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FBI: क्या ताकतवर लोगों के लिए यौन तस्करी का रैकेट नहीं चला रहा था एपस्टीन? एफबीआई के खुलासे ने सबको चौंका दिया

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन Published by: हिमांशु चंदेल Updated Mon, 09 Feb 2026 02:43 AM IST
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सार

Jeffrey Epstein Files: एफबीआई की आंतरिक जांच फाइलों से खुलासा हुआ है कि जेफ्री एपस्टीन ने नाबालिग लड़कियों का यौन शोषण किया, लेकिन शक्तिशाली लोगों के लिए संगठित यौन तस्करी रैकेट चलाने के पर्याप्त सबूत नहीं मिले। बैंक रिकॉर्ड, फोटो, वीडियो और गवाहियों की लंबी जांच के बाद एजेंसी ने बड़े नेटवर्क के दावों की पुष्टि नहीं की। ऐसे में आइए जानते हैं कि रिपोर्ट में एफबीआई ने क्या-क्या खुलासे किए हैं। साथ ही मामले को शुरुआती जांच से अबतक मामले में एफबीआई ने क्या किया है, इसे भी समझने की कोशिश करेंगे।

FBI concluded Jeffrey Epstein was not running girl trafficking ring for powerful men files show henious crime
एपस्टीन फाइल्स - फोटो : एएनआई/रॉयटर्स
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विस्तार

एफबीआई ने जेफ्री एपस्टीन के बैंक रिकॉर्ड, ईमेल, संपत्तियों और संपर्कों की लंबे समय तक जांच की। एजेंसी ने पीड़ितों से पूछताछ की और प्रभावशाली लोगों से जुड़े लिंक भी खंगाले। जांच में यह साफ साबित हुआ कि एपस्टीन ने नाबालिग लड़कियों का यौन शोषण किया। लेकिन यह साबित करने लायक ठोस सबूत नहीं मिले कि वह ताकतवर लोगों के लिए संगठित यौन तस्करी का रैकेट चला रहा था। न्याय विभाग के आंतरिक रिकॉर्ड की समीक्षा में भी यही निष्कर्ष दर्ज मिला कि बड़े नेटवर्क वाली साजिश का दावा जांच में टिक नहीं पाया।

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जांच एजेंसियों ने न्यूयॉर्क, फ्लोरिडा और वर्जिन आइलैंड्स स्थित ठिकानों से फोटो और वीडियो जब्त किए। अभियोजकों के मेमो के अनुसार इन सामग्रियों में पीड़ितों के साथ यौन शोषण करते अन्य प्रभावशाली लोगों का कोई स्पष्ट दृश्य नहीं मिला। डिजिटल रिकॉर्ड में आपत्तिजनक सामग्री जरूर थी, लेकिन सह-अपराधियों का प्रमाण नहीं मिला। बैंक रिकॉर्ड और भुगतान लेनदेन भी खंगाले गए। कई संस्थाओं और प्रभावशाली नामों से जुड़े भुगतान दिखे, लेकिन उन्हें सीधे आपराधिक गतिविधि से जोड़ने वाला सबूत नहीं मिला। इसलिए वित्तीय कड़ी भी कानूनी आरोप तय करने लायक नहीं बनी।
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पीड़िता के दावे की पुष्टि नहीं
एक पीड़िता ने सार्वजनिक रूप से आरोप लगाया था कि एपस्टीन उसे अपने अमीर दोस्तों के पास भेजता था। लेकिन एफबीआई एजेंट इस दावे की पुष्टि नहीं कर सके। जांच रिकॉर्ड के अनुसार अन्य पीड़ितों ने ऐसी समान कहानी नहीं बताई। एजेंटों ने लिखा कि कुछ पीड़ितों ने अन्य लोगों द्वारा शोषण का आरोप लगाया, लेकिन संघीय केस चलाने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं थे। इसलिए ऐसे मामलों को स्थानीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों को भेजा गया। यानी आरोप सामने आए, पर कानूनी स्तर पर टिकने वाला प्रमाण सीमित रहा।

सभी दस्तावेजों की समीक्षा जारी
न्याय विभाग ने पारदर्शिता कानून के तहत लाखों पन्नों के दस्तावेज जारी किए। इनमें पुलिस रिपोर्ट, एफबीआई इंटरव्यू नोट्स और अभियोजकों के ईमेल शामिल हैं। मीडिया संस्थान अभी भी इन रिकॉर्ड की समीक्षा कर रहे हैं। संभव है कि कुछ नई बातें आगे आएं। लेकिन उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर अमेरिकी अधिकारियों ने फैसला किया कि अतिरिक्त बड़े आरोप जोड़ने लायक सबूत नहीं हैं। यही वजह रही कि मुख्य केस को आगे नहीं बढ़ाया गया। दस्तावेज अब तक की जांच की सबसे स्पष्ट तस्वीर पेश करते हैं।

जांच की शुरुआत कैसे हुई?
एपस्टीन जांच 2005 में शुरू हुई जब 14 साल की लड़की के परिवार ने शिकायत दी। आरोप था कि उसके घर पर यौन शोषण हुआ। पुलिस जांच में कम से कम 35 लड़कियां सामने आईं। आरोप था कि एपस्टीन हाईस्कूल उम्र की लड़कियों को पैसे देकर यौन मसाज के लिए बुलाता था। बाद में एफबीआई जांच में शामिल हुई। संघीय अभियोजकों ने एपस्टीन और उसके सहायकों पर आरोप तय करने का मसौदा भी तैयार किया। मामला गंभीर था और कई पीड़ितों के बयान दर्ज हुए।

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प्ली डील और पहली सजा का मामला
संघीय आरोप तय होने की तैयारी के बावजूद तत्कालीन मियामी के अमेरिकी अटॉर्नी अलेक्जेंडर एकोस्टा ने एपस्टीन के साथ प्ली डील कर ली। इसके तहत एपस्टीन ने राज्य स्तर पर नाबालिग से वेश्यावृत्ति मांगने का दोष स्वीकार किया। उसे 18 महीने की सजा मिली और वह 2009 तक जेल से बाहर आ गया। इस समझौते की बाद में कड़ी आलोचना हुई। 2018 में मीडिया रिपोर्टों ने इस डील पर सवाल उठाए, जिसके बाद न्यूयॉर्क के संघीय अभियोजकों ने केस को दोबारा खोला और नई जांच शुरू की।

गिरफ्तारी, मौत और मैक्सवेल पर कार्रवाई
नई जांच के बाद एपस्टीन को जुलाई 2019 में गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तारी के एक महीने बाद उसने जेल में आत्महत्या कर ली। उसके बाद जांच का फोकस उसके नेटवर्क पर गया। एक साल बाद उसकी करीबी सहयोगी गिस्लेन मैक्सवेल पर आरोप लगा कि उसने पीड़ित लड़कियों की भर्ती में मदद की और कई मामलों में शोषण में शामिल रही। 2021 में उसे दोषी ठहराया गया। अदालत ने उसे 20 साल की जेल की सजा सुनाई। यह केस का सबसे बड़ा सफल अभियोजन माना गया।

सनसनीखेज दावों की भी जांच हुई
जांच रिकॉर्ड बताते हैं कि एफबीआई और अभियोजकों ने हर बड़े दावे की जांच की। हेल्पलाइन पर आए अजीब और सनसनीखेज आरोप भी परखे गए। कई संभावित सह-अभियुक्तों के नामों पर भी जांच चली। लेकिन कई आरोपों की पुष्टि नहीं हो सकी। जांच टीम ने लिखा कि आरोप होना और अदालत में साबित होना अलग बात है। जिन मामलों में ठोस सबूत नहीं मिले, उन्हें आगे नहीं बढ़ाया गया। यानी एजेंसियों ने दावों को खारिज नहीं किया, बल्कि सबूत के आधार पर छांटा।

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वर्जीनिया जिउफ्रे के आरोप और दिक्कतें
वर्जीनिया रॉबर्ट्स जिउफ्रे ने आरोप लगाया था कि एपस्टीन ने उसे कई प्रभावशाली पुरुषों के साथ यौन संबंध बनाने के लिए भेजा। जांच एजेंसियों ने माना कि वह एपस्टीन की पीड़िता थी। लेकिन उसके अन्य दावों में विरोधाभास मिले। कुछ बयान बदलते रहे। जांच नोट्स में दर्ज है कि उसके कई सार्वजनिक इंटरव्यू में बढ़ा-चढ़ाकर या गलत विवरण भी थे। इससे अभियोजन के लिए उसके सभी आरोपों को अदालत में टिकाना कठिन माना गया।

अन्य पीड़ितों ने भेजे जाने की बात नहीं मानी
अभियोजकों के मेमो के अनुसार, जिन दो अन्य पीड़ितों का हवाला जिउफ्रे ने दिया था, उन्होंने जांचकर्ताओं से कहा कि उन्हें किसी ताकतवर व्यक्ति के पास नहीं भेजा गया। रिकॉर्ड में लिखा गया कि किसी अन्य पीड़ित ने यह नहीं कहा कि मैक्सवेल या एपस्टीन ने सीधे उन्हें दूसरे पुरुषों के साथ यौन संबंध बनाने को कहा। इससे बड़े यौन तस्करी नेटवर्क वाली थ्योरी कमजोर पड़ी। अभियोजन पक्ष के लिए यह एक महत्वपूर्ण बिंदु रहा।

संस्मरण और बयानों में विरोधाभास
जांच में यह भी सामने आया कि जिउफ्रे ने अपने संस्मरण में कुछ घटनाओं का काल्पनिक या आंशिक रूप से बदला हुआ विवरण लिखा था। एजेंसियों ने कहा कि उसके कई इंटरव्यू में भी अलग-अलग संस्करण सामने आए। रिकॉर्ड में यह भी दर्ज है कि उसने एफबीआई के साथ अपनी बातचीत को लेकर कुछ गलत दावे किए। हालांकि उसने अपने मुख्य आरोपों को सही बताया, लेकिन विरोधाभासों ने केस रणनीति को प्रभावित किया।

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प्रिंस एंड्रयू से इंटरव्यू नहीं हो सका
अमेरिकी अभियोजकों ने एंड्रयू माउंटबेटन-विंडसर से पूछताछ की कोशिश की, लेकिन वह इंटरव्यू के लिए उपलब्ध नहीं हुए। जिउफ्रे ने उन पर यौन दुराचार का आरोप लगाया था। बाद में दोनों के बीच दीवानी मुकदमे का समझौता हुआ। जिउफ्रे ने अपने संस्मरण में लिखा कि अभियोजकों ने उसे मैक्सवेल केस में गवाह नहीं बनाया ताकि जूरी का ध्यान भटके नहीं। उसने अपने ट्रैफिकिंग संबंधी आरोपों को सही बताया।

जब्त डिजिटल सामग्री में क्या मिला?
जांच एजेंसियों ने बड़ी मात्रा में वीडियो, फोटो और डिजिटल फाइलें जब्त कीं। कुछ तस्वीरें नग्न नाबालिगों जैसी दिखीं। एक डिवाइस में इंटरनेट से डाउनलोड की गई बाल यौन शोषण सामग्री भी मिली। लेकिन अभियोजकों ने कहा कि जब्त वीडियो में एपस्टीन पीड़ितों का दुरुपयोग करते अन्य प्रभावशाली पुरुष नहीं दिखे। यानी सामग्री आपत्तिजनक थी, पर नेटवर्क का कानूनी सबूत नहीं बनी।

फोटो-वीडियो में सह-अभियुक्त नहीं दिखे
अभियोजक के ईमेल के अनुसार, किसी वीडियो या फोटो में अन्य पुरुषों के साथ पीड़ितों का दुरुपयोग दिखता नहीं मिला। अगर ऐसा मिलता तो आगे कार्रवाई होती। जांच टीम ने साफ लिखा कि ऐसा कोई रिकॉर्ड नहीं मिला जो एपस्टीन और मैक्सवेल के अलावा अन्य लोगों को सीधे अपराध से जोड़े। यह निष्कर्ष जांच बंद करने के फैसले में अहम रहा।

बैंक रिकॉर्ड में मॉडल्स को भुगतान
बैंक रिकॉर्ड में 25 से ज्यादा महिलाओं को भुगतान दिखा, जिनमें कई मॉडल जैसी प्रोफाइल वाली थीं। लेकिन अभियोजकों ने लिखा कि यह साबित नहीं हुआ कि एपस्टीन उन्हें अन्य पुरुषों के लिए वेश्यावृत्ति में लगा रहा था। भुगतान दिखना और अपराध साबित होना अलग बात है। इसलिए वित्तीय लेनदेन से भी बड़ा यौन तस्करी का नेटवर्क साबित नहीं हुआ।

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