एक दशक पहले जब चीन ने गूगल, फेसबुक और यूट्यूब जैसी नामी कंपनियों पर रोक लगाई थी, तब उसने शायद ही सोचा होगा कि एक दिन ऐसा ही हश्र उसे भी झेलना पड़ेगा। पिछले साल अमेरिका ने 5जी कंपनी हुवावे और अब भारत ने 59 चीनी मोबाइल एप बंद करके ड्रैगन को उसी के अंदाज में सख्त जवाब दिया है। साइबर जानकारों का कहना है कि चीन वर्षों से कई देशों के साथ ऐसा करते आया है। अब उसका वास्तविकता से सामना होने लगा है।
साइबरस्पेस... जैसा बोया वैसा काटने पर मजबूर हुआ चीन
अलीबाबा से लेकर टिकटॉक को हुआ बड़ा नुकसान
भारत के सख्त कदमों से चीन की अलीबाबा, टेंसेंट व बायडू जैसी तकनीकी कंपनियों को झटका लगा है। सबसे ज्यादा नुकसान बाइटडांस की टिकटॉक को होगा। सेंसर टावर के अनुसार प्रतिबंध लगने तक भारत में टिकटॉक के 61 करोड़ यूजर्स हो गए थे।
सुरक्षा पर कदम उठातीं सरकारें
बढ़ते डिजिटल स्पेस के कारण सुरक्षा को खतरा भी पैदा हुआ है। ऐसे में कई देश कदम उठाने लगे हैं। हाल में यूरोपीय यूनियन ने एपल व गूगल को स्थानीय दिशानिर्देशों का पालन करने को बाध्य किया है।
भारत से बाजार छिनना बड़ा झटका
भारत चीन से निर्यात का चार गुना आयात करता है। लेकिन मोदी सरकार ने बीजिंग के लिए खास महत्व केे क्षेत्र पर को सीधी चोट पहुंचाई है। इसकी चीन समेत अन्य देशों में भी काफी चर्चा हो रही है। भारत जैसे बड़ी आबादी वाले देश से बाजार छिनना चीनी टेक कंपनियों के लिए बड़ा झटका है।
इन कंपनियों को घर में भी नए यूजर्स नहीं मिल रहे हैं। पश्चिमी देशों में भी कोरोना के बाद चीन के खिलाफ माहौल है। ऐसा नहीं कि भारत ने एक झटके में चीनी एप को बाहर किया है। पिछले साल भी सरकार व कोर्ट इन पर सुरक्षा को लेकर चेताते रहे थे। टिकटॉक को पिछले साल ही पोर्नोग्राफी पर एप स्टोरों से हटा दिया गया था।
अमेरिका और यूरोप में भी टूटा जाल बुनने का चीनी सपना
चीनी टेक कंपनियों का अमेरिका व यूरोप में कारोबारी जाल फैलाने का सपना टूट सकता है। कई पश्चिमी देशों में बाइटडांस, कंप्यूटर चिप और एआई कंपनियों के लिए राह आसान नहीं है। अमेरिका स्मार्टफोन और टेलीकॉम उपकरण निर्माता हुवावे को तो जासूसी के शक में बाहर का रास्ता ही दिखा चुका है।