति मिले। समिति ने सत्यापित चिह्न की संभावना तलाशने की भी सिफारिश की है।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता से होगी निगरानी
सेबी भ्रामक वित्तीय सामग्री की पहचान के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित निगरानी तंत्र भी मजबूत कर रहा है। गूगल, मेटा और अन्य मंचों के साथ मिलकर ऐसा तंत्र बनाने पर जोर है, जिससे संदिग्ध सामग्री और अपंजीकृत वित्तीय इन्फ्लुएंसर्स की पहचान तेजी से हो सके और जरूरत पड़ने पर उसे हटाया जा सके। सोशल मीडिया पर भारी और अवास्तविक रिटर्न का दावा करने वाले विज्ञापन निवेशकों को नुकसान पहुंचाते हैं। सेबी अब मंचों पर पहचान के सत्यापन और निगरानी को मजबूत कर इस पूरी कड़ी पर अंकुश लगाने की तैयारी में है।
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यह व्यवस्था गूगल की पहले से लागू सामान्य वित्तीय सेवा विज्ञापन नीति से अलग है। उसमें विज्ञापनदाता को संबंधित नियामक से मिले लाइसेंस या छूट का प्रमाण देना होता है। सेबी की नई व्यवस्था में उसके पंजीकृत वित्तीय मध्यस्थों की पहचान सेबी के अपने अभिलेख से सीधे जोड़ी जाएगी। इसके लिए उनके पहले से दर्ज मोबाइल नंबर और ईमेल का इस्तेमाल होगा।
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मेटा के बाद गूगल की बारी
सेबी ने अप्रैल 2025 में इस संबंध में व्यवस्था तय की थी। इसके बाद मेटा ने भारत में प्रतिभूति और निवेश संबंधी विज्ञापन देने वालों के लिए सेबी से सत्यापन जरूरी कर दिया। अब गूगल के साथ भी इसी व्यवस्था को लागू करने के लिए बातचीत चल रही है। इससे अपंजीकृत लोगों के लिए निवेश सलाह या वित्तीय उत्पादों के नाम पर विज्ञापन चलाना मुश्किल होगा। विज्ञापन देने वाले की पहचान केवल उसके दावे के आधार पर नहीं, बल्कि सेबी के रिकॉर्ड से जांची जा सकेगी।
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प्ले स्टोर पर मिलेगा सत्यापित चिह्न
वित्तीय मामलों में भ्रामक सलाह देने वाले इन्फ्लुएंसर्स की बढ़ती संख्या को देखते हुए सत्यापित टिक या लेबल देने की योजना पर भी विचार किया जा रहा है। इससे आम निवेशक को सोशल मीडिया या अन्य डिजिटल मंचों पर यह पहचानने में मदद मिलेगी कि वित्तीय सलाह देने वाला व्यक्ति सेबी के नियामकीय दायरे में है या नहीं। केंद्रीय गृह मंत्रालय की संसदीय स्थायी समिति ने अपनी 259वीं रिपोर्ट में भी सेबी को सोशल मीडिया मंचों के साथ ऐसा तंत्र विकसित करने का सुझाव दिया है, जिससे केवल पंजीकृत और अधिकृत वित्तीय इन्फ्लुएंसर्स को निवेश संबंधी सलाह या प्रचार की अनुमति मिले। समिति ने सत्यापित चिह्न की संभावना तलाशने की भी सिफारिश की है।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता से होगी निगरानी
सेबी भ्रामक वित्तीय सामग्री की पहचान के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित निगरानी तंत्र भी मजबूत कर रहा है। गूगल, मेटा और अन्य मंचों के साथ मिलकर ऐसा तंत्र बनाने पर जोर है, जिससे संदिग्ध सामग्री और अपंजीकृत वित्तीय इन्फ्लुएंसर्स की पहचान तेजी से हो सके और जरूरत पड़ने पर उसे हटाया जा सके। सोशल मीडिया पर भारी और अवास्तविक रिटर्न का दावा करने वाले विज्ञापन निवेशकों को नुकसान पहुंचाते हैं। सेबी अब मंचों पर पहचान के सत्यापन और निगरानी को मजबूत कर इस पूरी कड़ी पर अंकुश लगाने की तैयारी में है।