Mark Carney India Visit: कनाडा के पीएम कार्नी जल्द आएंगे भारत, दो साल की कूटनीतिक तल्खी के बाद सुधार के संकेत
India-Canada Relations: दो साल की कूटनीतिक तल्खी के बाद भारत और कनाडा रिश्ते सुधारने की दिशा में बढ़ रहे हैं। प्रधानमंत्री मार्क कार्नी का प्रस्तावित भारत दौरा व्यापार, निवेश और रणनीतिक सहयोग को नई रफ्तार दे सकता है। आइए जानते हैं कार्नी का भारत आना क्यों अहम है।
विस्तार
लगभग दो साल तक चले कूटनीतिक तनाव के बाद भारत और कनाडा के रिश्तों में सुधार के साफ संकेत दिखने लगे हैं। कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के भारत दौरे की तैयारी इसी बदले हुए माहौल की सबसे बड़ी मिसाल मानी जा रही है। यह यात्रा ऐसे समय हो रही है, जब अमेरिका की सख्त टैरिफ नीति ने वैश्विक व्यापार को झकझोर दिया है और दोनों देश नए साझेदारों की तलाश में हैं।
कनाडाई प्रधानमंत्री का प्रस्तावित भारत दौरा केवल एक औपचारिक कूटनीतिक कार्यक्रम नहीं है, बल्कि इसे द्विपक्षीय रिश्तों के रीसेट बटन के तौर पर देखा जा रहा है। बीते करीब दो वर्षों से दोनों देशों के संबंध ठंडे पड़े थे। अब कार्नी की यात्रा से व्यापार, निवेश और रणनीतिक सहयोग को नई दिशा देने की कोशिश होगी। इस दौरे का एक बड़ा मकसद भारत-कनाडा के बीच व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते यानी सीईपीए पर बातचीत को दोबारा शुरू करना है, ताकि 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 50 अरब डॉलर तक पहुंचाया जा सके।
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इन क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा होने की संभावना
- व्यापार और निवेश... सीईपीए के जरिए व्यापार बढ़ाने और शुल्क बाधाएं कम करने पर जोर।
- रक्षा और तकनीक... उभरती तकनीकों, साइबर सुरक्षा और रक्षा सहयोग को नई ऊंचाई देने की योजना।
- ऊर्जा और सप्लाई चेन... स्वच्छ ऊर्जा, खनिज और सप्लाई चेन में साझेदारी मजबूत करना।
- राजनयिक रिश्ते... दोबारा भरोसा कायम करने के लिए राजनयिक स्टाफ की संख्या बढ़ाना।
- लोगों के बीच संपर्क... वीजा, शिक्षा और कौशल हस्तांतरण जैसे क्षेत्रों में सहयोग।
ट्रंप के टैरिफ और बदला वैश्विक समीकरण
इस नई सक्रियता के पीछे एक बड़ा कारण अमेरिका की टैरिफ नीति है। मौजूदा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिका ने भारतीय निर्यात पर 50 प्रतिशत तक शुल्क लगाया है, जिसमें रूस से तेल खरीद से जुड़ा 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ भी शामिल है। वहीं कनाडा के निर्यात पर 35 प्रतिशत शुल्क लगाया गया है। इस दबाव ने दोनों देशों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि अमेरिका पर निर्भरता कम कर नए बाजार और नए साझेदार तलाशे जाएं। कनाडा ने अगले एक दशक में गैर-अमेरिकी निर्यात को दोगुना करने का लक्ष्य तय किया है, और भारत इसमें एक अहम साझेदार बन सकता है।
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कैसे आई थी रिश्तों में दरार
भारत-कनाडा संबंधों में सबसे बड़ी दरार 2023 में उस समय पड़ी, जब तत्कालीन कनाडाई प्रधानमंत्री ट्रूडो ने आरोप लगाया कि भारत सरकार से जुड़े एजेंटों की भूमिका कनाडा में खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में हो सकती है। भारत ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए उन्हें बेतुका और निराधार बताया। इसके बाद दोनों देशों के बीच राजनयिक तल्खी बढ़ी, उच्चायुक्तों की वापसी हुई और कई संवाद ठप पड़ गए। अब नए नेतृत्व में कनाडा के रुख में बदलाव के संकेत मिल रहे हैं।
कनाडा में भारतीय उच्चायुक्त दिनेश पत्नायक के मुताबिक, यह दौरा भारत के केंद्रीय बजट के बाद होने की संभावना है और इसे इस बात के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है कि सिस्टम में भरोसा लौट रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मार्क कार्नी के बीच पहले ही उच्चस्तरीय संपर्क हो चुका है और दोनों पक्ष मानते हैं कि बीते समय की कड़वाहट को पीछे छोड़कर आगे बढ़ना जरूरी है। जानकारों का कहना है कि अगर सीईपीए पर ठोस प्रगति होती है और राजनीतिक विश्वास बहाल रहता है, तो भारत-कनाडा संबंध आने वाले वर्षों में फिर से मजबूत हो सकते हैं।
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