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Shinzo Abe Murder Case: शिंजो आबे को गोली मारने वाले अपराधी को आजीवन कारावास, जापान की अदालत ने सुनाई सजा

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला,टोक्यो Published by: देवेश त्रिपाठी Updated Wed, 21 Jan 2026 10:22 AM IST
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सार

8 जुलाई, 2022 को नारा रेलवे स्टेशन के बाहर भाषण देते समय शिंजो आबे को गोली मार दी गई थी। टेलीविजन कैमरों में रिकॉर्ड किए गए फुटेज में देखा गया कि राजनेता के मुट्ठी उठाते ही दो गोलियों की आवाज सुनाई दी। वह अपना सीना पकड़कर गिर पड़े। अधिकारियों ने बताया था कि आबे की तुरंत ही मौत हो गई थी।

Japanese court sentenced man who shot former Japanese Prime Minister Shinzo Abe to life in prison
जापान के पूर्व पीएम शिंजो आबे - फोटो : ANI
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जापान की अदालत ने बुधवार को पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे की गोली मारकर हत्या करने वाले शख्स को उम्रकैद की सजा सुनाई है। शिंजो आबे की हत्या करने की बात इस शख्स ने कबूल की थी। इस मामले ने जापान की सत्तारूढ़ पार्टी और एक विवादास्पद दक्षिण कोरियाई चर्च के बीच दशकों पुराने घनिष्ठ संबंधों को उजागर किया है।

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जापान के सबसे प्रभावशाली राजनेताओं में शामिल शिंजो आबे प्रधानमंत्री पद छोड़ने के बाद एक नियमित सांसद के रूप में कार्यरत थे। इसी दौरान 2022 में पश्चिमी शहर नारा में चुनाव प्रचार के दौरान उनकी हत्या कर दी गई। इस घटना ने सख्त बंदूक नियंत्रण वाले देश को स्तब्ध कर दिया।
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चर्च से पूर्व पीएम की हत्या का क्या कनेक्शन? 
45 वर्षीय तेत्सुया यामागामी ने अक्टूबर में शुरू हुए मुकदमे में हत्या का अपराध स्वीकार कर लिया था। अदालत ने बुधवार को फैसला सुनाते हुए आजीवन कारावास की सजा का एलान किया। शूटर ने कहा कि वह एक विवादास्पद चर्च के प्रति नफरत से प्रेरित था।

यामागामी ने कहा कि उसने आबे की हत्या तब की जब उसने पूर्व नेता की ओर से यूनिफिकेशन चर्च से जुड़े एक समूह को भेजा गया एक वीडियो संदेश देखा। उसने आगे कहा कि उसका उद्देश्य उस चर्च को नुकसान पहुंचाना था, जिससे वह नफरत करता था और आबे के साथ उसके संबंधों को उजागर करना था।

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सत्ताधारी पार्टी और चर्च के गहरे रिश्ते
अभियोजकों ने यामागामी के लिए आजीवन कारावास की मांग की थी। वहीं, उनके वकीलों ने चर्च के अनुयायी के बच्चे के रूप में उनकी परेशानियों का हवाला देते हुए 20 साल से अधिक की सजा न देने की मांग की थी। 

सत्ताधारी लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी और चर्च के बीच घनिष्ठ संबंधों के खुलासे के बाद पार्टी ने चर्च से दूरी बना ली। इसके चलते जांच शुरू हुई, जिसकी वजह से चर्च की जापानी शाखा का कर-मुक्त धार्मिक दर्जा खत्म कर दिया गया और उसे भंग करने का आदेश दिया गया।

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