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Iran: ईरान को 300 अरब डॉलर कौन देगा? मार्को रुबियो के दौरे को लेकर खाड़ी देशों की बढ़ी चिंता

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, Published by: नितिन गौतम Updated Tue, 23 Jun 2026 10:25 AM IST
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सार

ईरान के साथ शांति समझौते की पहले दौर की वार्ता के बाद अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो खाड़ी देशों के दौरे पर रवाना हुए हैं। इस दौरे को लेकर खाड़ी देशों में एक चिंता का भाव है और ये इस वजह से है कि समझौते के तहत ईरान को दिए जाने वाले 300 अरब डॉलर कौन देगा? 

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मार्को रुबियो - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते ने खाड़ी देशों को चिंता में डाल दिया है। दरअसल खाड़ी देशों में इस समय चर्चा का विषय बना हुआ है कि समझौते के तहत ईरान को कितना पैसा मिलने वाला है और वो पैसा कौन देगा? अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो तीन दिवसीय दौरे पर पश्चिम एशिया पहुंचने वाले हैं। जहां वे सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन और कुवैत के नेताओं से मुलाकात करेंगे। अमेरिकी प्रशासन पश्चिम एशिया में अपने सहयोगी देशों को यह यकीन दिलाने की कोशिश कर रहा है कि ईरान के साथ हुआ समझौता उनके हित में है। 


हालांकि खाड़ी देशों की चिंता बनी हुई है। अधिकांश देशों ने अमेरिका, इस्राइल और ईरान के बीच संघर्ष को समाप्त करने की कोशिशों का स्वागत किया है। हालांकि, उनकी चिंता इस बात को लेकर है कि अगर बातचीत सफल होती है तो ईरान को क्या-क्या रियायतें मिल सकती हैं और क्या यह समझौता ईरान की सैन्य महत्वाकांक्षाओं पर रोक लगाने में सफल हो सकेगा या नहीं। 
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खाड़ी देशों की चिंता की वजह क्या है?
  • सबसे अधिक चर्चा ईरान के पुनर्निर्माण और आर्थिक विकास के लिए दिए जाने वाले 300 अरब डॉलर के पैकेज को लेकर हो रही है। शांति समझौते के ज्ञापन में कहा गया है कि अमेरिका क्षेत्रीय साझेदारों के साथ मिलकर ईरान के पुनर्निर्माण और आर्थिक विकास के लिए कम से कम 300 अरब डॉलर देगा। इस योजना को लागू करने की रूपरेखा अंतिम समझौते के तहत अगले 60 दिनों में तय की जाएगी।
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  • खाड़ी देशों को आशंका है कि इतनी बड़ी राशि ईरान को युद्ध से हुए नुकसान की भरपाई करने के साथ-साथ उसकी सैन्य क्षमता और क्षेत्रीय प्रभाव बढ़ाने में भी मदद कर सकती है।
  • इसके अलावा, कई देशों को इस बात पर भी आपत्ति है कि हाल ही में हुए समझौता ज्ञापन में ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम का सीधे तौर पर कोई उल्लेख नहीं किया गया है।
  • ये चिंताएं उन देशों के लिए और भी ज्यादा अहम हैं जहां अमेरिकी सैन्य अड्डे मौजूद हैं। सऊदी अरब, यूएई, कुवैत, बहरीन और कतर, अमेरिकी सुरक्षा व्यवस्था के प्रमुख साझेदार हैं। ईरान के साथ हुए संघर्ष के दौरान इन देशों को भी ईरानी मिसाइलों और ड्रोन हमलों का सामना करना पड़ा था, जिनमें नागरिक ढांचे को भी निशाना बनाया गया था।

वॉशिंगटन से जवाब चाहते हैं सहयोगी देश
रुबियो का यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब खाड़ी देशों के नेता अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते का समर्थन कर रहे हैं, लेकिन वे यह भी जानना चाहते हैं कि वॉशिंगटन आखिर ईरान को क्या देने जा रहा है और बदले में तेहरान से क्या मिलेगा? अभी तक किसी भी खाड़ी देश ने ईरान को आर्थिक मदद देने की सहमति नहीं दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी ईरान को आर्थिक मदद नहीं देने की बात कह चुके हैं। शांति समझौते के तहत अमेरिका, ईरान की जब्त संपत्तियों को भी जारी करेगा। हालांकि ईरान इस पैसे का इस्तेमाल सिर्फ मानवीय और कृषि जरूरतों के लिए ही कर पाएगा। 

होर्मुज जलडमरूमध्य भी होगी बात
रुबियो की बातचीत केवल आर्थिक मुद्दों तक सीमित नहीं रहेगी। उनके दौरे का एक प्रमुख विषय होर्मुज जलडमरूमध्य भी होगा, जो दुनिया के तेल और गैस आपूर्ति मार्गों में सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों में से एक माना जाता है। ईरान संघर्ष के दौरान यह मार्ग तनाव का केंद्र बन गया था और अब तक यहां समुद्री यातायात पूरी तरह सामान्य नहीं हो पाया है। विश्लेषण कंपनी क्प्लर के अनुसार, बीते सप्ताह में इस जलडमरूमध्य से 71 जहाज गुजरे, जबकि संघर्ष से पहले प्रतिदिन 100 से 131 जहाजों का आवागमन सामान्य बात थी।

मौजूदा समझौता ज्ञापन के तहत 60 दिन की वार्ता अवधि में ईरान इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों पर कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लगा सकता। हालांकि, ईरानी अधिकारियों ने संकेत दिया है कि वार्ता अवधि समाप्त होने के बाद इस विकल्प पर विचार किया जा सकता है।
 
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