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Explainer: पाकिस्तानी मूल की मंत्री से लेकर भारत समर्थक नेताओं तक, ब्रिटेन के अगले पीएम की रेस में कौन-कौन?
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Tue, 23 Jun 2026 07:52 AM IST
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सार
ब्रिटिश प्रधानमंत्री किएर स्टार्मर ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। इसी के साथ अब लेबर पार्टी में नए पीएम को लेकर उम्मीदवारी की दौड़ शुरू हो गई है। मौजूदा समय में एंडी बर्नहैम का नाम इस पद के लिए सबसे आगे चल रहा है। हालांकि, अगर बाकी दावेदार नाम वापस नहीं लेते हैं तो अगले पीएम का फैसला लेबर पार्टी की अंदरूनी वोटिंग प्रक्रिया से ही होगा।
ब्रिटेन में पीएम पद के अगले दावेदार।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री किएर स्टार्मर ने सोमवार (22 जून) को अपने पद से इस्तीफे का एलान कर दिया। अपने भाषण में स्टार्मर ने पीएम के तौर पर कार्यकाल की कई उपलब्धियां गिनाईं। साथ ही लेबर पार्टी को 2024 में सत्ता में लौटाने के लिए चलाए गए चुनाव अभियान पर भी बात की। करीब दो साल बाद ही प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देने के एलान के साथ वे भावुक हो गए। स्टार्मर के इस्तीफे के साथ ही अब लेबर पार्टी में एक बार फिर नेतृत्व की दौड़ शुरू हो गई है। मौजूदा समय में कई बड़े नामों के प्रधानमंत्री पद की उम्मीदवारी पेश करने की चर्चा है। इनमें मौजूदा सरकार में गृह मंत्री- शबाना महमूद से लेकर हाल ही में कैबिनेट से इस्तीफा देने वाले- अल-कार्न्स तक के नाम शामिल हैं।
आइये जानते हैं कि लेबर पार्टी में हालिया समय में मची उथल-पुथल के बीच कौन से बडे़ चेहरे अब प्रधानमंत्री पद के लिए दावेदारी पेश कर सकते हैं? जिन नामों की चर्चा है, वे कौन हैं और उनका राजनीतिक इतिहास क्या रहा है? भारत को लेकर इन नेताओं का क्या रुख रहा है?
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आइये जानते हैं कि लेबर पार्टी में हालिया समय में मची उथल-पुथल के बीच कौन से बडे़ चेहरे अब प्रधानमंत्री पद के लिए दावेदारी पेश कर सकते हैं? जिन नामों की चर्चा है, वे कौन हैं और उनका राजनीतिक इतिहास क्या रहा है? भारत को लेकर इन नेताओं का क्या रुख रहा है?
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स्टार्मर के इस्तीफे के बाद कौन से बड़े चेहरे पीएम पद के दावेदार?
1. एंडी बर्नहैम
मौजूदा पद: मेकर्सफील्ड के नवनिर्वाचित सांसद।
सियासी सफर: बर्नहैम ने 2001 से 2017 तक लेह के सांसद के रूप में काम किया। उन्होंने गॉर्डन ब्राउन की सरकार में वित्त मंत्री, संस्कृति मंत्री और स्वास्थ्य मंत्री जैसे प्रमुख कैबिनेट पदों की जिम्मेदारी संभाली थी। 2017 में वे ग्रेटर मैनचेस्टर के मेयर चुने गए और 2021 और 2024 में भी इस पद पर भारी बहुमत से दोबारा जीत दर्ज की। जून 2026 में हुए मेकर्सफील्ड उपचुनाव में शानदार जीत हासिल कर उन्होंने संसद में वापसी की, जिसके कारण उन्हें मेयर पद से इस्तीफा देना पड़ा। उन्हें अगला पीएम बनने की दौड़ में सबसे मजबूत दावेदार माना जा रहा है।
2. एंजेला रेनर
राजनीतिक अनुभव: कैबिनेट मंत्री, उप-प्रधानमंत्री रहीं
सियासी सफर: राजनीति में आने से पहले रेनर 16 वर्ष की उम्र में स्कूल छोड़ने के बाद एक केयर वर्कर और ट्रेड यूनियन की प्रतिनिधि थीं। वे 2015 में सांसद चुनी गईं और 2020 से 2025 तक लेबर पार्टी की उप-नेता रहीं। जुलाई 2024 की चुनावी जीत के बाद उन्हें स्टार्मर सरकार में उप-प्रधानमंत्री और आवास मंत्री भी नियुक्त किया गया। अपने एक घर की बिक्री पर स्टाम्प ड्यूटी (टैक्स) से जुड़े विवाद के कारण उन्हें सितंबर 2025 में इस्तीफा देना पड़ा था। लेकिन मई 2026 में एचएमआरसी की ओर से उन्हें टैक्स चोरी के आरोपों से बरी कर दिया गया, जिससे नेतृत्व की दौड़ में उनकी वापसी का रास्ता साफ हो गया है।
3. शबाना महमूद
राजनीतिक अनुभव: 2010 से सांसद, विधि मंत्री, मौजूदा गृह मंत्री
सियासी सफर: ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से कानून की पढ़ाई करने वाली शबाना महमूद पेशे से बैरिस्टर हैं। पाकिस्तान से आकर ब्रिटेन में बसे माता-पिता की संतान शबाना 2010 में सांसद चुनी गई थीं। वह ब्रिटेन की पहली महिला मुस्लिम सांसदों में से एक बनीं। जुलाई 2024 में उन्हें न्याय सचिव और लॉर्ड चांसलर बनाया गया। इसके बाद सितंबर 2025 के कैबिनेट फेरबदल में उन्हें पदोन्नत कर गृह मंत्री की जिम्मेदारी दी गई, जिस पद पर वे वर्तमान में काबिज हैं। उन्हें लेबर पार्टी के ब्लू लेबर (सामाजिक रूप से रूढ़िवादी) धड़े से जोड़ा जाता है और नेतृत्व के लिए एक मजबूत विकल्प माना जा रहा है।
4. अल कार्न्स
पहचान: पूर्व सैन्य अधिकारी, पूर्व रक्षा मंत्री और बर्मिंघम सेली ओक के सांसद।
सियासी सफर: राजनीति में आने से पहले कार्न्स रॉयल मरीन में कर्नल और स्पेशल बोट सर्विस (एसबीएस) के अधिकारी थे, जिन्होंने अफगानिस्तान में पांच सैन्य टूर किए और युद्ध क्षेत्र में अपनी सेवाओं के लिए मिलिट्री क्रॉस और डीएसओ जैसे सम्मान हासिल किए। वे सेना से इस्तीफा देकर 2024 के आम चुनाव में लेबर पार्टी से सांसद चुने गए। स्टार्मर सरकार में कार्न्स मंत्री बने। 11 जून 2026 को उन्होंने सरकार की रक्षा निवेश योजनाओं को अपर्याप्त बताते हुए मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। नेतृत्व की इस रेस में उन्हें एक डार्क हॉर्स उम्मीदवार के तौर पर देखा जा रहा है।
5. वेस स्ट्रीटिंग
राजनीतिक अनुभव: 2015 से इलफोर्ड नॉर्थ के सांसद, स्वास्थ्य मंत्री रहे
सियासी सफर: कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी छात्र संघ और नेशनल यूनियन ऑफ स्टूडेंट्स (एनयूएस) के अध्यक्ष रहने के बाद, वे 2010 में रेडब्रिज काउंसिल के पार्षद चुने गए। 2015 में वे इलफोर्ड नॉर्थ से पहली बार सांसद बने। किएर स्टार्मर के नेतृत्व वाली लेबर सरकार में जुलाई 2024 में उन्हें स्वास्थ्य और सामाजिक देखभाल सचिव बनाया गया। हालांकि, स्टार्मर के नेतृत्व पर अविश्वास जताते हुए उन्होंने 14 मई 2026 को अपने कैबिनेट पद से इस्तीफा दे दिया। पार्टी के भीतर वे एक बेहतरीन कम्युनिकेटर माने जाते हैं।
भारत को लेकर इन नेताओं का क्या रुख रहा है?
1. एंडी बर्नहैमग्रेटर मैनचेस्टर के मेयर के तौर पर एंडी बर्नहैम का भारत के प्रति रुख बेहद सकारात्मक और सहयोग वाला रहा है। वे स्पष्ट तौर पर भारत के साथ व्यापारिक, सांस्कृतिक और रणनीतिक साझेदारियों को आगे बढ़ाने के मजबूत पक्षधर रहे हैं। कुछ समय पहले ही उन्होंने भारत और ब्रिटेन के बीच आर्थिक और सांस्कृतिक संबंधों को बढ़ावा देने के लिए मैनचेस्टर इंडिया पार्टनरशिप (एमआईपी) के एक मिशन के दौरान, बर्नहैम ने एक वीडियो संदेश भेजा था। इस संदेश में उन्होंने ग्रेटर मैनचेस्टर और भारत के बीच निरंतर घनिष्ठ संबंध बनाने की अपनी मजबूत प्रतिबद्धता दोहराई।
2. एंजेला रेनर
एंजेला रेनर ने लेबर पार्टी और भारत के बीच संबंध मजबूत करने की दिशा में सक्रिय रूप से काम किया है। खासकर उस दौर के बाद लेबर पार्टी ने जेरेमी कॉर्बिन के नेतृत्व में जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 रद्द किए जाने को लेकर एक अभियान चलाया था और भारत से रिश्तों को जानबूझकर खराब कर लिया। इसके बाद जब किएर स्टार्मर ने लेबर पार्टी का नेतृत्व संभाला तो भारत के साथ रिश्ते बेहतर करने की जिम्मेदारी एंजेला रेनर को दी गई, जिन्होंने 2023 में भारत का दौरा किया था और संबंधों को सुधारने में अहम भूमिका निभाई।
3. शबाना महमूद
ब्रिटिश लेबर पार्टी की इस वरिष्ठ नेता का भारत के प्रति रुख उनकी पाकिस्तानी पृष्ठभूमि, कश्मीर मुद्दे पर उनके बयानों और राजनयिक रुख से जुड़ा रहा है। कश्मीर के विषय पर उनके पुराने बयानों के कारण भारत में वे काफी चर्चा में रही हैं। साल 2019 में जब भारत सरकार ने जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 को निष्क्रिय कर दिया, तब शबाना महमूद ने मोदी सरकार की कड़ी आलोचना की थी। उन्होंने इसे कश्मीर के लोगों के साथ विश्वासघात बताया था।
उन्होंने साल 2019 में ही लंदन स्थित भारतीय उच्चायोग के बाहर हुए एक विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया था। इसके अलावा उन्होंने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस मुद्दे पर लिखे गए ब्रिटिश सांसदों के एक पत्र पर भी हस्ताक्षर किए थे।
साल 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच आतंकी हमले और ऑपरेशन सिंदूर के दौरान जब तनाव बढ़ा था, तब उन्होंने एक आधिकारिक सार्वजनिक बयान जारी किया था। कुछ समय पहले ही उन पर ब्रिटेन में पाकिस्तान के ग्रूमिंग गैंग्स का बचाव करने के आरोप लगे थे। आरोप हैं कि यह ग्रूमिंग गैंग्स पाकिस्तान से वैध-अवैध दोनों तरह से आए मुस्लिम संगठनों के समूह हैं, जो कि ब्रिटेन की लड़कियों को बहला-फुसलाकर उनके साथ दुष्कर्म के मामलों से जुड़े रहे हैं।
ब्रिटिश लेबर पार्टी की इस वरिष्ठ नेता का भारत के प्रति रुख उनकी पाकिस्तानी पृष्ठभूमि, कश्मीर मुद्दे पर उनके बयानों और राजनयिक रुख से जुड़ा रहा है। कश्मीर के विषय पर उनके पुराने बयानों के कारण भारत में वे काफी चर्चा में रही हैं। साल 2019 में जब भारत सरकार ने जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 को निष्क्रिय कर दिया, तब शबाना महमूद ने मोदी सरकार की कड़ी आलोचना की थी। उन्होंने इसे कश्मीर के लोगों के साथ विश्वासघात बताया था।
उन्होंने साल 2019 में ही लंदन स्थित भारतीय उच्चायोग के बाहर हुए एक विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया था। इसके अलावा उन्होंने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस मुद्दे पर लिखे गए ब्रिटिश सांसदों के एक पत्र पर भी हस्ताक्षर किए थे।
साल 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच आतंकी हमले और ऑपरेशन सिंदूर के दौरान जब तनाव बढ़ा था, तब उन्होंने एक आधिकारिक सार्वजनिक बयान जारी किया था। कुछ समय पहले ही उन पर ब्रिटेन में पाकिस्तान के ग्रूमिंग गैंग्स का बचाव करने के आरोप लगे थे। आरोप हैं कि यह ग्रूमिंग गैंग्स पाकिस्तान से वैध-अवैध दोनों तरह से आए मुस्लिम संगठनों के समूह हैं, जो कि ब्रिटेन की लड़कियों को बहला-फुसलाकर उनके साथ दुष्कर्म के मामलों से जुड़े रहे हैं।
4. अल-कार्न्स
जून 2026 में अपने इस्तीफे से पहले, कार्न्स ब्रिटेन की रणनीतिक रक्षा समीक्षा को तैयार करने में सक्रिय रूप से शामिल थे। कार्न्स का मुख्य ध्यान वैश्विक समुद्री चुनौतियों, राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने और सैन्य क्षमताओं को बढ़ाने पर था। उनकी रक्षा नीतियां ब्रिटेन के हिंद-प्रशांत क्षेत्र की ओर झुकाव के अनुकूल थीं। इसके तहत भारत जैसे प्रमुख लोकतांत्रिक सहयोगियों के साथ सैन्य उपकरणों की खरीद, तकनीकी बदलाव और गहरे सुरक्षा संबंधों को मजबूत करने पर जोर दिया गया था।
5. वेस स्ट्रीटिंग
वेस स्ट्रीटिंग भी भारत के साथ संबंधों को अहमियत देते हैं। उन्होंने 21वीं सदी के लिए ब्रिटेन-भारत संबंधों को एक परिभाषित करने वाला रिश्ता और दोस्ती करार दिया है। ब्रिटेन के स्वास्थ्य मंत्री के तौर पर उन्होंने भारत के प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा मॉडल की जमकर तारीफ की है। स्ट्रीटिंग ने ब्रिटेन की स्वास्थ्य सेवा को बनाने और इसके भविष्य को संवारने में भारतीय समुदाय के पीढ़ियों से चले आ रहे अहम योगदान की भी गहरी सराहना की है।
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5. वेस स्ट्रीटिंग
वेस स्ट्रीटिंग भी भारत के साथ संबंधों को अहमियत देते हैं। उन्होंने 21वीं सदी के लिए ब्रिटेन-भारत संबंधों को एक परिभाषित करने वाला रिश्ता और दोस्ती करार दिया है। ब्रिटेन के स्वास्थ्य मंत्री के तौर पर उन्होंने भारत के प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा मॉडल की जमकर तारीफ की है। स्ट्रीटिंग ने ब्रिटेन की स्वास्थ्य सेवा को बनाने और इसके भविष्य को संवारने में भारतीय समुदाय के पीढ़ियों से चले आ रहे अहम योगदान की भी गहरी सराहना की है।
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