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शेख हसीना के 'सियासी अंत' पर मुहर?: आवामी लीग आतंकी संगठन घोषित, बांग्लादेश संसद ने लगाया स्थायी बैन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ढाका
Published by: राकेश कुमार
Updated Wed, 08 Apr 2026 09:34 PM IST
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सार
बांग्लादेश की संसद ने एक नया कानून पारित कर पूर्व पीएम शेख हसीना की पार्टी आवामी लीग पर लगे प्रतिबंध को स्थायी कर दिया है। आतंकवाद विरोधी कानून में संशोधन कर पार्टी को नरसंहार का जिम्मेदार ठहराया गया है। अब पार्टी चुनाव नहीं लड़ पाएगी और न ही कोई सार्वजनिक गतिविधि कर सकेगी।
शेख हसीना
- फोटो : एएनआई (फाइल)
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विस्तार
बुधवार को बांग्लादेश की संसद ने बेहद सख्त कानून पारित किया है। इसके तहत पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की पार्टी आवामी लीग पर लगे प्रतिबंध को आधिकारिक कानूनी मोहर लगा दी गई है। अब आवामी लीग बांग्लादेश में एक प्रतिबंधित संगठन है।
आतंकवाद विरोधी कानून में संशोधन
संसद में गृह मंत्री सलाहुद्दीन अहमद ने इस विधेयक को पेश किया। हालांकि उन्होंने सीधे तौर पर आवामी लीग का नाम नहीं लिया, लेकिन उन्होंने कहा कि यह कानून एक ऐसी संस्था को प्रतिबंधित करने के लिए है जो 'नरसंहार और आतंकी गतिविधियों' में शामिल रही है। यह नया कानून पिछले 'आतंकवाद विरोधी अधिनियम' में संशोधन है, जिसे पहले मुहम्मद यूनुस की अगुवाई वाली अंतरिम सरकार ने एक अध्यादेश के जरिए लागू किया था।
चुनाव और प्रचार पर पूरी तरह रोक
इस कानून के लागू होने के बाद अब आवामी लीग का चुनाव आयोग में पंजीकरण स्थायी रूप से रद्द रहेगा। पार्टी न तो चुनाव लड़ सकेगी और न ही किसी तरह की राजनीतिक गतिविधि कर पाएगी। कानून में यह भी प्रावधान है कि सोशल मीडिया या मुख्यधारा की मीडिया में पार्टी के समर्थन में कोई भी बयान प्रकाशित करना अपराध माना जाएगा। यहां तक कि पार्टी के समर्थन में जुलूस निकालना या भाषण देना भी प्रतिबंधित कर दिया गया है।
यह भी पढ़ें: आंकड़ों में अमेरिका-ईरान की जंग: 3500 से ज्यादा मौतें, 12 देश पर हमले, जानें युद्ध में किसे-कितना नुकसान
विपक्ष और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता
दिलचस्प बात यह है कि इस विधेयक का विरोध केवल बाहर से नहीं, बल्कि संसद के भीतर से भी हुआ है। मुख्य विपक्षी दल जमात-ए-इस्लामी के प्रमुख शफीकुर रहमान ने बिल की समीक्षा के लिए और समय मांगा।
वहीं, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संयुक्त राष्ट्र (यूएन) के मानवाधिकार अधिकारियों ने इस कदम की आलोचना की है। विशेषज्ञों का कहना है कि किसी बड़ी राजनीतिक पार्टी पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाना लोकतंत्र के स्वस्थ भविष्य के लिए ठीक नहीं है। संवैधानिक विशेषज्ञ स्वाधीन मलिक ने कहा कि दुनिया के इतिहास में बांग्लादेश दूसरा ऐसा देश बन गया है, जिसने अपनी आजादी की लड़ाई का नेतृत्व करने वाली पार्टी को ही बैन कर दिया है।
शेख हसीना पर कानूनी शिकंजा
बता दें कि शेख हसीना फिलहाल भारत में शरण लिए हुए हैं। बांग्लादेश की एक विशेष अदालत ने उनकी अनुपस्थिति में उन्हें मानवता के खिलाफ अपराधों के लिए मौत की सजा सुनाई है। वहीं, ढाका में नई सरकार के आने के बाद से पुराने शासन के करीबियों पर गाज गिर रही है। हाल ही में पूर्व स्पीकर शिरीन शरमीन चौधरी को भी हत्या के प्रयास के आरोप में गिरफ्तार किया गया है।
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आतंकवाद विरोधी कानून में संशोधन
संसद में गृह मंत्री सलाहुद्दीन अहमद ने इस विधेयक को पेश किया। हालांकि उन्होंने सीधे तौर पर आवामी लीग का नाम नहीं लिया, लेकिन उन्होंने कहा कि यह कानून एक ऐसी संस्था को प्रतिबंधित करने के लिए है जो 'नरसंहार और आतंकी गतिविधियों' में शामिल रही है। यह नया कानून पिछले 'आतंकवाद विरोधी अधिनियम' में संशोधन है, जिसे पहले मुहम्मद यूनुस की अगुवाई वाली अंतरिम सरकार ने एक अध्यादेश के जरिए लागू किया था।
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चुनाव और प्रचार पर पूरी तरह रोक
इस कानून के लागू होने के बाद अब आवामी लीग का चुनाव आयोग में पंजीकरण स्थायी रूप से रद्द रहेगा। पार्टी न तो चुनाव लड़ सकेगी और न ही किसी तरह की राजनीतिक गतिविधि कर पाएगी। कानून में यह भी प्रावधान है कि सोशल मीडिया या मुख्यधारा की मीडिया में पार्टी के समर्थन में कोई भी बयान प्रकाशित करना अपराध माना जाएगा। यहां तक कि पार्टी के समर्थन में जुलूस निकालना या भाषण देना भी प्रतिबंधित कर दिया गया है।
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विपक्ष और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता
दिलचस्प बात यह है कि इस विधेयक का विरोध केवल बाहर से नहीं, बल्कि संसद के भीतर से भी हुआ है। मुख्य विपक्षी दल जमात-ए-इस्लामी के प्रमुख शफीकुर रहमान ने बिल की समीक्षा के लिए और समय मांगा।
वहीं, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संयुक्त राष्ट्र (यूएन) के मानवाधिकार अधिकारियों ने इस कदम की आलोचना की है। विशेषज्ञों का कहना है कि किसी बड़ी राजनीतिक पार्टी पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाना लोकतंत्र के स्वस्थ भविष्य के लिए ठीक नहीं है। संवैधानिक विशेषज्ञ स्वाधीन मलिक ने कहा कि दुनिया के इतिहास में बांग्लादेश दूसरा ऐसा देश बन गया है, जिसने अपनी आजादी की लड़ाई का नेतृत्व करने वाली पार्टी को ही बैन कर दिया है।
शेख हसीना पर कानूनी शिकंजा
बता दें कि शेख हसीना फिलहाल भारत में शरण लिए हुए हैं। बांग्लादेश की एक विशेष अदालत ने उनकी अनुपस्थिति में उन्हें मानवता के खिलाफ अपराधों के लिए मौत की सजा सुनाई है। वहीं, ढाका में नई सरकार के आने के बाद से पुराने शासन के करीबियों पर गाज गिर रही है। हाल ही में पूर्व स्पीकर शिरीन शरमीन चौधरी को भी हत्या के प्रयास के आरोप में गिरफ्तार किया गया है।
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