चिंताजनक: कच्चे तेल की महंगाई से थाली पर संकट के संकेत, उर्वरक लागत भी बढ़ी; कृषि संगठन की रिपोर्ट ने चेताया
वैश्विक बाजार में खाद्य महंगाई की नई आहट सुनाई दे रही है। पश्चिम एशिया युद्ध से तेल व उर्वरक महंगे होने से खेती और सप्लाई लागत बढ़ी है। संयुक्त राष्ट्र का खाद्य एवं कृषि संगठन के मुताबिक मार्च 2026 में फूड इंडेक्स 128.5 पर पहुंचा, लगातार दूसरे महीने बढ़त ने आगे दबाव के संकेत दिए हैं।
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दुनिया फिलहाल खाद्य संकट से दूर है, लेकिन खाद्य महंगाई के एक नए दौर की शुरुआत के स्पष्ट संकेत सामने आने लगे हैं। पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी, उर्वरकों की बढ़ती लागत और कृषि खर्च में इजाफा वैश्विक खाद्य बाजार पर दबाव बढ़ा रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, खाद्य कीमतों में लगातार दूसरे महीने बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे आने वाले समय में व्यापक महंगाई का खतरा गहरा गया है।
एफएओ की रिपोर्ट के अनुसार मार्च 2026 में फूड प्राइस इंडेक्स बढ़कर 128.5 अंक पर पहुंच गया, जो फरवरी के मुकाबले 2.4 फीसदी अधिक है। वहीं, पिछले साल मार्च की तुलना में इसमें एक फीसदी से ज्यादा की वृद्धि दर्ज की गई है। हालांकि यह स्तर मार्च 2022 के रिकॉर्ड से करीब 20 फीसदी कम है, लेकिन हालिया बढ़ोतरी यह संकेत देती है कि खाद्य कीमतें फिर से ऊपर की ओर बढ़ रही हैं। इस बढ़ोतरी की मुख्य वजह मध्य पूर्व में बढ़ते संघर्ष के कारण ऊर्जा कीमतों में आई तेजी है, जिसने उत्पादन से लेकर परिवहन तक पूरी खाद्य आपूर्ति श्रृंखला को महंगा बना दिया है।
अनाज की कीमतों में उछाल, गेहूं सबसे ज्यादा प्रभावित
रिपोर्ट के अनुसार गेहूं की वैश्विक कीमतों में 4.3 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसकी बड़ी वजह अमेरिका में सूखे के कारण उत्पादन की आशंकाएं और ऑस्ट्रेलिया में महंगे उर्वरकों के चलते संभावित बुवाई में कमी है। मक्के की कीमतों में 0.9 फीसदी की वृद्धि हुई है। महंगे तेल के कारण एथेनॉल (बायोफ्यूल) की मांग बढ़ने की संभावना मक्के की कीमतों को प्रभावित कर रही है, हालांकि वैश्विक उपलब्धता अभी पर्याप्त होने से दबाव सीमित है। जौ और ज्वार की कीमतों में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। हालांकि चावल की कीमतों में तीन फीसदी की गिरावट आई है, लेकिन इसे अस्थायी राहत माना जा रहा है।
वनस्पति तेल और चीनी में तेज बढ़ोतरी
मार्च में सबसे अधिक उछाल वनस्पति तेल की कीमतों में देखा गया। खाद्य तेल मूल्य सूचकांक 5.1 फीसदी बढ़कर 183.1 अंक पर पहुंच गया, जो पिछले साल के मुकाबले 13.2 फीसदी अधिक है। पाम ऑयल की कीमतें 2022 के बाद के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई हैं। कच्चे तेल की महंगाई के कारण बायोफ्यूल की मांग बढ़ रही है, जिससे सोयाबीन तेल महंगा हुआ है, जबकि ब्लैक सी क्षेत्र में आपूर्ति बाधित होने से सूरजमुखी तेल की कीमतें भी बढ़ी हैं। चीनी की कीमतों में 7.2 फीसदी की तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
डेयरी व मांस भी महंगे
रिपोर्ट के मुताबिक मार्च 2026 में डेयरी मूल्य सूचकांक 120.9 अंक रहा, जो फरवरी के मुकाबले 1.2 फीसदी अधिक है। यह जुलाई 2025 के बाद पहली बढ़ोतरी है, हालांकि यह अभी भी पिछले साल के स्तर से 18.7 फीसदी नीचे है। स्किम्ड मिल्क पाउडर, बटर और फुल क्रीम मिल्क पाउडर की कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज की गई। मांस की कीमतों में भी एक फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।
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