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NCP Merger: How will Sharad Pawar enter the NDA? The BJP has laid down this major condition! NCP-NDA Alliance.
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NCP Merger: NDA में शरद पवार की कैसे होगी एंट्री? BJP ने रखी ये बड़ी शर्त! NCP-NDA Alliance
अमर उजाला डिजिटल डॉट कॉम Published by: Adarsh Jha Updated Sat, 18 Jul 2026 11:58 AM IST
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तीन साल पहले एक सियासी परिवार दो हिस्सों में बंट गया था। चाचा और भतीजे की राहें अलग हो गईं पार्टी का नाम बदला, चुनाव चिह्न बदला और महाराष्ट्र की राजनीति का पूरा समीकरण बदल गया। लेकिन अब वही कहानी एक नए मोड़ पर खड़ी दिखाई दे रही है। सवाल उठ रहा है क्या शरद पवार और अजित पवार की राहें फिर मिल सकती हैं? क्या एनसीपी दोबारा एक होगी? और क्या इस पूरी कहानी की अगली मंजिल एनडीए है? देखिए ये खास रिपोर्ट।
महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर सियासी शतरंज बिछ चुकी है। मोहरे वही हैं लेकिन चालें नई दिखाई दे रही हैं।
सूत्रों के मुताबिक, अगर शरद पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी (शरदचंद्र पवार) यानी एनसीपी-एसपी को राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन यानी एनडीए का हिस्सा बनना है, तो उससे पहले एनसीपी के दोनों धड़ों का एक होना जरूरी होगा। बताया जा रहा है कि भाजपा का यही स्पष्ट रुख है।
यानी संदेश साफ है पहले परिवार एक हो फिर गठबंधन की बात होगी।
इस कहानी को समझने के लिए थोड़ा पीछे चलते हैं।
जुलाई 2023 जब अजित पवार अपने समर्थक नेताओं के साथ अलग हुए और भाजपा-शिवसेना सरकार में शामिल हो गए। इसके बाद चुनाव आयोग ने अजित पवार गुट को असली एनसीपी और चुनाव चिह्न दे दिया।
दूसरी तरफ, शरद पवार ने नई पहचान के साथ एनसीपी (एसपी) की कमान संभाली। तब से दोनों गुट अलग-अलग राजनीतिक रास्तों पर चलते रहे। लेकिन पिछले कुछ हफ्तों में लगातार ऐसी मुलाकातें हुईं, जिन्होंने फिर से दोनों धड़ों के एक होने की चर्चाओं को हवा दे दी।
भाजपा सूत्रों की मानें तो पार्टी फिलहाल शरद पवार या उनके नेताओं को अलग से एनडीए में शामिल करने के पक्ष में नहीं है। पार्टी चाहती है कि पहले एनसीपी के भीतर का विवाद खत्म हो और संगठन एकजुट हो। उसके बाद ही भविष्य के राजनीतिक समीकरणों पर फैसला लिया जाएगा।
उधर, अजित पवार की अगुवाई वाली एनसीपी की भी अपनी उम्मीदें हैं। पार्टी चाहती है कि केंद्र सरकार के संभावित मंत्रिमंडल विस्तार में उसे प्रतिनिधित्व मिले।
एनसीपी के प्रवक्ता उमेश पाटिल ने कहा कि पार्टी कार्यकर्ताओं की इच्छा है कि राज्यसभा सांसद पार्थ पवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल में जगह मिले। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अंतिम फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का होगा।
लेकिन सवाल है आखिर यह पूरी हलचल अभी क्यों?
इसकी एक बड़ी वजह संसद का आगामी मानसून सत्र भी माना जा रहा है। केंद्र सरकार संविधान संशोधन विधेयक लाने की तैयारी में है, जिसके जरिए लोकसभा की सीटें बढ़ाने और नए परिसीमन की प्रक्रिया शुरू करने का प्रस्ताव है।
लोकसभा में एनसीपी (एसपी) के आठ सांसद और राज्यसभा में एक सदस्य हैं। ऐसे में सरकार के लिए इस दल का समर्थन या कम से कम तटस्थ रुख भी अहम माना जा रहा है। यही वजह है कि महाराष्ट्र की राजनीति के घटनाक्रम को दिल्ली की नजर से भी देखा जा रहा है।
इसी बीच एनसीपी (एसपी) की कार्यकारी अध्यक्ष सुप्रिया सुले ने परिसीमन के मुद्दे पर संतुलित बयान दिया। उन्होंने कहा कि यदि सभी राज्यों में समान आधार पर सीटें बढ़ाई जाती हैं तो विरोध की कोई खास वजह नहीं होगी। लेकिन अंतिम फैसला इंडिया गठबंधन के साथ चर्चा के बाद ही लिया जाएगा।
साथ ही उन्होंने एक बार फिर उन अटकलों को खारिज कर दिया कि उनकी पार्टी एनडीए में शामिल होने जा रही है। उन्होंने हल्के अंदाज में कहा कि पिछले 12 वर्षों से मीडिया उन्हें हर कुछ महीनों में मंत्री बनाता रहा है, लेकिन ऐसा कभी हुआ नहीं।
इन चर्चाओं को सबसे ज्यादा हवा तब मिली, जब मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के सरकारी आवास पर दोनों एनसीपी गुटों के नेताओं की बैठक हुई।
हालांकि बाद में सफाई दी गई कि यह मुलाकात केवल कुछ प्रशासनिक और स्थानीय मुद्दों पर चर्चा के लिए थी।
एनसीपी (एसपी) के वरिष्ठ नेता जयंत पाटिल ने भी स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री से उनकी मुलाकात सांगली जिले से जुड़े एक स्थानीय मामले को लेकर थी। उन्होंने यह भी कहा कि बैठक में किसी राजनीतिक गठबंधन या विलय पर कोई चर्चा नहीं हुई।
इसके बाद जयंत पाटिल ने उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से भी मुलाकात की, लेकिन उसका कारण भी स्थानीय निकाय से जुड़ा प्रशासनिक मामला बताया गया।
उधर, पिछले सप्ताह शरद पवार द्वारा एकनाथ शिंदे के कार्यालय में विधायकों की बैठक किए जाने पर भी सवाल उठे। इस पर सुप्रिया सुले ने कहा कि बैठक का स्थान महज संयोग था और इसका कोई राजनीतिक अर्थ नहीं निकाला जाना चाहिए।
महाराष्ट्र की राजनीति में अक्सर जो दिखता है, वही पूरा सच नहीं होता और जो पर्दे के पीछे चलता है, वही आगे चलकर सत्ता का नया समीकरण बन जाता है।
फिलहाल शरद पवार का गुट एनडीए में जाने से इनकार कर रहा है भाजपा भी साफ कह रही है कि पहले एनसीपी एक हो, फिर बात होगी लेकिन लगातार हो रही मुलाकातें, बढ़ती राजनीतिक गतिविधियां और संसद से पहले बदलते संकेत यह जरूर बता रहे हैं कि महाराष्ट्र की सियासत में कहानी अभी खत्म नहीं हुई... बल्कि शायद एक नया अध्याय शुरू होने की तैयारी में है।
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