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परमाणु और होर्मुज पर अटकी डील: ईरान ने अमेरिका को सौंपा 14-प्वाइंट का शांति प्लान, लेकिन ट्रंप का रुख सख्त
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन / तेहरान
Published by: Pavan
Updated Sun, 03 May 2026 07:27 PM IST
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सार
अमेरिका-ईरान के बीच भले ही युद्धविराम लागू है, लेकिन हालात पूरी तरह शांत नहीं हैं। दोनों देश एक-दूसरे के जहाजों को रोकने और कार्रवाई करने में लगे हैं, जिससे होर्मुज में तनाव बना हुआ है। ईरान का 14-प्वाइंट प्रस्ताव शांति की दिशा में एक कदम जरूर है, लेकिन ट्रंप इसे मानेंगे या नहीं- यह अभी भी सबसे बड़ा सवाल बना हुआ है।
जंग खत्म करने के लिए ईरान का प्रस्ताव
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे तनाव को खत्म करने के लिए ईरान ने 14 सूत्रीय नया शांति प्रस्ताव दिया है। यह प्रस्ताव ऐसे समय आया है जब युद्धविराम तो लागू है, लेकिन दोनों देशों के बीच भरोसे की कमी अभी भी सबसे बड़ी बाधा बनी हुई है। वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि वह इस प्रस्ताव का अध्ययन कर रहे हैं, लेकिन यह साफ नहीं है कि वह इसे स्वीकार करेंगे या नहीं। यह प्रस्ताव पाकिस्तान के जरिए अमेरिका तक पहुंचाया गया, जिसने पहले भी दोनों देशों के बीच युद्धविराम कराने में मध्यस्थ की भूमिका निभाई थी।
यह भी पढ़ें- इस्राइल का बड़ा रक्षा सौदा: अमेरिका से खरीदेगा लड़ाकू विमान, अरबों डॉलर की डील को मंजूरी
क्या है ईरान का 14-प्वाइंट प्रस्ताव?
ईरान का कहना है कि वह केवल युद्धविराम नहीं बल्कि पूरी तरह से युद्ध खत्म करना चाहता है। इसके लिए उसने 30 दिनों के भीतर सभी मुद्दों का समाधान करने की बात रखी है। इस प्रस्ताव में कुछ प्रमुख मांगें शामिल हैं-
कहां अटकी है बातचीत?
सबसे बड़ा विवाद परमाणु कार्यक्रम को लेकर है। ट्रंप ने साफ कर दिया है कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम रेड लाइन है, जबकि ईरान इसे अपना अधिकार बता रहा है। दूसरा बड़ा मुद्दा है होर्मुज जलडमरूमध्य, जहां से दुनिया के करीब 20% तेल और गैस का व्यापार होता है। ईरान ने यहां प्रभावी नियंत्रण बना रखा है, जबकि अमेरिका चाहता है कि यह रास्ता पूरी तरह खुला रहे। दोनों देशों के बीच अविश्वास भी बहुत गहरा है। विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान को अमेरिका पर भरोसा नहीं है, खासकर पहले हुए समझौतों के अनुभव के कारण।
क्या है अमेरिका का रुख?
ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगर ईरान गलत हरकत करता है तो अमेरिका फिर से हमले शुरू कर सकता है। उन्होंने यह भी दावा किया कि युद्ध और नाकेबंदी के कारण ईरान कमजोर हो चुका है और समझौते के लिए दबाव में है। हालांकि, कुछ विशेषज्ञ मानते हैं कि ट्रंप इस प्रस्ताव को आसानी से स्वीकार नहीं करेंगे। उनका कहना है कि दोनों देशों के बीच अभी भी बड़े मुद्दों पर काफी दूरी है।
यह भी पढ़ें- क्या सामने आएगा एलियंस का सच?: ट्रंप का दावा- जल्द आएंगी UFO फाइल्स, एलियन रहस्य पर फिर अटकलों का दौर शुरू
क्या हैं जमीनी हालात?
8 अप्रैल से लागू युद्धविराम के बावजूद हालात पूरी तरह शांत नहीं हैं। दोनों देश एक-दूसरे के जहाजों को रोकने और कार्रवाई करने में लगे हैं, जिससे होर्मुज में तनाव बना हुआ है। ईरान की सेना आईआरजीसी ने भी कहा है कि वह पूरी तरह तैयार है और किसी भी समय संघर्ष फिर शुरू हो सकता है। इस टकराव का असर पूरी दुनिया पर पड़ा है। युद्ध और नाकेबंदी के कारण तेल की कीमतें तेजी से बढ़ गई हैं, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था प्रभावित हो रही है।
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क्या है ईरान का 14-प्वाइंट प्रस्ताव?
ईरान का कहना है कि वह केवल युद्धविराम नहीं बल्कि पूरी तरह से युद्ध खत्म करना चाहता है। इसके लिए उसने 30 दिनों के भीतर सभी मुद्दों का समाधान करने की बात रखी है। इस प्रस्ताव में कुछ प्रमुख मांगें शामिल हैं-
- अमेरिका और उसके सहयोगियों से भविष्य में हमला न करने की गारंटी
- ईरान के आसपास से अमेरिकी सेना की वापसी
- ईरान की जमी हुई अरबों डॉलर की संपत्ति को वापस करना
- ईरान पर से सभी आर्थिक प्रतिबंध हटाना
- युद्ध से हुए नुकसान की भरपाई (रेपरेशन)
- लेबनान सहित पूरे क्षेत्र में संघर्ष खत्म करना
- होर्मुज जलडमरूमध्य के लिए नया नियंत्रण तंत्र
कहां अटकी है बातचीत?
सबसे बड़ा विवाद परमाणु कार्यक्रम को लेकर है। ट्रंप ने साफ कर दिया है कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम रेड लाइन है, जबकि ईरान इसे अपना अधिकार बता रहा है। दूसरा बड़ा मुद्दा है होर्मुज जलडमरूमध्य, जहां से दुनिया के करीब 20% तेल और गैस का व्यापार होता है। ईरान ने यहां प्रभावी नियंत्रण बना रखा है, जबकि अमेरिका चाहता है कि यह रास्ता पूरी तरह खुला रहे। दोनों देशों के बीच अविश्वास भी बहुत गहरा है। विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान को अमेरिका पर भरोसा नहीं है, खासकर पहले हुए समझौतों के अनुभव के कारण।
क्या है अमेरिका का रुख?
ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगर ईरान गलत हरकत करता है तो अमेरिका फिर से हमले शुरू कर सकता है। उन्होंने यह भी दावा किया कि युद्ध और नाकेबंदी के कारण ईरान कमजोर हो चुका है और समझौते के लिए दबाव में है। हालांकि, कुछ विशेषज्ञ मानते हैं कि ट्रंप इस प्रस्ताव को आसानी से स्वीकार नहीं करेंगे। उनका कहना है कि दोनों देशों के बीच अभी भी बड़े मुद्दों पर काफी दूरी है।
यह भी पढ़ें- क्या सामने आएगा एलियंस का सच?: ट्रंप का दावा- जल्द आएंगी UFO फाइल्स, एलियन रहस्य पर फिर अटकलों का दौर शुरू
क्या हैं जमीनी हालात?
8 अप्रैल से लागू युद्धविराम के बावजूद हालात पूरी तरह शांत नहीं हैं। दोनों देश एक-दूसरे के जहाजों को रोकने और कार्रवाई करने में लगे हैं, जिससे होर्मुज में तनाव बना हुआ है। ईरान की सेना आईआरजीसी ने भी कहा है कि वह पूरी तरह तैयार है और किसी भी समय संघर्ष फिर शुरू हो सकता है। इस टकराव का असर पूरी दुनिया पर पड़ा है। युद्ध और नाकेबंदी के कारण तेल की कीमतें तेजी से बढ़ गई हैं, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था प्रभावित हो रही है।
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