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Vande Mataram Row: SP and Congress MPs oppose the singing of the full 'Vande Mataram'; here is their argument!
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Vande Mataram Row: पूरा 'वंदे मातरम' गाए जाने के विरोध में उतरे सपा- कांग्रेस के सांसद, दी ये दलील!
वीडियो डेस्क अमर उजाला डॉट कॉम Published by: Bhaskar Tiwari Updated Tue, 11 Aug 2026 12:53 AM IST
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समाजवादी पार्टी के सांसद रामजी लाल सुमन ने स्वतंत्रता दिवस 2026 के अवसर पर लाल किले की प्राचीर से ‘वंदे मातरम’ के पूर्ण संस्करण के गायन को लेकर आपत्ति जताई है। उन्होंने इसे भारत के धर्मनिरपेक्ष चरित्र से जोड़ते हुए कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान देश के अलग-अलग धर्मों, वर्गों और विचारधाराओं के लोगों ने मिलकर आजादी की लड़ाई लड़ी थी। उनके अनुसार, उस दौर में राष्ट्रीय एकता और सभी समुदायों की भागीदारी को ध्यान में रखते हुए ऐसे निर्णय लिए गए, जिनसे देश के अधिक से अधिक लोग स्वयं को जोड़ सकें। रामजी लाल सुमन ने महात्मा गांधी के योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि गांधी ने विभिन्न विचारधाराओं और धर्मों से जुड़े लोगों को स्वतंत्रता आंदोलन के साथ जोड़ने का काम किया था। उन्होंने इसी संदर्भ में कहा कि ‘वंदे मातरम’ को लेकर संविधान सभा के समय भी व्यापक विचार-विमर्श हुआ था।
सुमन के मुताबिक, ‘वंदे मातरम’ के गायन को लेकर सरदार पटेल की अध्यक्षता में एक समिति बनाई गई थी और उसमें शुरुआती दो छंदों को गाने का निर्णय लिया गया था। उनका तर्क है कि स्वतंत्रता संग्राम में सभी धर्मों और समुदायों के लोगों की भागीदारी थी, इसलिए राष्ट्रीय गीत के ऐसे हिस्से को प्राथमिकता दी गई, जिसे देश के सभी वर्गों के लोग सहजता से स्वीकार कर सकें। उन्होंने कहा कि शुरुआती दो छंदों में किसी विशेष धार्मिक भावना से जुड़ी ऐसी बात नहीं है, जिससे किसी समुदाय को असहजता महसूस हो, और इसी कारण इन्हें राष्ट्रीय अवसरों पर गाने की परंपरा बनी।
रामजी लाल सुमन ने आरोप लगाया कि पूर्ण ‘वंदे मातरम’ को अनिवार्य या प्रमुख रूप से सामने लाने की कोशिश एक राजनीतिक एजेंडे का हिस्सा हो सकती है। उन्होंने कहा कि किसी भी राष्ट्रीय प्रतीक या गीत को लेकर निर्णय लेते समय देश की विविधता और धर्मनिरपेक्ष स्वरूप का ध्यान रखा जाना चाहिए। उनके अनुसार, भारत की पहचान उसकी बहुलता, विभिन्न धर्मों और संस्कृतियों के सह-अस्तित्व तथा लोकतांत्रिक मूल्यों से बनती है। उन्होंने सरकार और सत्तारूढ़ पक्ष की नीतियों पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि कुछ फैसलों के माध्यम से धीरे-धीरे एक विशेष विचारधारा को आगे बढ़ाने की कोशिश की जा रही है।
हालांकि, ‘वंदे मातरम’ को लेकर देश में अलग-अलग राजनीतिक और वैचारिक मत रहे हैं। समर्थकों का तर्क है कि यह गीत भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान रखता है और राष्ट्रवादी भावना का प्रतीक है। वहीं, आलोचक इसके कुछ हिस्सों को लेकर धार्मिक और संवैधानिक दृष्टिकोण से सवाल उठाते रहे हैं। इसलिए पूर्ण ‘वंदे मातरम’ के गायन का मुद्दा केवल एक गीत का विषय नहीं, बल्कि भारत के इतिहास, राष्ट्रवाद, धार्मिक विविधता और धर्मनिरपेक्षता से जुड़ी व्यापक राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गया है। रामजी लाल सुमन का बयान इसी बहस में समाजवादी पार्टी के दृष्टिकोण को सामने रखता है।
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