अब पछतावे का होत जब...: डोनाल्ड ट्रंप को वोट देकर पछता रहे अमेरिकी, खाना-पेट्रोल से बिजली तक सब हुई महंगी
अमेरिका में महंगाई ने आम लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। किराना, पेट्रोल, बिजली और रोजमर्रा के खर्च तेजी से बढ़ने से परिवारों का बजट बिगड़ रहा है। कई लोगों ने कहा कि डोनाल्ड ट्रंप से राहत की उम्मीद थी, लेकिन नए टैरिफ और पश्चिम एशिया तनाव के कारण हालात और खराब हो गए। सरकारी आंकड़ों में भी ऊर्जा कीमतों और पेट्रोल के दामों में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
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अब पछताए क्या होत जब चिड़िया चुग गई खेत, इस कहावत को अमेरिकी महसूस कर रहे हैं। वहां आम लोगों पर महंगाई का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। किराना सामान, पेट्रोल, बिजली और रोजमर्रा की जरूरतों की कीमतों में तेजी से बढ़ोतरी ने लाखों परिवारों का बजट बिगाड़ दिया है। अर्थशास्त्रियों का कहना है कि नए अमेरिकी टैरिफ और पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के कारण वैश्विक ऊर्जा कीमतों में उछाल ने हालात और मुश्किल बना दिए हैं।
विशेषज्ञों के मुताबिक, जब अमेरिकी परिवार आर्थिक राहत महसूस करने लगे थे, तभी बढ़ती कीमतों ने उनकी मुश्किलें फिर बढ़ा दीं। इसका असर उपभोक्ता खर्च और आर्थिक विकास दोनों पर पड़ सकता है।
मैं खुद को ठगा हुआ महसूस कर रही हूं
कैलिफोर्निया के बरबैंक की रहने वाली 66 वर्षीय बुजुर्ग महिला केटी पेरे ने कहा मैं खुद को ठगा हुआ महसूस कर रही हूं। उन्होंने आगे कहा कि वह न्यूनतम वेतन पर सफाई कर्मचारी के रूप में काम करती हैं और अपने ऑटिस्टिक पोते की देखभाल भी करती हैं। उन्होंने कहा कि मैंने डोनाल्ड ट्रंप को वोट दिया था क्योंकि उन्होंने हालात बेहतर करने का वादा किया था, लेकिन अब मैं खुद को ठगा हुआ महसूस कर रही हूं।
कैटी के अनुसार, पहले उनका मासिक खर्च लगभग 2,300 डॉलर था, जबकि उनकी आय 2,400 डॉलर थी। अब खर्च बढ़कर 2,500 डॉलर से ऊपर पहुंच गया है और गुजारा मुश्किल हो गया है। उन्होंने बताया कि परिवार और दोस्तों से जितना उधार मिल सकता था, ले चुकी हैं, लेकिन अब भविष्य को लेकर चिंता बढ़ गई है।
ईंधन और खाने का खर्च बढ़ा
क्रिश्चियन डेविटो नाम के 34 वर्षीय कर्मचारी, जो लॉस एंजिल्स के एक बड़े किराना स्टोर में हेल्थ एंड सेफ्टी विभाग में काम करते हैं, ने कहा कि पिछले तीन महीनों में उनके मासिक बिल कम से कम 15 फीसदी बढ़ गए हैं।
उन्होंने कहा कि काम पर आने-जाने का खर्च 50 डॉलर प्रति सप्ताह से बढ़कर 70 डॉलर से ज्यादा हो गया है। खाने और बिजली के बिल भी तेजी से बढ़े हैं। पहले फिल्मों और दूसरी चीजों पर कटौती की, अब खाने पर भी खर्च कम करना पड़ रहा है।
सरकारी आंकड़ों में भी दिखा असर
अमेरिकी सरकारी आंकड़ों के अनुसार मार्च में ऊर्जा कीमतों में 10.9 फीसदी मासिक वृद्धि दर्ज की गई। इसमें पेट्रोल की कीमतों में 21.2 फीसदी की तेज बढ़ोतरी शामिल है। विशेषज्ञों का कहना है कि पेट्रोल महंगा होने से रोजाना यात्रा करने वालों पर तुरंत असर पड़ता है, जबकि बिजली और गैस के बढ़े बिल बाद में दबाव बढ़ाते हैं। वहीं खाद्य महंगाई का असर सीधे जरूरी सामानों पर पड़ता है।
ब्याज दरें भी बनी परेशानी
फेडरल रिजर्व ने महंगाई काबू करने के लिए ब्याज दरें ऊंची रखी हैं। इसका असर क्रेडिट कार्ड, ऑटो लोन और अन्य कर्जों की किस्तों पर भी पड़ रहा है।
टैरिफ भी बने बड़ी वजह
अर्थशास्त्रियों का कहना है कि नए आयात शुल्क यानी टैरिफ भी कीमतें बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। पीटरसन इंस्टीट्यूट फॉर इंटरनेशनल इकोनॉमिक्स के अनुमान के अनुसार कनाडा, मेक्सिको और चीन से आने वाले सामान पर लगाए गए शुल्क से एक सामान्य अमेरिकी परिवार पर सालाना 1,200 डॉलर से अधिक अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है।
युद्ध का असर दुनिया भर में
ईरान से जुड़े युद्ध हालात के कारण ऊर्जा बाजारों में अस्थिरता बनी हुई है। इसका असर केवल पेट्रोल तक सीमित नहीं है, बल्कि शिपिंग, उत्पादन और खाद्य आपूर्ति लागत भी बढ़ रही है।
आगे क्या?
विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले महीनों में महंगाई की दिशा इस बात पर निर्भर करेगी कि ऊर्जा संकट कितने समय तक जारी रहता है और टैरिफ बढ़ते हैं या कम किए जाते हैं। अगली उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) रिपोर्ट 12 मई को जारी होगी, जिससे अप्रैल महीने के हालात का संकेत मिलेगा। कैटी पेर्रे ने उम्मीद जताते हुए कहा कि उम्मीद है जल्द अच्छी खबर मिलेगी। हम एक और साल ऐसे नहीं गुजार सकते।
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