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Petrol Diesel in India: Congress makes serious allegations against the government for reducing excise duty on
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Petrol Diesel in India: पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी घटाने पर, कांग्रेस ने सरकार पर लगाए गंभीर आरोप!
वीडियो डेस्क अमर उजाला डॉट कॉम Published by: Bhaskar Tiwari Updated Sun, 29 Mar 2026 03:45 AM IST
पेट्रोल और डीजल की कीमतों को लेकर देश में जारी बहस के बीच Mallikarjun Kharge ने केंद्र सरकार द्वारा एक्साइज ड्यूटी घटाने के फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि सरकार अब भले ही थोड़ी राहत देने की बात कर रही हो, लेकिन बीते वर्षों में जनता से पेट्रोल-डीजल पर भारी कर वसूलकर “लाखों-करोड़ों रुपये” पहले ही ले चुकी है। उनका आरोप है कि जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें कम थीं, तब सरकार ने टैक्स बढ़ाकर आम लोगों पर अतिरिक्त बोझ डाला और अब चुनावी माहौल में थोड़ी कटौती करके इसे बड़ी राहत के रूप में पेश किया जा रहा है।
Indian National Congress के राष्ट्रीय अध्यक्ष के तौर पर खरगे ने यह भी कहा कि पेट्रोल और डीजल केवल ईंधन नहीं हैं, बल्कि इनके दाम बढ़ने से परिवहन लागत बढ़ती है, जिसका असर सीधे तौर पर महंगाई पर पड़ता है। उनके अनुसार, जब ईंधन महंगा होता है तो खाद्य पदार्थों से लेकर रोजमर्रा की जरूरतों की कीमतें भी बढ़ जाती हैं, जिससे आम आदमी की जेब पर दोहरी मार पड़ती है। उन्होंने केंद्र सरकार पर यह आरोप लगाया कि उसने आम जनता के हितों की बजाय राजस्व बढ़ाने को प्राथमिकता दी और जनता को राहत देने में देरी की।
खरगे ने यह भी कहा कि सरकार द्वारा एक्साइज ड्यूटी में की गई कटौती वास्तव में बहुत सीमित है और इससे लोगों को उतनी राहत नहीं मिलेगी, जितनी होनी चाहिए। उनका मानना है कि अगर सरकार वास्तव में जनता को राहत देना चाहती है, तो उसे ईंधन पर लगाए गए टैक्स में व्यापक और स्थायी कमी करनी चाहिए। इसके अलावा उन्होंने राज्यों के हिस्से और केंद्र के कर ढांचे को भी पारदर्शी बनाने की जरूरत पर जोर दिया।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह बयान ऐसे समय में आया है जब महंगाई और बेरोजगारी जैसे मुद्दे पहले से ही चर्चा में हैं। विपक्ष सरकार को इन मुद्दों पर घेरने की कोशिश कर रहा है, जबकि सरकार अपने फैसलों को आर्थिक संतुलन और विकास की जरूरतों के अनुरूप बता रही है। कुल मिलाकर, पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी को लेकर विवाद आगे भी जारी रहने की संभावना है, और यह मुद्दा आने वाले चुनावों में एक अहम राजनीतिक विषय बन सकता है।
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