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प. एशिया: फारस की खाड़ी-होर्मुज में तेल रिसाव का खतरा; उपग्रह तस्वीरों में लावान द्वीप से कुवैत तट तक असर दिखा

अमर उजाला नेटवर्क, दुबई। Published by: Nirmal Kant Updated Thu, 23 Apr 2026 04:48 AM IST
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सार

उपग्रह तस्वीरों में फारस की खाड़ी और होर्मुज क्षेत्र में समुद्र में बड़े पैमाने पर तेल रिसाव के संकेत मिले हैं, जो ईरान के द्वीपों से लेकर कुवैत तट तक फैला नजर आया। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यह स्थिति समुद्री जीवों और तटीय इलाकों के लिए गंभीर खतरा बन सकती है। पढ़िए रिपोर्ट-

persian gulf strait of hormuz oil spill risk satellite images lavan island kuwait coast
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार

अमेरिका और ईरान से जुड़े सैन्य हमलों के बाद फारस की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य में कई बड़े तेल रिसाव अंतरिक्ष से दिखाई दिए हैं। उपग्रह तस्वीरों में ईरान के केश्म द्वीप, लावान द्वीप और कुवैत तट के पास समुद्र में फैला तेल साफ नजर आ रहा है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि स्थिति पर जल्द नियंत्रण नहीं पाया गया तो यह क्षेत्र समुद्री जैव विविधता, तटीय आबादी और पेयजल आपूर्ति के लिए बड़े पर्यावरणीय संकट में बदल सकता है।
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सीएनएन के अनुसार उपग्रह चित्रों ने न केवल तेल सुविधाओं और जहाजों पर हमलों से हुई क्षति को उजागर किया है बल्कि फारस की खाड़ी के नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र पर मंडरा रहे खतरे को भी सामने रखा है। इस क्षेत्र में फैला तेल तटीय समुदायों की आजीविका, मछली पालन, समुद्री जीवों और समुद्री जल को मीठा बनाने वाले संयंत्रों तक को प्रभावित कर सकता है। एक सैटेलाइट तस्वीर में ईरान के केश्म द्वीप के पास होर्मुज जलडमरूमध्य में पांच मील से अधिक क्षेत्र में फैला तेल देखा गया।
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संरक्षित शिदवर द्वीप की जैव विविधता पर खतरा
शिदवर द्वीप फारस की खाड़ी में स्थित एक कोरल द्वीप है। यह कछुओं, समुद्री पक्षियों और अन्य वन्यजीवों के लिए महत्वपूर्ण आवास माना जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि तेल रिसाव ऐसे क्षेत्रों में पहुंचने पर समुद्री जीवों के प्रजनन, भोजन श्रृंखला और पूरे पारिस्थितिकी तंत्र पर दीर्घकालिक असर डाल सकता है।

छह अप्रैल को कुछ उपग्रह तस्वीरों में कुवैत के तट के पास भी तेल फैला दिखाई दिया। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने कहा था कि उसने उसी दिन खाड़ी देशों की ईंधन और पेट्रोकेमिकल सुविधाओं को निशाना बनाया।

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जीव-जंतुओं समेत लाखों लोगों पर खतरा
डच शांति संगठन पैक्स के परियोजना प्रमुख विम ज्वाइनेनबर्ग ने चेतावनी दी कि इन तेल रिसावों का असर लाखों लोगों पर पड़ सकता है, खासकर ईरान के तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों पर। मछलियों के प्रदूषित होने से मछुआरों की आय और खाद्य सुरक्षा दोनों प्रभावित हो सकती हैं। यह तेल समुद्री कछुओं, डॉल्फिन और व्हेल जैसे जीवों के लिए भी गंभीर खतरा है। ये जीव या तो तेल निगल सकते हैं या उसमें फंस सकते हैं। इसके अलावा समुद्री जल को साफ कर पीने योग्य बनाने वाले डिसैलिनेशन प्लांट्स भी प्रभावित हो सकते हैं।

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