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रिपोर्ट: घटती जन्मदर से घबराया चीन, महिलाओं को ज्यादा बच्चे पैदा करने के लिए कर रहा प्रोत्साहित
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला।
Published by: निर्मल कांत
Updated Fri, 06 Feb 2026 03:33 PM IST
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सार
चीन कभी जनसंख्या नियंत्रण के लिए महिलाओं पर एक-बच्चा नीति थोपता रहा, लेकिन अब घटती जन्म दर के कारण अधिक बच्चे पैदा करने की अपील कर रहा है। आंकड़े बताते हैं कि शिशु जन्म दर रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच चुकी है। पढ़ें रिपोर्ट-
सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : फ्रीपिक
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विस्तार
चीन कभी अपनी एक बच्चा नीति (वन चाइल्ड पॉलिसी) को लेकर बेहद सख्त रहा है। लेकिन अब वह इस रवैये में बदलाव ला रहा है। देश की महिलाओं से ज्यादा बच्चे पैदा करने की अपील की जा रही है। एक मीडिया रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई।
म्यांमार स्थित मेकांग न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले चार दशक में जन्म दर को महिलाओं ने नहीं, बल्कि सरकार ने तय किया है।
अधिक बच्चे पैदा करने की अपील क्यों की जा रही?
जहां 1979 में वन चाइल्ड पॉलिसी में जनसंख्या वृद्धि पर रोक लगाने का लक्ष्य रखा गया था, वहीं अब देश में महिलाओं पर अधिक बच्चे पैदा करने का दबाव डाला जाना शुरू हो गया है। ऐसा इसलिए क्योंकि देश की जनसंख्या में भारी गिरावट देखी गई है।
रिकॉर्ड निचले स्तर पर शिशु जन्म दर
जनवरी में जारी आधिकारिक आंकड़ों पर नजर डालें तो स्थिति स्पष्ट होती है। 2025 में 7.92 मिलियन शिशु जन्मे, जो 2024 के 9.54 मिलियन से 1.62 मिलियन (लगभग 17 फीसदी) कम है। जन्म दर 5.63 प्रति 1,000 व्यक्ति रह गई, जो रिकॉर्ड निचला स्तर है। यह 1949 के बाद से सबसे कम स्तर है, जब चीन में आधुनिक जनगणना रिकॉर्ड शुरू हुए थे।
रिपोर्ट में क्या कहा गया है?
चीन ने कब खत्म की वन चाइल्ड पॉलिसी?
चीन ने 2016 में वन चाइल्ड पॉलिसी खत्म कर दी और टू चाइल्ड पॉलिसी अपनाई। बाद में जन्म दर में गिरावट जारी रहने पर इसे थ्री-चाइल्ड पॉलिसी तक बढ़ा दिया।
रिपोर्ट में कहा गया है, 'चीन की नीति में बदलाव का भ्रम एक गहरी समस्या को उजागर करता है: व्यक्तिगत इच्छा को बढ़ावा देने के बजाय, सरकार ने आर्थिक मजबूरी के चलते अपनी नीति को थोपना शुरू कर दिया है।'
ये भी पढ़ें: बांग्लादेश चुनाव से पहले हिंसा, कॉक्स बाजार में प्रचार के दौरान फायरिंग; बच्चे समेत पांच घायल
एक तरफ सरकार जन्म दर बढ़ाने की सलाह दे रही है, तो वहीं कई जोड़ों को बढ़ती महंगाई, करियर, जिम्मेदारियों और वर्कप्लेस पर लिंग आधारित भेदभाव के चलते रिस्क लेने से बचना चाहते हैं।
खास बात यह है कि लिंग अनुपात के कारण, चीन में अब बच्चे पैदा करने वाली महिलाओं (बढ़ी उम्र के कारण) की संख्या में भी कमी आई है। रिपोर्ट में कहा गया है, 'भले ही सरकार अब बच्चे पैदा करने के लिए कह रही है, महिलाएं अभी भी नीतिगत सीमाओं में फंसी हुई हैं।'
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म्यांमार स्थित मेकांग न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले चार दशक में जन्म दर को महिलाओं ने नहीं, बल्कि सरकार ने तय किया है।
अधिक बच्चे पैदा करने की अपील क्यों की जा रही?
जहां 1979 में वन चाइल्ड पॉलिसी में जनसंख्या वृद्धि पर रोक लगाने का लक्ष्य रखा गया था, वहीं अब देश में महिलाओं पर अधिक बच्चे पैदा करने का दबाव डाला जाना शुरू हो गया है। ऐसा इसलिए क्योंकि देश की जनसंख्या में भारी गिरावट देखी गई है।
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रिकॉर्ड निचले स्तर पर शिशु जन्म दर
जनवरी में जारी आधिकारिक आंकड़ों पर नजर डालें तो स्थिति स्पष्ट होती है। 2025 में 7.92 मिलियन शिशु जन्मे, जो 2024 के 9.54 मिलियन से 1.62 मिलियन (लगभग 17 फीसदी) कम है। जन्म दर 5.63 प्रति 1,000 व्यक्ति रह गई, जो रिकॉर्ड निचला स्तर है। यह 1949 के बाद से सबसे कम स्तर है, जब चीन में आधुनिक जनगणना रिकॉर्ड शुरू हुए थे।
रिपोर्ट में क्या कहा गया है?
- रिपोर्ट में बताया गया है कि चीन अभी भी शिशुओं के जन्म को व्यक्तिगत स्वतंत्रता के रूप में नहीं बल्कि आर्थिक योजना के एक साधन के रूप में देखता है।
- इसमें कहा गया है कि विकास के लिए, आय बढ़ाने और देश पर दबाव कम करने' के लक्ष्य के साथ, एक-बच्चा नीति ने कई महिलाओं को उनकी इच्छाओं से महरूम रखा।
- कई महिलाओं जबरन गर्भपात के लिए मजबूर किया, नसबंदी कराई, और शारीरिक-मानसिक तौर पर प्रताड़ित किया।
- सरकार ने लोकतांत्रिक तरीके से नहीं बल्कि जोर-जबरदस्ती से लोगों को अपनी बात मानने को मजबूर किया।
- इस रिपोर्ट में बेटों की चाहत का भी जिक्र है। लिखा गया है कि बेटा पाने की इच्छा ने देश के लिंगानुपात पर भी असर डाला।
चीन ने कब खत्म की वन चाइल्ड पॉलिसी?
चीन ने 2016 में वन चाइल्ड पॉलिसी खत्म कर दी और टू चाइल्ड पॉलिसी अपनाई। बाद में जन्म दर में गिरावट जारी रहने पर इसे थ्री-चाइल्ड पॉलिसी तक बढ़ा दिया।
रिपोर्ट में कहा गया है, 'चीन की नीति में बदलाव का भ्रम एक गहरी समस्या को उजागर करता है: व्यक्तिगत इच्छा को बढ़ावा देने के बजाय, सरकार ने आर्थिक मजबूरी के चलते अपनी नीति को थोपना शुरू कर दिया है।'
ये भी पढ़ें: बांग्लादेश चुनाव से पहले हिंसा, कॉक्स बाजार में प्रचार के दौरान फायरिंग; बच्चे समेत पांच घायल
एक तरफ सरकार जन्म दर बढ़ाने की सलाह दे रही है, तो वहीं कई जोड़ों को बढ़ती महंगाई, करियर, जिम्मेदारियों और वर्कप्लेस पर लिंग आधारित भेदभाव के चलते रिस्क लेने से बचना चाहते हैं।
खास बात यह है कि लिंग अनुपात के कारण, चीन में अब बच्चे पैदा करने वाली महिलाओं (बढ़ी उम्र के कारण) की संख्या में भी कमी आई है। रिपोर्ट में कहा गया है, 'भले ही सरकार अब बच्चे पैदा करने के लिए कह रही है, महिलाएं अभी भी नीतिगत सीमाओं में फंसी हुई हैं।'
