Hindi News
›
Video
›
India News
›
Will sugar become cheaper? The government has made a major change to its ethanol policy—find out the full mast
{"_id":"6ad52f3aefc9f805ed0b8c62","slug":"will-sugar-become-cheaper-the-government-has-made-a-major-change-to-its-ethanol-policy-find-out-the-full-mast-2026-10-19","type":"video","status":"publish","title_hn":"चीनी होगी सस्ती? एथनॉल पॉलिसी में सरकार ने किया बड़ा बदलाव जानें पूरा मास्टर प्लान!","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
चीनी होगी सस्ती? एथनॉल पॉलिसी में सरकार ने किया बड़ा बदलाव जानें पूरा मास्टर प्लान!
वीडियो डेस्क अमर उजाला डॉट कॉम
Published by: Bhaskar Tiwari
Updated Mon, 19 Oct 2026 02:45 AM IST
Link Copied
भारत सरकार ने चीनी की घरेलू उपलब्धता बनाए रखने और पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने के कार्यक्रम को जारी रखने के लिए एथेनॉल खरीद नीति में महत्वपूर्ण बदलाव किया है। सरकारी पेट्रोलियम कंपनियों ने 2026-27 के एथेनॉल आपूर्ति वर्ष के लिए जारी ताजा खरीद निविदा में गन्ने के रस, चीनी की चाशनी और बी-हेवी शीरे से उत्पादित एथेनॉल को शामिल नहीं किया है। इस फैसले का मुख्य उद्देश्य गन्ने और चीनी से बनने वाले उत्पादों का इस्तेमाल एथेनॉल उत्पादन में कम करके घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता बनाए रखना है। भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (BPCL) ने 16 अक्टूबर को पेट्रोलियम मार्केटिंग कंपनियों की ओर से जारी निविदा के तहत नवंबर 2026 से शुरू होने वाले आपूर्ति वर्ष के लिए लगभग 1,100 करोड़ लीटर एथेनॉल की खरीद हेतु बोलियां आमंत्रित की हैं। इस खरीद का उद्देश्य पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिलाने के राष्ट्रीय लक्ष्य को पूरा करने के लिए पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करना है।
नई निविदा में सरकार ने स्पष्ट किया है कि 2026-27 के एथेनॉल आपूर्ति वर्ष के दौरान एथेनॉल उत्पादन के लिए चीनी के इस्तेमाल को शून्य रखने का निर्देश दिया गया है। इसी कारण गन्ने के रस, चीनी या चीनी की चाशनी और बी-हेवी शीरे से उत्पादित एथेनॉल की खरीद के लिए बोलियां नहीं मांगी गई हैं। इससे एथेनॉल बनाने वाली कंपनियों को अपने कच्चे माल की खरीद और उत्पादन की रणनीति में बदलाव करना पड़ सकता है। अब कंपनियों को उन स्रोतों पर अधिक ध्यान देना होगा, जिन्हें नई निविदा में अनुमति दी गई है। इनमें मक्का, टूटे चावल, भारतीय खाद्य निगम (FCI) द्वारा खरीदे गए अधिशेष चावल और सी-हेवी शीरे से उत्पादित एथेनॉल शामिल हैं। इस तरह सरकार चीनी उद्योग और ईंधन क्षेत्र की जरूरतों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रही है।
इस नीति में एक और महत्वपूर्ण बदलाव मक्के से बनने वाले एथेनॉल पर मिलने वाले प्रोत्साहन से संबंधित है। नई निविदा में मक्का आधारित एथेनॉल के लिए प्रोत्साहन राशि घटाकर 68.86 रुपये प्रति लीटर कर दी गई है, जबकि पहले यह 71.86 रुपये प्रति लीटर थी। यानी प्रोत्साहन में तीन रुपये प्रति लीटर की कमी की गई है। इस बदलाव का असर एथेनॉल उत्पादकों की लागत, लाभ और कच्चे माल के चयन पर पड़ सकता है। हालांकि, इसका वास्तविक प्रभाव उत्पादन लागत और बाजार की परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।
सरकार की इस रणनीति का व्यापक उद्देश्य पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम को जारी रखते हुए कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करना और वाहनों से होने वाले प्रदूषण को घटाना है। चीनी उत्पादन में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल को एथेनॉल निर्माण से दूर रखने पर घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ सकती है। हालांकि, इससे चीनी की खुदरा कीमतें निश्चित रूप से कम होंगी, ऐसा कहना अभी उचित नहीं होगा। कीमतों पर असर चीनी के उत्पादन, मांग, भंडार और सरकारी नीतियों सहित कई कारकों पर निर्भर करेगा। कुल मिलाकर, 2026-27 की नई एथेनॉल खरीद नीति से चीनी उद्योग, एथेनॉल उत्पादकों, गन्ना किसानों और पेट्रोलियम क्षेत्र पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ने की संभावना है।
एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें
अमर उजाला प्रीमियम वीडियो सिर्फ सब्सक्राइबर्स के लिए उपलब्ध है
प्रीमियम वीडियो
सभी विशेष आलेख
फ्री इ-पेपर
सब्सक्राइब करें
Next Article
Disclaimer
हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।