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PoK: पाकिस्तानी सेना के खिलाफ सड़कों पर उतरे स्कूली बच्चे और महिलाएं, भड़का जनाक्रोश; नारे लगाकर मांगी आजादी
आशुतोष भाटिया, नई दिल्ली/मुजफ्फरराबाद।
Published by: Devesh Tripathi
Updated Tue, 23 Jun 2026 04:14 AM IST
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सार
पीओके में प्रदर्शनकारियों पर पाकिस्तानी सेना द्वारा बर्बरता के बाद से ही कई इलाकों में खुलकर सड़कों पर उतर आए हैं। पाकिस्तानी सेना की हिंसक कार्रवाई के खिलाफ भारत ने भी अपना विरोध वैश्विक मंच पर दर्ज कराया है। वहीं, पीओके में अब लोग पाकिस्तान सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर आजादी की मांग कर रहे हैं।
पीओके में प्रदर्शन जारी
- फोटो : अमर उजाला प्रिंट
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विस्तार
पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में सैन्य दमन के खिलाफ जारी जनांदोलन में 10-12 साल के स्कूली बच्चे और महिलाएं भी भारी संख्या में सड़कों पर उतर आए हैं। प्रदर्शनकारी खुलेआम आजादी के नारे लगा रहे हैं और पाकिस्तान सरकार की कड़े शब्दों में निंदा कर रहे हैं।
राजनीतिक दमन और आर्थिक तंगहाली के खिलाफ गुस्सा अब बच्चों तक पहुंच चुका है।
रावलकोट के ईदगाह मैदान में पिछले 11 दिनों से 70,000 से अधिक प्रदर्शनकारियों का धरना भी जारी है। वहीं सुधनोती जिले के तरार खेल में छोटे-छोटे स्कूली बच्चों ने सार्वजनिक चौकों पर एकत्र होकर स्वतंत्रता के समर्थन में नारेबाजी की। मंधोल में सैकड़ों महिलाओं ने मार्च निकालकर पाकिस्तानी सरकार और सेना को अवैध कब्जाधारी करार दिया। रावलकोट में प्रदर्शन कर रहे बच्चों के हाथों में तख्तियां थीं, जिन पर-सेना बाहर जाओ जैसे नारे लिखे थे।
सेना को सीधी चेतावनी
आंदोलन की अगुवाई कर रही अवामी एक्शन कमेटी ने पाकिस्तानी सरकार को अपनी 38 सूत्रीय मांगों का चार्टर स्वीकार करने के लिए 23 जून तक का अल्टीमेटम दिया है। ईदगाह मैदान में हजारों लोगों की भीड़ को संबोधित करते हुए संगठन के नेता सरदार अमान खान ने बेहद तीखा और भावुक भाषण दिया। उन्होंने पाकिस्तानी सेना को सीधे तौर पर चेतावनी देते हुए कहा कि अगर उसने दमन जारी रखा, तो पूरे सैन्य ढांचे को पीओके से बाहर खदेड़ दिया जाएगा।
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लंदन में भी हुए थे प्रदर्शन
पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में मानवाधिकार उल्लंघनों और प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग के विरोध में हजारों ब्रिटिश कश्मीरी लंदन में ब्रिटिश संसद के बाहर एकत्र हुए। प्रदर्शनकारियों ने नागरिकों की मौत, घायलों और महिलाओं के साथ कथित दुर्व्यवहार पर चिंता जताते हुए अंतरराष्ट्रीय जांच तथा जवाबदेही की मांग की। उनका कहना था कि क्षेत्र के लोग लंबे समय से आर्थिक राहत, सस्ती बिजली, बेहतर प्रशासन और बुनियादी अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
राजनीतिक दमन और आर्थिक तंगहाली के खिलाफ गुस्सा अब बच्चों तक पहुंच चुका है।
रावलकोट के ईदगाह मैदान में पिछले 11 दिनों से 70,000 से अधिक प्रदर्शनकारियों का धरना भी जारी है। वहीं सुधनोती जिले के तरार खेल में छोटे-छोटे स्कूली बच्चों ने सार्वजनिक चौकों पर एकत्र होकर स्वतंत्रता के समर्थन में नारेबाजी की। मंधोल में सैकड़ों महिलाओं ने मार्च निकालकर पाकिस्तानी सरकार और सेना को अवैध कब्जाधारी करार दिया। रावलकोट में प्रदर्शन कर रहे बच्चों के हाथों में तख्तियां थीं, जिन पर-सेना बाहर जाओ जैसे नारे लिखे थे।
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सेना को सीधी चेतावनी
आंदोलन की अगुवाई कर रही अवामी एक्शन कमेटी ने पाकिस्तानी सरकार को अपनी 38 सूत्रीय मांगों का चार्टर स्वीकार करने के लिए 23 जून तक का अल्टीमेटम दिया है। ईदगाह मैदान में हजारों लोगों की भीड़ को संबोधित करते हुए संगठन के नेता सरदार अमान खान ने बेहद तीखा और भावुक भाषण दिया। उन्होंने पाकिस्तानी सेना को सीधे तौर पर चेतावनी देते हुए कहा कि अगर उसने दमन जारी रखा, तो पूरे सैन्य ढांचे को पीओके से बाहर खदेड़ दिया जाएगा।
लंदन में भी हुए थे प्रदर्शन
पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में मानवाधिकार उल्लंघनों और प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग के विरोध में हजारों ब्रिटिश कश्मीरी लंदन में ब्रिटिश संसद के बाहर एकत्र हुए। प्रदर्शनकारियों ने नागरिकों की मौत, घायलों और महिलाओं के साथ कथित दुर्व्यवहार पर चिंता जताते हुए अंतरराष्ट्रीय जांच तथा जवाबदेही की मांग की। उनका कहना था कि क्षेत्र के लोग लंबे समय से आर्थिक राहत, सस्ती बिजली, बेहतर प्रशासन और बुनियादी अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं।