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West Bengal Assembly Election 2026: Owaisi-Humayun Kabir duo poses a big challenge for Mamata in Bengal!
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West Bengal Assembly Election 2026:बंगाल में ममता के लिए बड़ी चुनौती बनी ओवैसी-हुमायूं कबीर की जोड़ी!
वीडियो डेस्क अमर उजाला डॉट कॉम Published by: Bhaskar Tiwari Updated Mon, 23 Mar 2026 05:00 AM IST
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ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) का हुमायूं कबीर की पार्टी के साथ गठबंधन पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक अहम घटनाक्रम माना जा रहा है। हुमायूं कबीर, जो पहले भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस और बाद में तृणमूल कांग्रेस से जुड़े रहे, अब अपनी अलग राजनीतिक पहचान के साथ मैदान में सक्रिय हैं। उनकी पार्टी का AIMIM के साथ हाथ मिलाना विशेष रूप से राज्य के अल्पसंख्यक बहुल इलाकों में नई राजनीतिक समीकरण बनाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
AIMIM, जिसका नेतृत्व असदुद्दीन ओवैसी करते हैं, पहले भी कई राज्यों में अपने प्रभाव का विस्तार करने की रणनीति पर काम करती रही है। पश्चिम बंगाल में पार्टी ने पहले भी चुनाव लड़ने की कोशिश की थी, लेकिन उसे अपेक्षित सफलता नहीं मिली। ऐसे में हुमायूं कबीर की क्षेत्रीय पकड़ और स्थानीय नेटवर्क के साथ गठबंधन AIMIM के लिए एक रणनीतिक कदम माना जा रहा है। इस गठबंधन का मुख्य उद्देश्य उन मतदाताओं को साधना है जो पारंपरिक रूप से तृणमूल कांग्रेस या कांग्रेस के साथ रहे हैं, लेकिन अब विकल्प की तलाश में हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह गठबंधन राज्य की सियासत में खासकर मुस्लिम वोट बैंक को प्रभावित कर सकता है। हालांकि, आलोचकों का कहना है कि इससे विपक्षी वोटों का बंटवारा हो सकता है, जिसका सीधा लाभ भारतीय जनता पार्टी को मिल सकता है। वहीं, समर्थकों का तर्क है कि यह गठबंधन क्षेत्रीय मुद्दों को अधिक मजबूती से उठाने और स्थानीय नेतृत्व को आगे लाने का प्रयास है।
हुमायूं कबीर और AIMIM दोनों ने इस गठबंधन को “जनता की आवाज़ को मजबूत करने” वाला कदम बताया है। उनका कहना है कि वे बेरोजगारी, शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक न्याय जैसे मुद्दों पर मिलकर काम करेंगे। इसके साथ ही, वे राज्य में एक मजबूत तीसरा विकल्प बनने की दिशा में भी आगे बढ़ना चाहते हैं। आने वाले चुनावों में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह गठबंधन मतदाताओं के बीच कितना प्रभाव डाल पाता है और पश्चिम बंगाल की राजनीति में क्या नया मोड़ लाता है।
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