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'होर्मुज से रिकॉर्ड तेल प्रवाह': राष्ट्रपति ट्रंप का बड़ा दावा, कहा- घट रही हैं कीमतें; दुनिया अब सुरक्षित
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला।
Published by: राकेश कुमार
Updated Tue, 23 Jun 2026 05:46 PM IST
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सार
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य से कल रिकॉर्ड 19 मिलियन बैरल तेल का सुरक्षित प्रवाह हुआ है। इसके कारण वैश्विक बाजार में तेल की कीमतें तेजी से गिर रही हैं, जिससे दुनिया अब पहले से कहीं अधिक सुरक्षित हो गई है। उन्होंने औ क्या-क्या कहा है? जानिए...
डोनाल्ड ट्रंप, अमेरिकी राष्ट्रपति
- फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर एक बड़ा और चौंकाने वाला दावा किया है। उनके इस बयान ने वैश्विक तेल बाजार और अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। ट्रंप ने सीधे तौर पर तेल की बढ़ती आपूर्ति को वैश्विक सुरक्षा से जोड़कर पेश किया है।
तेल बाजार में नया रिकॉर्ड
ट्रंप ने अपने पोस्ट में लिखा कि कल होर्मुज जलडमरूमध्य से रिकॉर्ड 19 मिलियन बैरल तेल का प्रवाह हुआ। उनके मुताबिक, यह अब तक का सबसे बड़ा ऑल-टाइम रिकॉर्ड है। इस भारी आपूर्ति के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से नीचे आ रही हैं। कच्चे तेल की कीमतों में आ रही इस गिरावट को अमेरिकी प्रशासन अपनी बड़ी कामयाबी के रूप में देख रहा है। ट्रंप का मानना है कि तेल की कीमतों का कम होना वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए एक बेहद सकारात्मक संकेत है।
अभी होर्मुज में ही तैनात रहेंगे अमेरिकी युद्धपोत: ट्रंप
ट्रंप ने मीडिया पर निशाना साधते हुए कहा कि तमाम झूठे बयानों के बावजूद ईरान भविष्य में हमेशा के लिए उच्चतम स्तर के परमाणु निरीक्षण के लिए पूरी तरह सहमत हो गया है। ट्रंप के मुताबिक, यह कदम परमाणु ईमानदारी सुनिश्चित करेगा और अगर ईरान इस पर सहमत नहीं होता, तो आगे कोई बातचीत नहीं होती।
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ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी युद्धपोत अभी भी वहीं तैनात रहेंगे ताकि जरूरत पड़ने पर नाकेबंदी फिर से लागू की जा सके, जिसकी संभावना फिलहाल बेहद कम है। इसके अलावा, अमेरिकी ट्रेजरी की ओर से जारी किया जा रहा पैसा एस्क्रो अकाउंट में रहेगा, जिसका नियंत्रण अमेरिका के पास होगा। इस पैसे का इस्तेमाल केवल अमेरिका से मक्का, गेहूं और सोयाबीन जैसे खाद्य और चिकित्सा सामान खरीदने के लिए किया जाएगा, जिससे अमेरिकी किसानों को सीधा फायदा होगा। ट्रंप ने इसे ईरान का मानवीय संकट बताते हुए समय रहते मदद करने की बात कही है।
बता दें कि पिछले दिनों अमेरिकी वित्त विभाग ने ईरान को बड़ी राहत देते हुए एक 'जनरल लाइसेंस' जारी किया है। इस नए आदेश के तहत ईरान को आगामी 21 अगस्त तक कच्चे तेल, पेट्रोलियम उत्पादों और पेट्रोकेमिकल उत्पादों के उत्पादन, डिलीवरी और बिक्री करने की आधिकारिक मंजूरी दे दी गई है।
यह भी पढ़ें: FATF: आतंकवाद-रोधी प्रतिबंधों में बदलाव, मानवीय सहायता पहुंचाने का रास्ता होगा आसान; जानें क्यों हुआ परिवर्तन
तनाव कम करने में मिलेगी मदद
अमेरिका की ओर से ईरान पर लगाए गए कड़े प्रतिबंधों के बीच इस फैसले को वैश्विक तेल बाजार के लिए एक बड़ा टर्निंग पॉइंट माना जा रहा है। यह कदम स्विट्जरलैंड में अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बेहद सकारात्मक और परिणामोन्मुखी बातचीत के बाद उठाया गया है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों देशों के बीच हुए इस समझौते से वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों को स्थिर करने और खाड़ी क्षेत्र में भू-राजनीतिक तनाव को कम करने में बड़ी मदद मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
होर्मुज और परमाणु निरीक्षकों पर बनी सहमति: स्कॉट बेसेंट
इस बड़े फैसले की जानकारी खुद अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने सोशल मीडिया के जरिए दी है। बेसेंट ने एक पोस्ट में बताया कि यह छूट एक विशेष समझौते और शर्तों के तहत दी गई है। स्विट्जरलैंड में चल रही बातचीत के अनुरूप, ईरान दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य में मुक्त और खुला पारगमन यानी फ्री ट्रांजिट सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हुआ है। इसके साथ ही, ईरान ने अपने देश में अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के निरीक्षकों को जांच और निगरानी के लिए प्रवेश की अनुमति देने पर भी सहमति जताई है। इन दो महत्वपूर्ण शर्तों को मानने के बाद ही अमेरिका ने ईरान को यह 60 दिनों की अस्थाई राहत दी है।
तेल बाजार में नया रिकॉर्ड
ट्रंप ने अपने पोस्ट में लिखा कि कल होर्मुज जलडमरूमध्य से रिकॉर्ड 19 मिलियन बैरल तेल का प्रवाह हुआ। उनके मुताबिक, यह अब तक का सबसे बड़ा ऑल-टाइम रिकॉर्ड है। इस भारी आपूर्ति के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से नीचे आ रही हैं। कच्चे तेल की कीमतों में आ रही इस गिरावट को अमेरिकी प्रशासन अपनी बड़ी कामयाबी के रूप में देख रहा है। ट्रंप का मानना है कि तेल की कीमतों का कम होना वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए एक बेहद सकारात्मक संकेत है।
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अभी होर्मुज में ही तैनात रहेंगे अमेरिकी युद्धपोत: ट्रंप
ट्रंप ने मीडिया पर निशाना साधते हुए कहा कि तमाम झूठे बयानों के बावजूद ईरान भविष्य में हमेशा के लिए उच्चतम स्तर के परमाणु निरीक्षण के लिए पूरी तरह सहमत हो गया है। ट्रंप के मुताबिक, यह कदम परमाणु ईमानदारी सुनिश्चित करेगा और अगर ईरान इस पर सहमत नहीं होता, तो आगे कोई बातचीत नहीं होती।
ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी युद्धपोत अभी भी वहीं तैनात रहेंगे ताकि जरूरत पड़ने पर नाकेबंदी फिर से लागू की जा सके, जिसकी संभावना फिलहाल बेहद कम है। इसके अलावा, अमेरिकी ट्रेजरी की ओर से जारी किया जा रहा पैसा एस्क्रो अकाउंट में रहेगा, जिसका नियंत्रण अमेरिका के पास होगा। इस पैसे का इस्तेमाल केवल अमेरिका से मक्का, गेहूं और सोयाबीन जैसे खाद्य और चिकित्सा सामान खरीदने के लिए किया जाएगा, जिससे अमेरिकी किसानों को सीधा फायदा होगा। ट्रंप ने इसे ईरान का मानवीय संकट बताते हुए समय रहते मदद करने की बात कही है।
बता दें कि पिछले दिनों अमेरिकी वित्त विभाग ने ईरान को बड़ी राहत देते हुए एक 'जनरल लाइसेंस' जारी किया है। इस नए आदेश के तहत ईरान को आगामी 21 अगस्त तक कच्चे तेल, पेट्रोलियम उत्पादों और पेट्रोकेमिकल उत्पादों के उत्पादन, डिलीवरी और बिक्री करने की आधिकारिक मंजूरी दे दी गई है।
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तनाव कम करने में मिलेगी मदद
अमेरिका की ओर से ईरान पर लगाए गए कड़े प्रतिबंधों के बीच इस फैसले को वैश्विक तेल बाजार के लिए एक बड़ा टर्निंग पॉइंट माना जा रहा है। यह कदम स्विट्जरलैंड में अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बेहद सकारात्मक और परिणामोन्मुखी बातचीत के बाद उठाया गया है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों देशों के बीच हुए इस समझौते से वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों को स्थिर करने और खाड़ी क्षेत्र में भू-राजनीतिक तनाव को कम करने में बड़ी मदद मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
होर्मुज और परमाणु निरीक्षकों पर बनी सहमति: स्कॉट बेसेंट
इस बड़े फैसले की जानकारी खुद अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने सोशल मीडिया के जरिए दी है। बेसेंट ने एक पोस्ट में बताया कि यह छूट एक विशेष समझौते और शर्तों के तहत दी गई है। स्विट्जरलैंड में चल रही बातचीत के अनुरूप, ईरान दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य में मुक्त और खुला पारगमन यानी फ्री ट्रांजिट सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हुआ है। इसके साथ ही, ईरान ने अपने देश में अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के निरीक्षकों को जांच और निगरानी के लिए प्रवेश की अनुमति देने पर भी सहमति जताई है। इन दो महत्वपूर्ण शर्तों को मानने के बाद ही अमेरिका ने ईरान को यह 60 दिनों की अस्थाई राहत दी है।