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US में चाइना गर्ल से कैसे मची तबाही: फेंटानिल से मौतों पर बौखलाया अमेरिका, मैक्सिको से चल रहा चीनी नशे का धंधा
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सार
फेंटानिल एक सिंथेटिक ड्रग है, जो आमतौर पर पेन किलर के तौर पर इस्तेमाल होती है, लेकिन इसे नशे के तौर पर भी इस्तेमाल किया जा रहा है। अमेरिका में फेंटानिल ड्रग के ओवरडोज से हर साल हजारों लोगों की मौत होती है।
चीन अमेरिका के बीच तनाव का कारण बना फेंटानिल (सांकेतिक)
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
नशा तस्करी के लिए वेनेजुएला पर किए गए हमले के बाद अब अमेरिका ने मैक्सिको को अपने निशाने पर लिया है। दरअसल, अमेरिका में नशे की सबसे बड़ी सप्लाई मैक्सिको से होने का दावा किया जाता है। जो नशा मैक्सिको से अमेरिका पहुंचता है, उसकी पूरी आपूर्ति चीन से होती है। इसे अमेरिकी बाजार में और मैक्सिको के नशे के कारोबार में 'चाइना गर्ल' के नाम से जाना जाता है। इसी चाइना गर्ल की ओवरडोज से अमेरिका में मौतों का सिलसिला बढ़ गया है।
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सिर्फ 2023 में ही इस नशे से 75 हजार से ज्यादा अमेरिकी युवाओं की मौत हो चुकी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मैक्सिको में मादक पदार्थों और फेंटानिल (चाइना गर्ल) के खिलाफ चलाए जाने वाले अभियानों में अमेरिकी सेना को शामिल किए जाने की मांग की है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अमेरिका मैक्सिको पर हमला करता है, तो इसका सीधा असर चीन पर पड़ना तय है। चीनी संसद की अपनी खुद की पेश की गई रिपोर्ट बताती है कि 600 अरब डॉलर का चीन से किया गया कारोबार संदिग्ध है। इसमें अवैध नशे की आपूर्ति का प्रतिशत सबसे ज्यादा है।
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चीन की ओर से पूरी दुनिया में सुनियोजित तरीके से फैलाए जाने वाले अवैध नशे के नेटवर्क की पूरी रिपोर्ट अमेरिका की प्रतिनिधि सभा समिति ने तैयार की है। विदेशी मामलों के जानकार और दिल्ली विश्वविद्यालय के सहायक प्रोफेसर अभिषेक सिंह बताते हैं कि दक्षिणी अमेरिका के हिस्सों में जिस तरीके से अमेरिका ने कार्रवाई की है, उसके पीछे कई बड़े कारणों में से एक चीन की ड्रग पैडलिंग पॉलिसी भी है। अमेरिकी खुफिया अधिकारी और अमेरिकी ट्रेजरी स्पेशल एजेंट जॉन ए. करारा ने अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में रिपोर्ट पेश की है। इसमें स्पष्ट रूप से कहा गया कि चीन की ओर से कई बड़ी साजिशों के तहत पूरी दुनिया को अस्थिर किया जा रहा है। इसमें नकली माल से लेकर एआई और मानव तस्करी से लेकर अवैध नशा और हथियार की तस्करी प्रमुखता से शामिल है।
मैक्सिको में फेंटानिल के लिए 80% हिस्सा चीन से आ रहा
विदेशी मामलों के जानकारों का मानना है कि अमेरिका में आने वाली फेंटानिल मैक्सिको से आती है, जबकि मैक्सिको में तैयार होने वाली फेंटानिल का 80 फीसदी से ज्यादा केमिकल चीन से आयात होता है। जानकारों का कहना है कि यही वजह है अमेरिका ने मैक्सिको पर शिकंजा कस दिया है। भारतीय विदेश सेवा के वरिष्ठ अधिकारी रहे रिटायर्ड आलोक सिन्हा कहते हैं कि 2021 में चीनी संसद की अपनी रिपोर्ट बताती है कि उनका विदेशी व्यापार छह ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा पहुंच गया।
सिंह कहते हैं इसी रिपोर्ट में अनुमान लगाकर कहा गया कि केवल 10 फीसदी व्यापार ही संदिग्ध है। इसका मतलब सीधे तौर पर यह है कि अमेरिका से 600 अरब डॉलर का संदिग्ध व्यापार पूरी दुनिया में किया जाता है। यह आंकड़ा बहुत बड़ा है। अमेरिका के ड्रग एनफोर्समेंट एडमिनिस्ट्रेशन (DEA) के मुताबिक उनके देश में 80 फीसदी से ज्यादा अवैध मेंथा चीन से आता है। इसका रूट मैक्सिको के जरिए ही होता है। यही वजह है कि अमेरिका ने मैक्सिको पर शिकंजा और कसा है।
चीन के दक्षिणी राज्यों से पूरी दुनिया में आपूर्ति
DEA की रिपोर्ट बताती है कि चीन के दक्षिणी राज्यों में अवैध नशे के कारोबार को बढ़ाया जाता है और उसके बाद पूरी दुनिया के हिस्से में वहां से उसकी आपूर्ति की जाती है। इसके अलावा म्यांमार से लेकर उतरी लाओस के तकरीबन 100 किलोमीटर के दायरे वाले हिस्से में नशे का बड़ा कारोबार चीन की सरपरस्ती में किया जाता है।
रिपोर्ट के मुताबिक, म्यांमार के शान और क्वान राज्यों समेत उत्तरी लाओस को छोटा चीन के नाम से भी जाना जाता है, जहां पर सबसे ज्यादा चीनी अवैध नशे के उद्योग लगे हुए हैं। भारतीय खुफिया एजेंसी से जुड़े अधिकारी भी इस बात को मानते हैं कि दक्षिण पूर्व एशिया में होने वाली 78 फीसदी से ज्यादा मादक पदार्थों की तस्करी चीन से होती है। अमेरिका की न्याय विभाग की हाल में पेश की गई रिपोर्ट भी चीन के बड़े ड्रग कारोबार के दक्षिणी अमेरिकी देशों में पैर पसारने की बात कहती है।
संगठित अपराधों का पूरा सिंडिकेट
विदेशी मामलों के जानकार और पूर्व राजनयिक आलोक सिन्हा कहते हैं कि अमेरिका की ही एक रिपोर्ट में मादक पदार्थों के सबसे बड़े चीनी तस्कर वोन कुओका कोई का जिक्र किया गया है। इस तस्कर को ब्रोकन टुथ के नाम से भी मैक्सिको और कोलंबिया जैसे देशों में जाना जाता है। इसके संगठन '14 के ट्राइड' के माध्यम से संगठित अपराधों का पूरा सिंडिकेट दुनिया भर में चलाया जाता है। खुफिया एजेंसी के सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, चीन के इस सबसे बड़े हिस्से से चलाए जाने वाले रैकेट को खत्म करने के लिए एफबीआई ने भारतीय एजेंसियों से भी मदद मांगी है। खुफिया रिपोर्ट के मुताबिक चीन के बंदरगाहों से दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में कार्गो शिप के माध्यम से तस्करी का पूरा जाल फैलाया गया है। इसमें चीन के किंगदाओ, शंघाई, तियानजिन, क्वागडोंग जैसे नशे के सप्लाई के बड़े बंदरगाह चिह्नित किए गए हैं।
बंदरगाहों का अधिग्रहण कर रहा चीन
दुनियाभर के अलग-अलग हिस्सों में बंदरगाहों के माध्यम से चीन के नशे को रोकने के लिए बड़ी रणनीति भी बनाई गई। इंटरनेशनल एसोसिएशन ऑफ पोर्ट्स एंड हार्बर्स से जुड़े सदस्य इंजीनियर जीएस ढिल्लो कहते हैं कि चीन की इसी हरकत की वजह से 2024 में यूरोपियन यूनियन ने बंदरगाह गठबंधन बनाने की योजना शुरू की थी, लेकिन बंदरगाहों के माध्यम से नशे के बड़े कारोबार को मजबूत करने के लिए चीन ने ग्रीस के पीरियस बंदरगाह प्राधिकरण के दो तिहाई हिस्से का मालिकाना हक चीनी समूह कॉस्को शिपिंग को दिलवाया। जब यूरोपियन यूनियन ने संगठन की बात की तो ग्रीस के इसी बंदरगाह ने उसमें शामिल होने से मना कर दिया। इसी तरह अमेरिका ने जब चीन के इस नशे के कारोबार को रोकने के लिए सख्ती की, तो चीन ने उत्तरी और दक्षिणी अमेरिका की अवैध मादक पदार्थों की आपूर्ति के लिए पेरू में चांकाय बंदरगाह का अधिग्रहण कर लिया।
अमेरिका में 75 हजार से ज्यादा मौतें
अमेरिका के आसपास के देश से चीनी नशे की आवक इतनी खतरनाक हुई कि अमेरिका में इस नशे की ओवरडोज से मौतें भी होने लगीं। दिल्ली विश्वविद्यालय में प्रोफेसर अभिषेक सिंह कहते हैं कि अमेरिका की सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल की रिपोर्ट बताती है 2023 में 75000 से ज्यादा मौतें फेंटानिल की ओवरडोज से हुई है। इनमें से 90 फीसदी से ज्यादा इस नशे की आपूर्ति मैक्सिको से की गई और जो केमिकल इस्तेमाल हुआ वह 80 फीसदी से ज्यादा चीन का था। पूरी दुनिया में चीन में तैयार किए जाने वाले उसे फेंटानिल ड्रग्स को चीनी गर्ल्स के नाम से भी जाना जाता है।