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China: चीन की चाल खुद पर ही पड़ी भारी, महिला मानवाधिकार कार्यकर्ता की गिरफ्तारी मामले में यूएन ने दी चेतावनी

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग Published by: हिमांशु चंदेल Updated Mon, 09 Feb 2026 01:42 AM IST
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सार

चीन में एक महिला मानवाधिकार कार्यकर्ता की गिरफ्तारी और कथित उत्पीड़न का मामला अब अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंच गया है और इस पर चीन को कड़ी प्रतिक्रिया झेलनी पड़ रही है। जिस कार्रवाई को स्थानीय स्तर पर दबा देने की कोशिश बताई जा रही थी, वही अब वैश्विक जांच और सवालों के घेरे में है। आइए, अब इस पूरे मामले को विस्तार से जानते हैं।

UN voices concern over harassment of Chinese womens human rights defender Yang Li xi jinping
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग - फोटो : ANI
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विस्तार

चीन में एक महिला मानवाधिकार कार्यकर्ता की गिरफ्तारी और कथित उत्पीड़न का मामला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठ गया है। संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार विशेषज्ञों ने इस पर कड़ी चिंता जताई है। जो चीन गिरफ्तारी और अपनी तानाशाही के लिए पूरे दुनिया में कुख्यात है। उसी चीन को अब उसकी ही चाल भारी पड़ गई है। दरअसल ये देश मानवाधिकार की धज्जियां उड़ानें में प्रसिद्ध है। और अगर कोई आवाज उठाए तो उसके लिए जेल के दरवाजे होते हैं।
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कुछ ऐसा ही चीन ने एक महिला मानवाधिकार कार्यकर्ता के साथ किया। लेकिन उकी ये चाल किसी काम नहीं आई। बल्कि जिनपिंग का पासा उलटा पड़ गया। क्योंकि ये मामला अब यून में उठ गया। यूएन ने चीन सरकार को चेतावनी दी है। यूएन ने कहा है कि कार्यकर्ता यांग ली को तुरंत पर्याप्त मेडिकल इलाज और स्वतंत्र आवाजाही की अनुमति दी जानी चाहिए। विशेषज्ञों ने कार्रवाई को अधिकारों के शांतिपूर्ण इस्तेमाल को रोकने की कोशिश बताया है।
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क्या बोले यूएन के विशेषज्ञ?
यूएन विशेषज्ञों के बयान के अनुसार यांग ली को कई बार बीजिंग जाने से रोका गया, जहां वह मेडिकल अपॉइंटमेंट और याचिका प्रक्रिया के लिए जाना चाहती थीं। हर बार रास्ते में रोककर उन्हें हिरासत में लिया गया। विशेषज्ञों का कहना है कि यह मनमानी हिरासत का मामला लगता है। उन्होंने कहा कि यांग ली गंभीर किडनी बीमारी के अंतिम चरण से जूझ रही हैं और उन्हें तत्काल विशेष इलाज की जरूरत है।

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इलाज से वंचित रखने पर आपत्ति
यूएन मानवाधिकार विशेषज्ञों ने कहा कि बार-बार इलाज से वंचित रखने, जेल में खराब व्यवहार और लगातार दबाव के कारण उनकी हालत बिगड़ी है। बयान में कहा गया कि पर्याप्त चिकित्सा सुविधा न देना मानवाधिकार का गंभीर उल्लंघन है। विशेषज्ञों ने चीन से कहा है कि यांग ली और उनके परिवार के खिलाफ डराने और दबाव की कार्रवाई तुरंत बंद की जाए और उन्हें अपनी पसंद के अस्पताल में इलाज की अनुमति दी जाए।

इस लिए हुई कार्यकर्ता पर कार्रवाई
यांग ली जियांगसू प्रांत के जिंतन क्षेत्र की रहने वाली हैं। वह वर्ष 2009 से जमीन अधिग्रहण और फसल हटाने की सरकारी कार्रवाई के खिलाफ आवाज उठाती रही हैं। अपने परिवार और स्थानीय समुदाय की ओर से उन्होंने कई याचिकाएं दायर कीं। यूएन मानवाधिकार कार्यालय के अनुसार 2014 से उन्हें कई बार प्रशासनिक हिरासत में लिया गया।

आपराधिक आरोप और सजा पर भी सवाल
अक्टूबर 2024 में यांग ली को झगड़ा भड़काने और परेशानी पैदा करने के आरोप में आपराधिक हिरासत में लिया गया। बाद में आरोप बदलकर राज्य संस्थानों के कामकाज में बाधा कर दिया गया। सितंबर 2025 में उन्हें 15 महीने की सजा सुनाई गई। यूएन विशेषज्ञों ने कहा कि मुकदमे की प्रक्रिया में निष्पक्ष सुनवाई से जुड़ी कई खामियां दिखाई दीं।

जेल में भूख हड़ताल और जबरन फीडिंग का आरोप
यूएन एजेंसी के अनुसार जेल में किडनी बीमारी के इलाज से वंचित किए जाने के विरोध में यांग ली ने भूख हड़ताल की। इसके बाद उन्हें जबरन नाक के जरिये भोजन दिया गया, जिसे अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानून के तहत क्रूर और अमानवीय व्यवहार माना जाता है। रिहाई के बाद भी उन्हें इलाज के लिए यात्रा से रोका गया। एक हालिया हिरासत घटना में उनके साथ मारपीट हुई और उनके कई नाखून उखड़ने की बात सामने आई है।

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