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Owaisi's Hijab PM Remark: 'One day a hijab-wearer will become India's PM', sparks political uproar over Owaisi
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Owaisi Hijab PM Remark: 'एक दिन हिजाब पहनने वाली बनेगी भारत की PM', ओवैसी के बयान पर सियासी बवाल
वीडियो डेस्क, अमर उजाला डॉट कॉम Published by: भास्कर तिवारी Updated Sun, 11 Jan 2026 01:26 AM IST
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एआईएमआईएम (AIMIM) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी का यह बयान कि "एक दिन हिजाब पहनने वाली लड़की भारत की प्रधानमंत्री बनेगी", भारतीय राजनीति में एक नई बहस और विवाद का केंद्र बन गया है। यह बयान न केवल वैचारिक ध्रुवीकरण को बढ़ा रहा है, बल्कि आगामी चुनावों के मद्देनजर इसे एक सोची-समझी राजनीतिक रणनीति के रूप में भी देखा जा रहा है।
ओवैसी का यह बयान मूल रूप से कर्नाटक के हिजाब विवाद के दौरान सामने आया था, जो समय-समय पर फिर से चर्चा में आ जाता है। उनके इस दावे के पीछे मुख्य तर्क और उससे जुड़ी प्रतिक्रियाएं इस प्रकार हैं:
ओवैसी का तर्क है कि भारत एक लोकतांत्रिक देश है और संविधान हर नागरिक को अपनी पसंद के कपड़े पहनने और सर्वोच्च पद तक पहुंचने का अधिकार देता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि कोई महिला अपनी पसंद से हिजाब पहनती है, तो यह उसकी योग्यता में बाधा नहीं होना चाहिए। उनका यह बयान मुस्लिम समुदाय, विशेषकर महिलाओं को राजनीतिक रूप से सशक्त बनाने और उन्हें मुख्यधारा से जोड़ने के आह्वान के रूप में पेश किया गया।
भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इस बयान पर कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे 'तुष्टिकरण की राजनीति' करार दिया। बीजेपी नेताओं का कहना है कि ओवैसी देश को धर्म के आधार पर बांटने की कोशिश कर रहे हैं। उनका तर्क है कि प्रधानमंत्री का पद योग्यता और संवैधानिक प्रक्रियाओं से तय होता है, न कि किसी विशिष्ट धार्मिक पहनावे या पहचान से। कुछ नेताओं ने इसे प्रतिगामी (backward) सोच बताते हुए कहा कि यह प्रगतिशील भारत की छवि के विपरीत है।
कांग्रेस और अन्य क्षेत्रीय दलों ने इस पर मिली-जुली प्रतिक्रिया दी है। जहां कुछ ने इसे ओवैसी की निजी राय बताकर किनारा कर लिया, वहीं कुछ का मानना है कि इस तरह के बयान असल मुद्दों जैसे बेरोजगारी और महंगाई से ध्यान भटकाने के लिए दिए जाते हैं।
इस बयान ने सोशल मीडिया से लेकर टीवी डिबेट्स तक एक बड़ी वैचारिक जंग छेड़ दी है। एक पक्ष इसे 'संवैधानिक स्वतंत्रता' और 'महिला सशक्तिकरण' के चश्मे से देख रहा है, जिसका मानना है कि हिजाब पहनना एक निजी चुनाव है। वहीं, दूसरा पक्ष इसे 'धार्मिक कट्टरता' और 'वोट बैंक की राजनीति' मान रहा है। जानकारों का कहना है कि ऐसे बयानों से चुनावी माहौल गरमाता है और मतदाताओं का स्पष्ट रूप से ध्रुवीकरण (Polarization) होता है।
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