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प. एशिया में बढ़ा तनाव: अमेरिकी हमलों पर ईरान का पलटवार, खाड़ी देशों में कितने सैन्य ठिकानों को बनाया निशाना?

Sat, 18 Jul 2026 05:26 PM IST
Devesh Tripathi आईएएनएस, तेहरान
आईएएनएस, तेहरान Published by: Devesh Tripathi Updated Sat, 18 Jul 2026 05:26 PM IST
सार

अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य टकराव लगातार तेज होता जा रहा है। अमेरिकी सेना ने ईरान में कई रणनीतिक ठिकानों पर नए हमले किए, जिसके जवाब में ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य सुविधाओं और सहयोगी देशों में मौजूद ठिकानों को निशाना बनाने का दावा किया। क्षेत्रीय देशों ने कई मिसाइलों को रोकने और हमलों से हुए नुकसान की जानकारी दी है।

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US-Iran tensions escalate Iran retaliates targeting US military bases in Gulf nations West Asia crisis
पश्चिम एशिया तनाव - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) की ओर से रातभर ईरान पर नए हमले किए जाने के बाद शनिवार को ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी सहयोगी देशों में मौजूद अमेरिकी ठिकानों पर नए हमले किए।
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ईरान की मेहर समाचार एजेंसी के अनुसार, बुशेहर प्रांत, होर्मोजगान प्रांत के सीरिक और केशम के इलाकों में विस्फोटों की खबर है। वहीं, सरकारी समाचार एजेंसी इरना ने बताया कि मध्य ईरान के यज्द प्रांत में पांच विस्फोटों की आवाज सुनी गई।
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अमेरिकी सेना ने लगातार सातवें दिन ईरान पर किए हमले
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने शुक्रवार देर रात सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर कहा कि अमेरिकी सेना ने लगातार सातवीं रात ईरान के खिलाफ हमले किए। इन हमलों में निगरानी ठिकानों, सैन्य रसद ढांचे, भूमिगत हथियार भंडारण केंद्रों और समुद्री क्षमताओं से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाया गया।
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ये भी पढ़ें: ईरान की US को चेतावनी: अमेरिकी हमले जारी रहे तो 2-3 दिन में आएगी तबाही; क्या पूरे पश्चिम एशिया में फैलेगी जंग? 

सेंटकॉम ने कहा, "मध्य पूर्व में 50,000 से अधिक अमेरिकी सैनिक तैनात हैं और वे पूरी तरह सतर्क, घातक क्षमता से लैस और हर स्थिति के लिए तैयार हैं।" ईरान के सरकारी मीडिया के अनुसार, ताजा अमेरिकी हमलों में तीन लोगों की मौत हुई, जबकि आठ अन्य घायल हो गए।

पलटवार में ईरान ने किन अमेरिकी सैन्य ठिकानों को बनाया निशाना?
ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने शनिवार को दावा किया कि उसने कुवैत के अल अहमदी बंदरगाह पर स्थित अमेरिकी नौसैनिक ईंधन सहायता तट और बहरीन के शेख ईसा एयर बेस स्थित अमेरिकी लड़ाकू विमान ठिकाने को निशाना बनाया। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, जॉर्डन की वायु रक्षा प्रणाली ने ईरान की ओर से दागी गई मिसाइलों को मार गिराया। बहरीन ने भी कई हवाई हमलों को विफल करने का दावा किया।

वहीं, कुवैत ने कहा कि ईरानी हमले के बाद एक बिजली और समुद्री जल शोधन संयंत्र में आग लग गई। कुवैत फायर फोर्स के अनुसार, ईरानी हमलों से भड़की दो अन्य आग से लड़ते समय कई अग्निशामकों और एक कार्यकर्ता को भी चोटें आईं। मिसाइल खतरों के कारण कुवैत ने सुबह अपना हवाई क्षेत्र को कुछ देर के लिए बंद कर दिया था। इसके साथ ही कुवैत एयरवेज ने राजधानी से और राजधानी के लिए अधिकांश उड़ानों को पुनर्निर्धारित करने की घोषणा की थी। 

आईआरजीसी ने यह भी कहा कि जिन देशों की जमीन का इस्तेमाल ईरान पर हमले के लिए किया जाएगा, उन्हें भी "उसी प्रकार की प्रतिक्रिया" का सामना करना पड़ेगा। यह जानकारी ईरान की अर्ध-सरकारी तस्नीम समाचार एजेंसी ने दी।

ईरान ने अमेरिका को दी क्या चेतावनी? 
ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई के सैन्य सलाहकार मोहसिन रजाई ने शुक्रवार को चेतावनी दी कि अगर अमेरिका दो से तीन दिन और युद्ध जारी रखता है तो ईरान आक्रामक और विनाशकारी चरण में प्रवेश करेगा। सरकारी प्रसारक आईआरआईबी टीवी को दिए साक्षात्कार में रजाई ने कहा कि युद्ध और बातचीत साथ-साथ की नीति अब समाप्त हो चुकी है।


ये भी पढ़ें: US-Iran Conflict: अमेरिकी हमले में चाबहार बंदरगाह का समुद्री ट्रैफिक कंट्रोल टावर नष्ट; ईरान ने किया पलटवार

उन्होंने कहा कि अगर अमेरिकी हमले जारी रहे तो ईरानी सशस्त्र बल केवल जवाबी कार्रवाई तक सीमित नहीं रहेंगे। दुनिया में कहीं भी अमेरिकी सैन्य अड्डे और सैनिक सुरक्षित नहीं रहेंगे। रजाई ने कहा कि अब तक ईरान ने युद्ध को व्यापक क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय संघर्ष में बदलने से रोकने के लिए संयम बरता है। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका ने इस युद्ध को क्षेत्रीय संघर्ष में बदलकर गलत आकलन किया है।

उन्होंने चेतावनी दी कि ईरान जरूरत पड़ने पर जमीनी सेना समेत अपनी अतिरिक्त सैन्य क्षमताओं का भी इस्तेमाल कर सकता है और ऐसे में युद्ध का दायरा और अधिक बढ़ सकता है।
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