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Carney: अमेरिकी वर्चस्व खत्म हो रहा, वैश्विक व्यवस्था पर गंभीर संकट, कनाडा के पीएम ने दुनिया को चेताया
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दावोस
Published by: नितिन गौतम
Updated Wed, 21 Jan 2026 09:25 AM IST
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सार
कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में दुनिया की मौजूदा व्यवस्था के खत्म होने की बात कही। उन्होंने बिना अमेरिका का नाम लिए अमेरिका पर निशाना साधा और परोक्ष शब्दों में कहा कि अब दुनिया में अमेरिका का वर्चस्व खत्म हो रहा है।
मार्क कार्नी, प्रधानमंत्री, कनाडा
- फोटो : एएनआई
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विस्तार
कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने एक धमाकेदार बयान दिया है। उन्होंने दावोस में कहा कि दुनिया की मौजूदा व्यवस्था संकट में है और अमेरिकी वर्चस्व खत्म हो रहा है। दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के मंच से दिए अपने बयान में कनाडा के प्रधानमंत्री ने अमेरिका के वर्चस्व को चुनौती देते हुए ग्रीनलैंड मुद्दे पर डेनमार्क का समर्थन किया। हालांकि कनाडा के पीएम ने डोनाल्ड ट्रंप के नाम का जिक्र नहीं किया, लेकिन उन्होंने अपनी टिप्पणियों में अमेरिका पर जमकर निशाना साधा।
कनाडा के प्रधानमंत्री से पहले जर्मनी के राष्ट्रपति फ्रैंक वाल्टर स्टीमर भी ऐसा बयान दे चुके हैं। उन्होंने कहा था कि अमेरिका, वैश्विक व्यवस्था को खत्म कर रहा है। स्टीमर ने कहा कि दुनिया अब लुटेरों के एक गिरोह के रूप में बदल रही है, जहां देशों से ऐसे व्यवहार किया जा रहा है, जैसे वे कुछ ताकतवर देशों की संपत्ति हों।
मार्क कार्नी ने दुनिया को चेताया
अमेरिका-कनाडा के संबंध खराब दौर में
वैश्विक व्यवस्था की बात करें तो ट्रंप ने दुनिया के कई देशों पर भारी-भरकम टैरिफ लगा दिए हैं और ग्रीनलैंड के मुद्दे पर यूरोप पर भी टैरिफ लगाने की बात कही है। इसे लेकर यूरोप में नाराजगी है और यूरोपीय देशों ने अमेरिका को ग्रीनलैंड पर कब्जे को लेकर चेताया है। फ्रांस ने तो साफ कह दिया है कि यूरोप की संप्रभुता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। इसके बाद ट्रंप ने फ्रांसीसी राष्ट्रपति के खिलाफ भी तीखी टिप्पणी की है। अब कनाडा ने भी ग्रीनलैंड पर डेनमार्क के समर्थन की बात कह दी है। यही वजह है कि नाटो के कमजोर होने की आशंका जाहिर की जा रही है।
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कनाडा के प्रधानमंत्री से पहले जर्मनी के राष्ट्रपति फ्रैंक वाल्टर स्टीमर भी ऐसा बयान दे चुके हैं। उन्होंने कहा था कि अमेरिका, वैश्विक व्यवस्था को खत्म कर रहा है। स्टीमर ने कहा कि दुनिया अब लुटेरों के एक गिरोह के रूप में बदल रही है, जहां देशों से ऐसे व्यवहार किया जा रहा है, जैसे वे कुछ ताकतवर देशों की संपत्ति हों।
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मार्क कार्नी ने दुनिया को चेताया
- मार्क कार्नी ने कहा, 'ताकतवर देश उन्हें माना जाता है, जिनके पास संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सीट है जैसे चीन, अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन और रूस। इन देशों का दुनिया पर आर्थिक और सैन्य दबदबा है।'
- 'मध्य ताकत वाले देश जैसे कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, अर्जेंटीना, दक्षिण कोरिया और ब्राजील का भी दुनिया की राजनीति में बड़ा असर रखते हैं।'
- कार्नी ने कहा कि दुनिया की मौजूदा व्यवस्था बदलाव के दौर से नहीं गुजर रही है, बल्कि पूरी व्यवस्था ही संकट में है। ऐसे में मध्य ताकत वाले देशों को एकजुट होना चाहिए।
- कार्नी ने कहा 'अगर हम बातचीत की मेज पर नहीं आएंगे तो जल्द ही हमें बड़ी ताकतें खा जाएंगी।'
- कार्नी ने कहा कि मौजूदा वैश्विक व्यवस्था पर अमेरिका की पकड़ थी, लेकिन ट्रंप प्रशासन में अमेरिका द्वारा तानाशाही की जा रही है, जिसके चलते वैश्विक व्यवस्था संकट में है। उन्होंने कहा कनाडा जैसे देश पहले से जानते थे कि अंतरराष्ट्रीय नियम आधारित व्यवस्था का विचार सिर्फ काल्पनिक है।
अमेरिका-कनाडा के संबंध खराब दौर में
- गौरतलब है कि अमेरिका और कनाडा के संबंध भी इन दिनों अच्छे दौर से नहीं गुजर रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडा को अमेरिका का 51वां राज्य बनाने की बात कही है। साथ ही कनाडा से होने वाले आयात पर भारी टैरिफ लगा दिया है।
- इसके चलते कनाडा, जो पारंपरिक तौर पर अमेरिका का करीबी सहयोगी रहा है, वहां राष्ट्रवाद का उदय और अमेरिका के प्रति नाराजगी देखी जा रही है। बीते दिनों कनाडा के पीएम ने चीन का दौरा किया था, जिसे भी कनाडा द्वारा अमेरिका से दूरी और चीन से नजदीकी बढ़ाने के तौर पर देखा जा रहा है।
वैश्विक व्यवस्था की बात करें तो ट्रंप ने दुनिया के कई देशों पर भारी-भरकम टैरिफ लगा दिए हैं और ग्रीनलैंड के मुद्दे पर यूरोप पर भी टैरिफ लगाने की बात कही है। इसे लेकर यूरोप में नाराजगी है और यूरोपीय देशों ने अमेरिका को ग्रीनलैंड पर कब्जे को लेकर चेताया है। फ्रांस ने तो साफ कह दिया है कि यूरोप की संप्रभुता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। इसके बाद ट्रंप ने फ्रांसीसी राष्ट्रपति के खिलाफ भी तीखी टिप्पणी की है। अब कनाडा ने भी ग्रीनलैंड पर डेनमार्क के समर्थन की बात कह दी है। यही वजह है कि नाटो के कमजोर होने की आशंका जाहिर की जा रही है।
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