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'ईरान से बाहर नहीं जाना चाहिए यूरेनियम भंडार': मोजतबा खामेनेई ने अपनाया सख्त रुख; US की प्रमुख मांग खारिज की

एएनआई, तेहरान। Published by: निर्मल कांत Updated Thu, 21 May 2026 07:45 PM IST
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सार

अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच ईरानी सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने कहा कि संवर्धित यूरेनियम भंडार देश से बाहर नहीं जाना चाहिए। ईरानी सूत्रों ने रॉयटर्स को यह जानकारी दी। पढ़िए रिपोर्ट-

'Enriched uranium should not leave Iran': Mojtaba Khamenei hardens stand, defies Trump's key demand
मोजतबा खामेनेई, ईरान के सर्वोच्च नेता - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक
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विस्तार

तेहरान और वाशिंगटन के बीच कूटनीतिक तनाव जारी है। इस बीच ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला मोजतबा खामेनेई ने आदेश दिया है कि संवर्धित यूरेनियम का भंडार देश से बाहर नहीं जाना चाहिए। इस तरह उन्होंने अमेरिका के शांति वार्ता में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की प्रमुख मांग को खारिज कर दिया है। समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने दो ईरानी सूत्रों के हवाले से यह जानकारी दी। 


रॉयटर्स के मुताबिक, इस्राइली अधिकारियों के अनुसार राष्ट्रपति ट्रंप ने इससे पहले इस्राइल को यह आश्वासन दिया था कि संवर्धित यूरेनियम भंडार को ईरान से पूरी तरह हटा दिया जाएगा। यह परमाणु हथियार बनाने में प्रमुख घटक है। 
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बेंजामिन नेतन्याहू ने अपनाया सख्त रुख
इस बीच, इस्राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी सख्य रुख अपनाया हुआ है। उन्होंने कहा कि वह तब तक शत्रुता समाप्त करने पर विचार नहीं करेंगे, जब तक संवर्धित यूरेनियम को पूरी तरह ईरानी नियंत्रण से बाहर नहीं कर दिया जाता है, जब तक ईरान अपने समर्थित क्षेत्रीय लड़ाकू समूहों को वित्तीय समर्थन देना पूरी तरह बंद नहीं करता है और अपनी बैलिस्टिक मिसाइल प्रणाली को पूरी तरह खत्म नहीं कर देता है।
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हालांकि, दो ईरानी सूत्रों में से एक ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर ईरान की निर्णय लेने वाली सर्वोच्च संस्थाओं के भीतर बनी सहमति की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सर्वोच्च नेता ने आदेश दिया है कि संवर्धित यूरेनियम का भंडार देश से बाहर नहीं जाना चाहिए। 

उसी अंदरूनी सूत्र ने बताया कि ईरान के शीर्ष प्रशासनिक और सैन्य अधिकारी मानते हैं कि इस सामग्री पर नियंत्रण छोड़कर इसे विदेश भेजना देश की सुरक्षा को गंभीर रूप से कमजोर करेगा और इससे अमेरिका और इस्राइल की भविष्य की संभावित सैन्य कार्रवाइयों के लिए ईरान ज्यादा कमजोर हो जाएगा। ईरान के सांविधानिक ढांचे के अनुसार, देश की सभी महत्वपूर्ण नीतियों पर अंतिम फैसला लेने का अधिकार सर्वोच्च नेता के पास होता है। 
 
अमेरिका-इस्राइल के हमलों से जंग की शुरुआत
आठ अप्रैल से जारी अस्थायी युद्ध विराम की पृष्ठभूमि में मौजूदा कूटनीतिक गतिरोध विकसित हो रहा है। 28 अप्रैल को इस्राइल और अमेरिका ने ईरान पर हमले किए थे, जिससे संघर्ष की शुरुआत हुई। इन हमलों के तुरंत बाद ईरान ने खाड़ी देशों में अमेरिकी अड्डों पर जवाबी हमले किए। इसके साथ इस्राइली सेना और हिजबुल्ला के लेबनान में संघर्ष तेज हो गया।   

ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी जारी
अस्थायी संघर्ष विराम के बावजूद वार्ताकार कोई बड़ी कूटनीतिक कामयाबी हासिल नहीं कर पाए हैं। अमेरिका की ओर से ईरानी बंदरगाहों और जहाजों की नाकाबंदी जारी है। इससे वार्ता की प्रक्रिया जटिल बनी हुई है। ईरान के पास होर्मुज जलडमरूमध्य पर रणनीतिक बढ़त है। यह दुनिया के सबसे अहम ऊर्जा मार्गों में से एक है। ये वार्ताएं पाकिस्तान की मध्यस्था में की जा रही हैं। 

ये भी पढ़ें: पश्चिम एशिया संकट: पाकिस्तान के जरिये अमेरिका ने भेजा नया युद्ध विराम प्रस्ताव, समीक्षा कर रहा ईरान

नए हमलों की तैयारी कर रहा अमेरिका: गालिबाफ
ईरान के दो वरिष्ठ सूत्रों के अनुसार, तेहरान के सत्ता प्रतिष्ठान के भीतर भारी संदे है। कई लोग अस्थायी युद्ध विराम को अमेरिका की एक ऐसी रणनीतिक चाल मान रहे हैं, जिसका मकसद सुरक्षा का झूठा माहौल तैयार करना है, ताकि अमेरिका आखिरकार अपने हवाई हमलों को फिर शुरू कर सके। इन भीतरी आशंकाओं को बल देते हुए ईरान के मुख्य शांति वार्ताकार मोहम्मद बाकेर गालिबाफ ने बुधवार को कहा कि दुश्मन की स्पष्ट और छिपी हुई चालें स्पष्ट रूप से दिखाती हैं कि अमेरिका का सैन्य बल नए हमलों की तैयारी कर रहा है। 

ट्रंप ने क्या धमकी दी?
उधर अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने दबाव को और बढ़ाते हुए कहा बुधवार को कहा कि अगर ईरान सरकार व्यापक शांति समझौते पर हस्ताक्षर करने से इनकार करती है, तो अमेरिका तेहरान पर आगे सैन्य हमले करने के लिए पूरी तरह तैयार है। हालांकि, ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि वाशिंगटन सही जवाब पाने के लिए कुछ दिनों का समय दे सकता है। 
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