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Naxal Free India: Why did Congress leader T.S. Singhdev get angry at Amit Shah's statement on Naxalism?
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Naxal Free India: नक्सलवाद पर अमित शाह के बयान पर आखिर क्यों भड़के कांग्रेस नेता टी.एस. सिंहदेव!
वीडियो डेस्क अमर उजाला डॉट कॉम Published by: Bhaskar Tiwari Updated Wed, 01 Apr 2026 02:45 AM IST
नक्सलवाद पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बयान पर कांग्रेस नेता टी.एस. सिंहदेव ने कहा, "इसे मैं दुर्भाग्यपूर्ण इसलिए मानता हूं क्योंकि देश के एक प्रमुख नेता को, देश को लेकर चलना चाहिए न कि अपनी पार्टी को। उनके जो बयान लगातार आ रहे हैं वे स्वयं श्रेय लेने के बयान हैं.ये देश के प्रमुख नेता के बोल नहीं हैं। एक व्यक्ति जो प्रचार कर रहा है, ये उनके बोल हैं। वो कह रहे हैं कि कांग्रेस ने ऐसा किया या कांग्रेस ने वैसा किया। लोगों की सोच को बदलने की दिशा में वे ऐसे बयान देते हैं... ये सोची-समझी रणनीति है। ये एक योजना है कि लोगों को तथ्यों को भुलवाया जाए.सच तो ये है कि दोनों पार्टी की सरकारों ने नक्सलवाद से संघर्ष किया। कभी ऐसा नहीं कहा गया कि केवल भाजपा या केवल कांग्रेस ने इससे संघर्ष किया.मनमोहन सिंह ने कहा कि देश की आंतरिक सुरक्षा को लेकर नक्सलवाद सबसे बड़ी चुनौती है। कांग्रेस का ध्यान इसी ओर केंद्रित था
हाल ही में नक्सलवाद जैसे गंभीर मुद्दे पर अमित शाह के बयान को लेकर राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली है। इस पर टी.एस. सिंहदेव ने कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताया। सिंहदेव का कहना है कि देश के केंद्रीय गृह मंत्री होने के नाते अमित शाह की जिम्मेदारी केवल अपनी पार्टी तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें पूरे देश को साथ लेकर चलने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद एक राष्ट्रीय समस्या है, जिसका समाधान राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर सामूहिक प्रयासों से ही संभव है। ऐसे में अगर इस मुद्दे पर दिए गए बयान में राजनीतिक झुकाव नजर आता है, तो यह समस्या के समाधान की दिशा में बाधा बन सकता है।
सिंहदेव ने अपने बयान में यह भी स्पष्ट किया कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास, संवाद और विश्वास बहाली बेहद जरूरी है। उनका मानना है कि केवल सुरक्षा बलों के माध्यम से नक्सलवाद का पूरी तरह समाधान संभव नहीं है, बल्कि इसके सामाजिक और आर्थिक पहलुओं पर भी गंभीरता से काम करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार को राज्यों के साथ मिलकर एक समन्वित रणनीति बनानी चाहिए, जिसमें स्थानीय लोगों की भागीदारी सुनिश्चित हो। इसके अलावा शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के अवसर बढ़ाकर ही इस समस्या की जड़ों को कमजोर किया जा सकता है।
दूसरी ओर, अमित शाह ने अपने बयान में नक्सलवाद के खिलाफ सरकार की सख्त नीति और उपलब्धियों का जिक्र किया था। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार इस समस्या को समाप्त करने के लिए प्रतिबद्ध है और पिछले कुछ वर्षों में इसमें उल्लेखनीय कमी आई है। हालांकि, विपक्ष का आरोप है कि इस तरह के बयानों में जमीनी हकीकत को नजरअंदाज किया जाता है और राजनीतिक लाभ को प्राथमिकता दी जाती है।
यह पूरा विवाद इस बात को दर्शाता है कि नक्सलवाद जैसे संवेदनशील मुद्दे पर राजनीतिक दलों के बीच मतभेद अभी भी बने हुए हैं। जहां एक ओर सरकार अपनी नीतियों को प्रभावी बता रही है, वहीं विपक्ष अधिक समावेशी और संतुलित दृष्टिकोण की मांग कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस समस्या का स्थायी समाधान तभी संभव है, जब सभी पक्ष मिलकर बिना राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के ठोस कदम उठाएं।
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