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Explainer: क्या जंगलों में लगी आग से खतरे में फीफा विश्व कप फाइनल, ट्रंप कनाडा को क्यों दे रहे टैरिफ की धमकी?

Sat, 18 Jul 2026 05:48 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Sat, 18 Jul 2026 05:48 PM IST
सार

अमेरिका और कनाडा के जंगलों में भीषण गर्मी के बीच आग भड़क उठी हैं। खासकर कनाडा के अमेरिका से सटे ओंटारियो में जंगलों की आग से निकला धुआं अमेरिकी शहरों को भी प्रभावित कर रहा है। इसका असर यह हुआ है कि जहां अमेरिका में घरेलू बेसबॉल और फुटबॉल के मुकाबले रद्द किए गए हैं, वहीं फीफा विश्व कप फाइनल पर भी खतरा पैदा हो गया है।

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FIFA World Cup Final Argentina vs Spain in New Jersey New York US Canada Wildfires Smoke Smog Health Players
फीफा विश्व कप 2026। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

अमेरिका में रविवार देर रात खेले जाने वाले फीफा विश्व कप फाइनल मुकाबले पर पूरी दुनिया की निगाहें हैं। करोड़ों लोग अर्जेंटीना बनाम स्पेन के मुकाबले के लिए तैयारियों में जुटे हैं। इनमें स्टेडियम जाकर अपनी टीमों का समर्थन करने वालों से लेकर अलग-अलग देशों की जनता और नेता तक शामिल हैं। खुद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी इस मुकाबले को देखने के लिए न्यूयॉर्क के न्यू जर्सी में स्थित स्टेडियम में मौजूदगी दर्ज करा सकते हैं। हालांकि, इस बीच अमेरिका के इस पूरे क्षेत्र में लगातार खराब होती वायु गुणवत्ता को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है। दरअसल, अमेरिका और कनाडा के कई जंगलों में बढ़ती गर्मी के बीच आग भड़क गई है। इस आग का धुआं अब अमेरिका के मध्य में स्थित न्यूयॉर्क तक पहुंच रहा है, जिससे विश्व कप फाइनल के आयोजन वाले शहर में स्मॉग तक देखा गया।
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इस स्थिति को फीफा विश्व कप फाइनल के लिए बेहद खराब माना जा रहा है। दरअसल, लगातार बढ़ते एक्यूआई यानी खराब होती वायु गुणवत्ता का असर न सिर्फ न्यू जर्सी के निवासियों के लिए बुरी खबर है, बल्कि यहां फीफा विश्व कप का फाइनल मैच देखने आ रहे पर्यटकों-दर्शकों और यहां तक कि अर्जेंटीना और स्पेन के खिलाड़ियों तक पर खराब हवा का बुरा असर पड़ सकता है। इस स्थिति के बीच हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडा पर अपने जंगलों की आग काबू में न कर पाने का आरोप लगाया और कहा कि वह इसके लिए उस पर टैरिफ भी लगा सकते हैं। 

ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर कनाडा और अमेरिका में जंगलों में लगी आग कैसे भड़क उठी और यह कितनी खतरनाक है? इसका अब तक क्या असर हुआ है? फीफा विश्व कप के आयोजन पर इसका कैसा असर पड़ने की आशंका है? क्यों इस आग और इससे पैदा होने वाले धुएं को लेकर दोनों देशों के बीच राजनीति भड़क उठी है? डोनाल्ड ट्रंप इसके लिए कनाडा को जिम्मेदार ठहराते हुए उस पर टैरिफ लगाने की धमकी क्यों दे रहे हैं? आइये जानते हैं...
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पहले जानें- अमेरिका-कनाडा के जंगलों में कैसे लगी आग, यह कितनी खतरनाक?

कनाडा और अमेरिका को प्रभावित करने वाली यह आग एक बेहद गंभीर प्राकृतिक और पर्यावरणीय आपदा बन चुकी है। कनाडा की आपात सेवा ने इस आग को लेकर अलर्ट जारी किया है, जबकि अमेरिका की तरफ से आग पर नियंत्रण में मदद की जगह कनाडा को चेतावनी दी गई है। 

1. आग कैसे लगी?

कनाडा के जंगलों, खासकर ओंटारियो और ब्रिटिश कोलंबिया में आग लगना एक प्राकृतिक प्रक्रिया है, लेकिन हाल के वर्षों में स्थिति बहुत अधिक बिगड़ गई है। 

आसमानी बिजली और मानवीय गतिविधियां: कनाडा के जंगलों में लगने वाली आधी आग आसमानी बिजली गिरने से शुरू होती है, जबकि बाकी आग मानवीय गतिविधियों के कारण लगती है।

हीट डोम और लू: एक उच्च दबाव वाला क्षेत्र जिसे 'हीट डोम' कहा जाता है, उसने उत्तरी अमेरिका के तापमान को 100 डिग्री फारेनहाइट के करीब पहुंचा दिया है। यह हीट डोम गर्म हवा को रोक कर रखता है। 
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सूखा और कम बारिश: लंबे समय तक रहने वाली गर्मी और औसत से कम बारिश के कारण मिट्टी और पौधों की नमी पूरी तरह खत्म हो गई। यह सूखी हुई वनस्पति (पेड़-पौधे) आग के लिए भारी मात्रा में ईंधन का काम कर रही है।

जलवायु परिवर्तन: बढ़ते वैश्विक तापमान के कारण लू लगातार और भी गंभीर होती जा रही है। साथ ही सर्दियों का तापमान बढ़ने से बर्फ कम गिर रही है और पौधों का विकास जल्दी हो रहा है, जिससे आग को फैलने के लिए ज्यादा अनुकूल माहौल मिल रहा है। 


यह आग कितनी खतरनाक है?

यह जंगल की आग विनाशकारी है और इसके प्रभाव स्थानीय समुदायों से लेकर मीलों दूर बसे बड़े शहरों तक महसूस किए जा रहे हैं।

बड़े पैमाने पर तबाही और बेकाबू आग: मौजूदा समय में कनाडा में लगभग 888 से 897 स्थानों पर सक्रिय रूप से आग लगी हुई है, जिनमें से अधिकांश पूरी तरह बेकाबू हो चुकी हैं। अब तक लगभग 30 लाख हेक्टेयर जमीन जलकर खाक हो चुकी है। 

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फीफा विश्व कप 2026। - फोटो : अमर उजाला
समुदायों का विस्थापन: आग का कहर इतना भीषण है कि 'नमयगूसिसागगुन फर्स्ट नेशन' जैसे समुदाय पूरी तरह से नष्ट होकर राख में बदल गए हैं। आग के तेजी से बढ़ने के कारण लोगों को छोटी नावों के जरिए अपनी जान बचाकर भागना पड़ा। कुल मिलाकर 10 समुदायों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। 

गंभीर स्वास्थ्य जोखिम: इस आग से पैदा हो रहे धुएं में पीएम2.5 और पीएम 10 जैसे बेहद बारीक कण और नाइट्रोजन डाइऑक्साइड मौजूद हैं, जो सीधे फेफड़ों की गहराई तक पहुंच जाते हैं और सूजन पैदा करते हैं। यह धुआं अस्थमा, हृदय रोग, किडनी और आंखों की बीमारियों को गंभीर रूप से बढ़ा देता है। हर साल जंगल की आग के धुएं से हजारों लोगों की जान जाती है। सांस लेने में तकलीफ और सीने में जकड़न इसके प्रमुख लक्षण हैं।

जंगल की आग और इससे फैलने वाले धुएं का अब तक क्या असर हुआ है? 


1. खराब वायु गुणवत्ता और स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव
धुएं की वजह से अमेरिका के न्यूयॉर्क, डेट्रॉयट, वाशिंगटन डीसी और शिकागो जैसे शहरों में हवा की गुणवत्ता दुनिया में सबसे खराब (खतरनाक) स्तर पर पहुंच गई है। हवा में जहर घुलने के कारण शहरों में लोगों को एन95 मास्क पहनने और घरों के अंदर रहने की सलाह दी गई है।

2. अमेरिका के अहम खेल आयोजनों पर असर
खराब हवा के कारण मेजर लीग सॉकर (एमएलएस) और मेजर लीग बेसबॉल (एमएलबी) के कई मैच पहले ही स्थगित किए जा चुके हैं। इसके अलावा, नेशनल विमेंस सॉकर लीग के एक मैच के दौरान खराब हवा के कारण खिलाड़ियों को अतिरिक्त हाइड्रेशन ब्रेक लेने पड़े। अब सबसे बड़ा संकट न्यू जर्सी के मेटलाइफ स्टेडियम में स्पेन और अर्जेंटीना के बीच होने वाले 2026 फीफा वर्ल्ड कप फाइनल पर है।

3. यातायात और सामान्य जनजीवन में संकट
धुएं की घनी चादर की वजह से दृश्यता बहुत कम हो गई है, जिससे न्यूयॉर्क की स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी और वॉशिंगटन डीसी के कई स्मारक दिखाई देना बंद हो गए। कम दृश्यता के चलते नेवार्क हवाई अड्डे से कई उड़ानें रद्द कर दी गईं। इसके अलावा आउटडोर इवेंट्स, बच्चों के समर कैंप और समुद्री तटों को बंद करना पड़ा है।


फीफा वर्ल्ड कप फाइनल पर इसके असर की क्या संभावना है?

स्पेन और अर्जेंटीना के बीच फीफा वर्ल्ड कप फाइनल पर जंगल की आग के धुएं के असर को लेकर शुरुआत में काफी चिंताएं हैं, क्योंकि यह मैच न्यू जर्सी के एक खुले मेटलाइफ स्टेडियम में होना है। 

फीफा और अधिकारियों का रुख
फीफा के अध्यक्ष जियानी इन्फेंटिनो और व्हाइट हाउस के अधिकारियों के बीच इस स्थिति को लेकर अनौपचारिक चर्चाएं हुई हैं। फीफा ने स्पष्ट किया है कि मौजूदा समय में वायु गुणवत्ता के कारण खेल पर कोई असर पड़ने की आशंका नहीं है और फाइनल मैच के लिए कोई बड़ा खतरा नहीं है। इसके अलावा, खराब मौसम के कारण मैच को स्थगित करने या उसमें कोई बदलाव करने की कोई बैकअप योजना नहीं बनाई गई है।

FIFA World Cup Final Argentina vs Spain in New Jersey New York US Canada Wildfires Smoke Smog Health Players
फीफा विश्व कप 2026। - फोटो : अमर उजाला
मौसम का पूर्वानुमान (राहत की उम्मीद)
शुक्रवार से ही हवा की गुणवत्ता में काफी सुधार देखा गया है। मौसम विज्ञानियों के मुताबिक, शनिवार को 1.25 इंच तक बारिश होने का अनुमान है। इस बारिश और हवा की दिशा में बदलाव से यह पूरी उम्मीद है कि रविवार दोपहर तीन बजे (मैच शुरू होने के समय) तक आसमान साफ हो जाएगा और खिलाड़ियों के लिए हवा सांस लेने योग्य होगी। 

...पर अनिश्चितताएं अब भी बाकी
भले ही बारिश से राहत की उम्मीद है, लेकिन पूर्वानुमानों में अभी भी अनिश्चितता बनी हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर कनाडा में आग की तीव्रता फिर से बढ़ती है, तो शनिवार की बारिश के बाद धुएं का एक और गुबार न्यू जर्सी तक पहुंच सकता है। कंप्यूटर मॉडल्स के अनुसार, खेल के दौरान धुएं का स्तर बिल्कुल नहीं से लेकर कुछ हद तक चिंताजनक स्तर के बीच रह सकता है।

संक्षेप में कहा जाए तो प्रशासन और मौसम विभाग को पूरी उम्मीद है कि रविवार तक स्थिति सामान्य हो जाएगी और 80,000 दर्शकों की मौजूदगी में वर्ल्ड कप फाइनल बिना किसी रुकावट के खेला जा सकेगा। हालांकि, इसमें बड़ा प्रभाव कनाडा के जंगलों में लगी आग का होगा। 

अगर विश्व कप फाइनल के दिन हवा खराब हुई तो क्या होगा?

अगर फाइनल के दिन तक हवा की गुणवत्ता खराब रहती है, तो इसके कई गंभीर परिणाम देखने को मिल सकते हैं, हालांकि मैच रुकने की संभावना बहुत कम है। सबसे अहम बात यह है कि खराब मौसम या जहरीली हवा के कारण फाइनल मैच की जगह बदलने या उसे स्थगित करने की कोई बैकअप योजना नहीं बनाई गई है। फीफा और व्हाइट हाउस के अधिकारी स्थिति की लगातार निगरानी कर रहे हैं, लेकिन फिलहाल मैच अपने तय कार्यक्रम के अनुसार ही होने की पूरी उम्मीद है।
 

खिलाड़ियों-दर्शकों पर क्या हो सकता है खतरनाक धुएं का असर?


खिलाड़ियों के स्वास्थ्य और खेल पर असर
अगर एयर क्वालिटी इंडेक्स 150 से ऊपर या चिंताजनक स्तर पर रहता है, तो इसका सीधा और सबसे बुरा प्रभाव मैदान पर मौजूद खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर पड़ेगा। विशेषज्ञों के मुताबिक, हवा में मौजूद प्रदूषक कण सांस की नली को सिकोड़ सकते हैं, जिससे खिलाड़ियों को सीने में जकड़न, दम घुटने और सांस फूलने की भारी समस्या होगी। 

श्वसन विशेषज्ञों ने द न्यूयॉर्क टाइम्स को बताया कि एक सामान्य फुटबॉल टीम के लगभग 15 से 20 प्रतिशत खिलाड़ियों का अस्थमा या सांस से जुड़ी बीमारियों का इतिहास होता है। ऐसे खिलाड़ियों के लिए इस प्रदूषित हवा में खेलना विशेष रूप से खतरनाक हो सकता है। इतना ही नहीं आंखों और गले में लगातार जलन व खांसी आने के कारण खिलाड़ियों का ध्यान खेल से भटक सकता है, जिससे मैदान पर उनकी मुस्तैदी में कमी आ सकती है।

स्टेडियम में मौजूद दर्शकों पर खतरा
यह फाइनल मैच न्यू जर्सी के मेटलाइफ स्टेडियम में होना है, जो कि एक खुला स्टेडियम है। यहां लगभग 80,000 दर्शकों के जुटने की उम्मीद है। खुले आसमान के नीचे लगातार खराब हवा में बैठे रहने से दर्शकों, खासकर अस्थमा या हृदय रोगों से पीड़ित लोगों को सांस की गंभीर बीमारियों और कार्डियोवैस्कुलर (हृदय संबंधी) समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। 

खिलाड़ियों को धुएं के असर से बचाने के लिए हो सकती है तैयारी

खिलाड़ियों को जहरीली हवा और थकान से बचाने के लिए मैच के दौरान अतिरिक्त ब्रेक लागू किए जा सकते हैं। इसके लिए खराब हवा के बीच क्वींस में खेले गए एक नेशनल विमेंस सॉकर लीग मैच को उदाहरण बनाया जा सकता है, जिसमें खिलाड़ियों को हर हाफ में दो अतिरिक्त हाइड्रेशन ब्रेक' दिए गए थे। वर्ल्ड कप फाइनल में भी यह तरीका अपनाया जा सकता है, हालांकि इतने बड़े टूर्नामेंट में बार-बार मैच रुकने से विवाद भी खड़ा होने की आशंका है।


आग-धुएं को लेकर अमेरिका-कनाडा के बीच राजनीति क्यों? 

जंगल की आग और उसके धुएं को लेकर अमेरिका और कनाडा के बीच गहरा राजनीतिक विवाद और आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। 

1. अमेरिकी राष्ट्रपति के आरोप और धमकियां
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडा पर जंगलों का सही रखरखाव न करने और आग रोकने में जानबूझकर लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है। ट्रंप ने इस धुएं से होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए कनाडा पर नए टैरिफ लगाने की धमकी दी है। ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिका गंदी, प्रदूषित और अस्वस्थ हवा के हमले का शिकार हो रहा है।
 

FIFA World Cup Final Argentina vs Spain in New Jersey New York US Canada Wildfires Smoke Smog Health Players
फीफा विश्व कप 2026। - फोटो : अमर उजाला
2. रिपब्लिकन सांसदों की कनाडा में दखल की चेतावनी
दूसरी मिशिगन के चार रिपब्लिकन सांसदों ने कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी को एक कड़ा पत्र लिखा। इसमें उन्होंने कहा कि कनाडा की निष्क्रियता की कीमत हर साल अमेरिकियों के फेफड़े चुका रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कनाडा ने जंगलों की छंटाई, ईंधन का इस्तेमाल करने और आगजनी रोकने में लंबे समय से कम निवेश किया है। साथ ही चेतावनी दी कि अगर कनाडा ने कदम नहीं उठाए तो अमेरिका सीधे हस्तक्षेप कर सकता है।

कुछ रिपब्लिकन नेताओं ने इस मुद्दे का फायदा उठाते हुए कनाडा को अमेरिका का 51वां राज्य बनाने की बात दोहराई, जिससे कनाडाई लोगों में भारी नाराजगी फैल गई और कई लोगों ने विरोध में अमेरिका की यात्रा न करने का फैसला किया।

3. कनाडा का कड़ा पलटवार
ओंटारियो के प्रीमियर (मुख्यमंत्री) डग फोर्ड ने अमेरिकी आलोचनाओं का तीखा जवाब देते हुए कहा, "शिकायत करने के बजाय आपको मदद और संसाधन भेजने चाहिए, क्योंकि हमने भी अपने अमेरिकी दोस्तों के लिए बिल्कुल यही किया है।" फोर्ड ने याद दिलाया कि अतीत में कनाडा ने कैलिफोर्निया की जंगल की आग और कैरोलाइना के तूफानों के दौरान अमेरिका की मदद की है।

4. कनाडाई पीएम का ट्रंप पर पलटवार
कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने ट्रंप की धमकियों का जवाब देते हुए स्पष्ट किया कि जलवायु परिवर्तन से लड़ना सभी की साझा जिम्मेदारी है, जिसमें अमेरिका भी शामिल है। दूसरी तरफ कनाडाई अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि वे आग बुझाने के लिए 150 से अधिक दमकल टीमों, 80 वाटर बॉम्बर और हेलीकॉप्टरों के साथ अपनी पूरी ताकत लगा रहे हैं और इसके लिए अपने तय बजट से कहीं ज्यादा पैसा खर्च कर रहे हैं। इसके अलावा, कनाडा ने हाल के वर्षों में जंगल के रखरखाव पर लगभग 12 अरब कनाडाई डॉलर खर्च किए हैं।


आग और धुएं के लिए अमेरिका-कनाडा में असल में कौन जिम्मेदार?

विशेषज्ञों के मुताबिक,  इस समस्या के लिए सिर्फ कनाडा को दोष देना गलत है। यूनिवर्सिटी ऑफ टोरंटो के डॉ. पैट्रिक जेम्स ने बताया कि मौसम अंतरराष्ट्रीय सीमाओं की परवाह नहीं करता और एक बार धुआं वायुमंडल में पहुंचने के बाद हवा उसे कहीं भी ले जा सकती है। इससे पहले अमेरिका की भयंकर आग का धुआं भी कनाडा को इसी तरह प्रभावित कर चुका है।

विश्लेषकों का कहना है कि कनाडा के जंगलों में आधी आग आसमानी बिजली गिरने से और बाकी मानवीय गतिविधियों से लगती हैं। लेकिन बढ़ता वैश्विक तापमान, अत्यधिक सूखा, लंबे समय तक टिकने वाली लू और सर्दियों में कम बर्फबारी जैसे कारण वनस्पति को सुखा रहे हैं, जो इस आग के लिए भारी मात्रा में ईंधन का काम कर रही है।

विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि ये आग कनाडा के इतने विशाल और दूरदराज के जंगलों में लगी है कि वहां बेहतर वन प्रबंधन के बावजूद इतने बड़े पैमाने पर प्राकृतिक आग को शुरुआत में ही पूरी तरह से रोकना लगभग असंभव है। यूनिवर्सिटी ऑफ वाटरलू की डॉ. अनाबेला बोनादा के अनुसार, "जलवायु परिवर्तन एक वैश्विक मुद्दा है, और यह सुझाव देना गलत होगा कि केवल कनाडा ने इन जंगलों की आग को पैदा किया या वह इन्हें रोक सकता था।" इस आपदा की मुख्य जिम्मेदारी लगातार बिगड़ते वैश्विक जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक कारकों पर है।



 
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