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Ganga Iftar Party Controversy: Owaisi got angry when action was taken on the Ganga Iftar Party controversy and
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Ganga Iftar Party Controversy: गंगा इफ्तार पार्टी विवाद पर हुई कार्रवाई तो भड़के ओवैसी, दागे तीखे सवाल!
वीडियो डेस्क अमर उजाला डॉट कॉम Published by: Bhaskar Tiwari Updated Sat, 21 Mar 2026 05:00 AM IST
एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी कहते हैं, "वाराणसी में 14 मुस्लिम युवकों ने नाव पर अपना रोजा खोला। उनके खिलाफ तुरंत मामला दर्ज किया गया.अगर कोई गंगा नदी में नाव पर खाना खा रहा है तो किसी की धार्मिक भावनाएं कैसे आहत हो रही हैं? किसकी धार्मिक भावनाएं आहत हो रही हैं? क्या गंगा नदी में सीवेज का ढेर आपको परेशान नहीं करता? वे जेल में हैं.उनका एकमात्र अपराध मुसलमान होना है.आपकी धार्मिक भावनाएं हैं। मेरा क्या? रमज़ान के महीने में शराब की दुकानें क्यों खुली थीं? उन्हें बंद होना चाहिए था। लेकिन वे खुली रहीं.क्या मेरी धार्मिक भावनाएं आहत नहीं होंगी?"
गंगा में इफ्तार को लेकर हुई प्रशासनिक कार्रवाई पर राजनीति गरमा गई है। असदुद्दीन ओवैसी ने इस मुद्दे पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए सवाल उठाया कि आखिर “किसके मजहबी आस्था को ठेस पहुंच रही है?” उनका कहना है कि अगर लोग शांतिपूर्वक इफ्तार कर रहे थे, तो उस पर कार्रवाई क्यों की गई। ओवैसी ने इसे धार्मिक स्वतंत्रता से जोड़ते हुए सरकार और प्रशासन के रवैये पर सवाल खड़े किए।
बताया जा रहा है कि गंगा नदी के किनारे कुछ लोगों द्वारा इफ्तार आयोजित किया गया था, जिस पर स्थानीय प्रशासन ने नियमों और व्यवस्था का हवाला देते हुए कार्रवाई की। प्रशासन का कहना है कि सार्वजनिक स्थलों पर बिना अनुमति इस तरह के आयोजन करने से व्यवस्था प्रभावित हो सकती है, इसलिए यह कदम उठाया गया।
ओवैसी ने अपने बयान में यह भी कहा कि देश में सभी धर्मों को समान अधिकार मिलना चाहिए और किसी एक समुदाय की धार्मिक गतिविधियों पर इस तरह की सख्ती उचित नहीं है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या इसी तरह के अन्य धार्मिक आयोजनों पर भी समान कार्रवाई की जाती है या नहीं।
इस मुद्दे पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगी हैं, जहां विभिन्न दल अपने-अपने नजरिए से इसे देख रहे हैं। कुछ नेताओं ने प्रशासन के कदम को नियमों के पालन के लिए जरूरी बताया, जबकि अन्य ने इसे धार्मिक भावनाओं से जुड़ा मुद्दा करार दिया।
कुल मिलाकर, यह मामला अब केवल एक स्थानीय कार्रवाई तक सीमित नहीं रहा, बल्कि धार्मिक स्वतंत्रता, कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक निष्पक्षता जैसे बड़े सवालों को भी सामने ला रहा है, जिस पर आगे भी राजनीतिक बहस जारी रहने की संभावना है।
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