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NASA: नासा के शक्तिशाली एआई टूल ने खोजे 100 से ज्यादा छिपे ग्रह, टेस मिशन के पहले 31 नए एक्सोप्लैनेट की पुष्टि
अमर उजाला नेटवर्क, वारविक (यूके)।
Published by: Devesh Tripathi
Updated Mon, 04 May 2026 04:37 AM IST
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सार
शोधकर्ताओं ने उन ग्रहों पर विशेष ध्यान दिया जो, अपने तारों के बहुत करीब परिक्रमा करते हैं और 16 दिनों से कम समय में एक चक्कर पूरा कर लेते हैं। स्टडी की प्रमुख लेखिका डॉ. मरीना लाफार्गा मैग्रो के अनुसार, रेवन पाइपलाइन की मदद से 118 नए ग्रहों की पुष्टि की गई और 2,000 से अधिक उच्च गुणवत्ता वाले संभावित ग्रहों की पहचान हुई, जिनमें 1,000 नए हैं। नई खोज में कुछ खास प्रकार के ग्रह शामिल हैं।
नासा ने खोजे एक्सोप्लैनेट
- फोटो : अमर उजाला प्रिंट
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विस्तार
खगोलविदों ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित नए शक्तिशाली टूल रेवन की मदद से नासा के ट्रांजिटिंग एक्सोप्लैनेट सर्वे सैटेलाइट (टीईएसएस-टेस) मिशन के डाटा में 100 से अधिक एक्सोप्लैनेट यानी सौर मंडल के बाहर के ग्रहों की पुष्टि की है। इनमें 31 पूरी तरह नए ग्रह शामिल हैं।
इसमें ऐसे दुर्लभ और चरम ग्रह भी मिले हैं, जो अपने तारों के बेहद करीब अत्यंत तेज गति से चक्कर लगाते हैं या फिर उस रहस्यमय क्षेत्र नेप्च्यूनियन डेजर्ट में मौजूद हैं, जहां ग्रहों का मिलना बेहद कम माना जाता है। नेप्च्यूनियन डेजर्ट अर्थात अंतरिक्ष का वह क्षेत्र जहां नेप्च्यून जैसे आकार के ग्रह (मध्यम आकार के गैस ग्रह) बहुत कम पाए जाते हैं, खासकर तब जब वे अपने तारे के बेहद करीब परिक्रमा करते हों।
यह अध्ययन यूनिवर्सिटी ऑफ वारविक के खगोलविदों ने किया है। इसके निष्कर्ष मंथली नोटिसेस ऑफ द रॉयल एस्ट्रोनॉमिकल सोसाइटी (एमएनआरएएस) जर्नल में प्रकाशित हुए हैं। शोध टीम ने नासा के टेस मिशन के पहले चार वर्षों के दौरान एकत्र किए गए 22 लाख से अधिक तारों के डाटा का विश्लेषण किया।
झूठे संकेत भी पहचानता है रेवन
आधुनिक अंतरिक्ष मिशन हजारों संभावित ग्रहों के संकेत दर्ज करते हैं, लेकिन असली ग्रह और झूठे संकेतों में अंतर करना चुनौतीपूर्ण होता है। रेवन इसी समस्या को हल करता है। इसे लाखों सिमुलेटेड डाटा पर प्रशिक्षित किया गया है, ताकि यह पहचान सके कि चमक में कमी का कारण वास्तव में कोई ग्रह है या अन्य खगोलीय घटना।
खोज में कुछ बेहद खास प्रकार के ग्रह हैं शामिल
शोधकर्ताओं ने उन ग्रहों पर विशेष ध्यान दिया जो, अपने तारों के बहुत करीब परिक्रमा करते हैं और 16 दिनों से कम समय में एक चक्कर पूरा कर लेते हैं। स्टडी की प्रमुख लेखिका डॉ. मरीना लाफार्गा मैग्रो के अनुसार, रेवन पाइपलाइन की मदद से 118 नए ग्रहों की पुष्टि की गई और 2,000 से अधिक उच्च गुणवत्ता वाले संभावित ग्रहों की पहचान हुई, जिनमें 1,000 नए हैं। नई खोज में कुछ खास प्रकार के ग्रह शामिल हैं। इनमें अल्ट्रा-शॉर्ट पीरियड प्लैनेट भी हैं, जो अपने तारे का चक्कर 24 घंटे से भी कम समय में पूरा कर लेते हैं। नेप्च्यूनियन डेजर्ट में पाए गए ग्रह भी शामिल हैं।
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इसमें ऐसे दुर्लभ और चरम ग्रह भी मिले हैं, जो अपने तारों के बेहद करीब अत्यंत तेज गति से चक्कर लगाते हैं या फिर उस रहस्यमय क्षेत्र नेप्च्यूनियन डेजर्ट में मौजूद हैं, जहां ग्रहों का मिलना बेहद कम माना जाता है। नेप्च्यूनियन डेजर्ट अर्थात अंतरिक्ष का वह क्षेत्र जहां नेप्च्यून जैसे आकार के ग्रह (मध्यम आकार के गैस ग्रह) बहुत कम पाए जाते हैं, खासकर तब जब वे अपने तारे के बेहद करीब परिक्रमा करते हों।
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यह अध्ययन यूनिवर्सिटी ऑफ वारविक के खगोलविदों ने किया है। इसके निष्कर्ष मंथली नोटिसेस ऑफ द रॉयल एस्ट्रोनॉमिकल सोसाइटी (एमएनआरएएस) जर्नल में प्रकाशित हुए हैं। शोध टीम ने नासा के टेस मिशन के पहले चार वर्षों के दौरान एकत्र किए गए 22 लाख से अधिक तारों के डाटा का विश्लेषण किया।
झूठे संकेत भी पहचानता है रेवन
आधुनिक अंतरिक्ष मिशन हजारों संभावित ग्रहों के संकेत दर्ज करते हैं, लेकिन असली ग्रह और झूठे संकेतों में अंतर करना चुनौतीपूर्ण होता है। रेवन इसी समस्या को हल करता है। इसे लाखों सिमुलेटेड डाटा पर प्रशिक्षित किया गया है, ताकि यह पहचान सके कि चमक में कमी का कारण वास्तव में कोई ग्रह है या अन्य खगोलीय घटना।
खोज में कुछ बेहद खास प्रकार के ग्रह हैं शामिल
शोधकर्ताओं ने उन ग्रहों पर विशेष ध्यान दिया जो, अपने तारों के बहुत करीब परिक्रमा करते हैं और 16 दिनों से कम समय में एक चक्कर पूरा कर लेते हैं। स्टडी की प्रमुख लेखिका डॉ. मरीना लाफार्गा मैग्रो के अनुसार, रेवन पाइपलाइन की मदद से 118 नए ग्रहों की पुष्टि की गई और 2,000 से अधिक उच्च गुणवत्ता वाले संभावित ग्रहों की पहचान हुई, जिनमें 1,000 नए हैं। नई खोज में कुछ खास प्रकार के ग्रह शामिल हैं। इनमें अल्ट्रा-शॉर्ट पीरियड प्लैनेट भी हैं, जो अपने तारे का चक्कर 24 घंटे से भी कम समय में पूरा कर लेते हैं। नेप्च्यूनियन डेजर्ट में पाए गए ग्रह भी शामिल हैं।
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